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अधूरी तैयारियों के बीच मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन टला

Fri, 17 Mar 2017 11:49 PM IST
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karnal Updated Fri, 17 Mar 2017 11:49 PM IST
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मायूस मजदूर। - फोटो : bureau

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कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज प्रशासन की अधूरी तैयारियों के चलते कॉलेज की नई बिल्डिंग का उद्घाटन एक बार फिर से टल गया। शुक्रवार को होने वाले इस उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा मुख्य अतिथि और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अध्यक्षता करने वाले थे। वहीं राज्य सरकार के करीब चार मंत्री भी इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत करने वालेे थे। उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर कई दिनों से कॉलेज परिसर में टेंट लगाने से लेकर, फूल-पौधे लगाने जैसे सजावटी कार्य किए जा रहे थे, स्टेज को सजाने के लिए शुक्रवार को कई क्विंटल फूल भी कॉलेज परिसर में पहुंच गया था, लेकिन कॉलेज की शिफ्टिंग में देरी और अधूरी तैयारी के कारण ऐन वक्त पर कार्यक्रम कैंसल कर दिया गया, जिससे कॉलेज में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि इस लेट-लतीफी का ठीकरा जल्द ही कॉलेज प्रशासन के कुछ अधिकारियों पर भी फूट सकता है।

प्रशासन द्वारा उद्घाटन की अगली डेट अभी तक फाइनल नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेज को नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग कर उद्घाटन कराने की कोशिश कई बार की जा चुकी है। लेकिन हर बार तैयारियां पूरी न होने के कारण उद्धाटन टलता गया। कॉलेज प्रशासन नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग की कोशिश पिछले वर्ष के नवंबर माह से ही कर रहा है। लेकिन हर बार माह खत्म होते ही इसे अगले माह के लिए टाल दिया जाता। फरवरी माह में एसीएस धनपत सिंह ने उद्घाटन की डेट फाइनल करने के लिए कॉलेज परिसर का दौरा किया था, लेकिन यहां पर अधूरी तैयारियों को देखते हुए उन्होंने कॉलेज प्रशासन को जमकर फटकार लगाई और बिना डेट फाइनल किए लौट गए। जिसके बाद लगातार उद्घाटन की डेट फाइनल करने की कोशिश होती रही, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार कॉलेज प्रशासन द्वारा तैयारी पूरी होने की बात कहकर पहली बार 15 मार्च का दिन उद्घाटन के लिए फाइनल किया गया। लेकिन उद्घाटन से कुछ दिन पहले पहले एकबार फिर से उद्घाटन की डेट बदलकर 18 मार्च कर दिया गया। इस दिन उद्घाटन के लिए बकायदा मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों के नाम की घोषणा भी की गई और पूरे शहर में हजारों लोगों को समारोह में आने के लिए निमंत्रण पत्र भी भेजे गए। सभी तैयारियों को पूरी करने के लिए कॉलेज प्रशासन के साथ जिला प्रशासन भी जोर-शोर से जुटा था।
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दो-तीन दिन के अंदर ही नई बिल्डिंग में ओपीडी को शुरू कर ट्रामा सेंटर को भी शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन इसके बाद भी कॉलेज प्रशासन पूरी तरह से शिफ्टिंग में असफल रहा। इसकी जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने उद्धाटन कार्यक्रम को ही निरस्त कर दिया। वहीं इस मामले में कॉलेज प्रशासन मौन साधे हुए है। इस बारे में जब कॉलेज के डॉयरेक्टर सुरेंद्र कश्यप से बात की गई तो उन्होंने कार्यक्रम निरस्त होने के कारण बताने से मना कर दिया, वहीं डीपीआरओ से जारी प्रेस नोट में कार्यक्रम निरस्त होने का कारण अज्ञात बताया गया है। 
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उद्घाटन की तैयारियों में लाखों रुपये खर्च 
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री के आवागमन को देखते हुए भव्य तैयारियां की जा रही थीं। कॉलेज परिसर में चार दिनों से लाखों रुपये का पंडाल और स्टेज लगाया जा रहा था। जहां पंडाल पूरी तरह से लग चुका था, वहीं हजारों लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां भी आ गई थीं। इसी तरह सुंदरीकरण के लिए छोटे-बड़े सैकड़ों फूल-पौधों के पेड़ भी मंगाए गए थे। जिनमें से कुछ तो लगा दिए गए, वहीं कुछ समारोह कैंसिल होने के कारण वैसे ही छोड़ दिए गए। इसके अलावा पंडाल व स्टेज को सजाने के लिए करीब तीन से चार क्विंटल गुलाब, गेंदा, चंपा जैसे दर्जनों तरह के फूल और गुलदस्ते मंगाए गए थे। जो शुक्रवार को समारोह स्थल पर पहुंच भी गए, लेकिन कार्यक्रम कैंसिल होने के कारण इन्हें लौटा दिए गया। इन तैयारियों पर कॉलेज प्रशासन के अब तक लाखों रुपये खर्च हो गए।

मरीजों को लगनी पड़ रही लंबी दौड़
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की अधूरी तैयारियों का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा रहा है। कॉलेज प्रशासन ने ओपीडी, ट्रामा सेंटर, दावा वितरण जैसे वार्ड को तो नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया, लेकिन लेबर रूम, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्कैन, दंत ओपीडी अभी भी पुराने भवन में ही चल रहा है। जिस कारण नई बिल्डिंग के ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीज और ओपीडी में दिखाने वाले हड्डी रोग व पेट से संबंधित मरीजों को एक्सरे व अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आधा किलोमीटर दूर स्थित पुराने भवन तक दौड़ लगानी पड़ती है। इससे समय की बर्बादी के साथ-साथ मरीजों को भारी परेशानी का भी सामना करना पड़ता। कई मरीज इस दौड़-भाग से बचने के लिए कॉलेज गेट से ही वापस लौट जा रहे हैं।


कई चक्कर के बाद मिले डॉक्टर
 पेट से संबंधित परेशानियों की जांच कराने आए सिरसल के बुजुर्ग कलीराम को डॉक्टर तक पहुंचने के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ी। कलीराम ने बताया कि वे डॉक्टर को दिखाने के लिए सुबह 10 बजे से यहां भटक रहे थे और दोपहर एक बजे डॉक्टर तक पहुंच पाए। यहां पर तैनात स्टॉप को ही नहीं पता कि कौन सा डॉक्टर किस फ्लोर पर बैठता है। कोई बताता है कि चौथे फ्लोर पर डॉक्टर बैठे हैं तो काई तीसरे और कोई दूसरे फ्लोर पर बैठे हैं। कई घंटों की दौड़ के बाद डॉक्टर तक पहुंच पाए। 



 
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