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चीनी मिलों का पेराई सत्र एक महीनापहले चलाने के लिए सिर्फ दो वर्ष का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Apr 2022 02:12 AM IST
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New species of sugarcane will flourish in the fields, the yield will also increase
कर्मबीर लाठर
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करनाल। उत्तर भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व उत्तराखंड की चीनी मिलों में आने वाले दो वर्ष में गन्ने की नई प्रजाति सीओ-15023 पेराई में आ जाएगी। पिछले वर्ष करनाल स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र से रिलीज इस प्रजाति का बीज अधिकतर चीनी मिलों के क्षेत्र में पहुंच चुका है। केंद्र के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके पांडे ने बताया कि अधिक मिठास, अति अगेती, वजनदार व ठोस गन्ने के गुणों वाली यह प्रजाति मिलों का पेराई सत्र एक महीना पहले चलाने की क्षमता रखती है। इस किस्म को लेकर कुछ किसान वांछित पैदावार नहीं ले पाए। जिस पर अनुसंधान वैज्ञानिकों ने शस्य क्रियाएं (पैकेज एंड प्रेक्टीसिज) बताई हैं ताकि किसान किसी प्रकार की गलती न करें।
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि देखरेख करने वाले किसानों को सीओ-15023 किस्म की 650 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार मिली है। यह किस्म प्राथमिक के बाद द्वितीय कल्ले का इंतजार करती है और प्रारंभिक पौधा लंबवत बढ़वार के बजाय दूसरे कल्ले को साथ लेकर अपनी पूरी संख्या बनाकर बढ़ता है। उत्तर भारत में करीब 85 प्रतिशत क्षेत्र में फैली सीओ-0238 किस्म लालसड़न रोग व चोटी भेदक कीट के प्रति संवेदनशील होने के कारण इसका स्थान सीओ-15023 लेगी। -संवाद
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इसके विस्तार के लिए किसान इन बातों का रखें ध्यान
- वसंतकालीन (फरवरी-मार्च) बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी तीन से पांच फुट तथा गेहूं कटाई उपरांत ढाई से तीन फुट रखें। सरदकालीन बिजाई का उपयुक्त समय सितंबर से अक्तूबर का प्रथम सप्ताह है।
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- सूखी बिजाई की है तो बीज पर एक इंच से ज्यादा मिट्टी न चढ़ाएं और तुरंत हल्की सिंचाई करें। खेत की परिस्थिति व वातावरण अनुसार अच्छे अंकुरण के लिए दो-तीन हल्की सिंचाई करें।
- बिजाई के बाद तीसरे दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए दो किलोग्राम एट्राजीन करीब 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।
- खेत में पौधों की उपयुक्त संख्या करीब 40 हजार तक बनाए रखने के लिए द्वितीय कल्ले का इंतजार करना है, इसलिए ज्यादा मिट्टी न चढ़ाएं।
- अगस्त-सितंबर में बिजाई करते हैं तो दो आंख वाले टुकड़े का चयन करें और बीज को दो प्रतिशत चूने के घोल में उपचारित करें।
- फरवरी-मार्च में एक या दो आंख के टुकड़े बोएं।
- गर्मी में बिजाई करते हैं तो खेत में पानी देने के बाद दो-तीन आंख के टुकड़े का स्वस्थ बीज लें।
- बंधाई के समय छोटे पौधों का अगोला लपेटे में न आए।
- बंधाई के बाद नाइट्रोजन उर्वरक न दें, जून के अंतिम सप्ताह तक अनुशंसित खुराक देकर मिट्टी चढ़ा दें।
- पादप वृद्धि कारकों का प्रयोग कतई न करें।
- अंत:फसल लें तो पौधे के अंकुरण के एक महीने बाद लें।
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