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दफ्तरों में न अफसर मिले और न कर्मचारी
करनाल
Updated Fri, 09 May 2014 12:03 AM IST
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सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी से लेकर अफसर निर्धारित टाइम के बाद कब तक
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आएंगे कुछ नहीं कहा जा सकता। साहब हैं रौब तो दिखाएंगे ही। कार्रवाई का डर
नहीं है। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से आमजन बहुत परेशान हैं।
वीरवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लेटलतीफी का जायजा लिया। करीब एक दर्जन कार्यालयों में कर्मचारी, अधिकारी निर्धारित समय पर नहीं थे। सवा नौ बजे के बाद न कोई कर्मचारी मिला और न ही अधिकारी। जिससे प्रशासन की लापरवाही सरेआम देखी गई।
सफाई कर्मचारियों ने ही साहब की कुर्सी को कूलिंग देने के लिए कई कार्यालयों में एसी चलाया हुआ था। इस व्यवस्था में आमजन परेशान हैं।
ये है लेटलतीफी का टाइम टेबल
हुडा के एस्टेट ऑफिसर आरके सिंह अपने दफ्तर में सुबह नौ बजकर 20 मिनट तक भी नहीं पहुंचे, जबकि इनके ऑफिस पहुंचने का टाइम नौ बजे है।
अकाउंट ऑफिसर की कुर्सी भी साहब का इंतजार करती मिली। मेज, कुर्सी और ऑफिस की सफाई कर्मचारियों ने टाइम पर कर दी थी, लेकिन साहब नौ बजकर 20 मिनट तक नहीं पहुंचे।
हुडा ईओ की पीए भी अपने निर्धारित टाइम पर पहुंचना ठीक नहीं समझते। सुबह नौ बजकर 20 मिनट तक ऑफिस नहीं पहुंचे थे।
बिजली निगम के सहायक कार्यकारी अभियंता ई. आदित्य कुंडू की कुर्सी भी साढ़े नौ बजे तक खाली पड़ी थी।
बिजली निगम में चार कुर्सियों के इंचार्ज भी टाइम पर नहीं पहुंच पाए। नौ बजकर 15 मिनट तक कोई भी बाबू दफ्तर में नहीं था।
कंज्यूमर क्लर्क भी लेट थे। नौ बजकर 25 मिनट पर इनकी कुर्सी भी इंतजार कर रही थी। बताया गया कि साहब तो ऐसे ही आते हैं।
सब डिवीजन क्लर्क भी सवा नौ बजे तक ऑफिस नहीं पहुंच पाए। यदि अधिकारी यहां पर कार्रवाई करें तो सभी कर्मचारी व अधिकारी टाइम पर पहुंच सकते हैं।
जूनियर इंजीनियर भी ऑफिस में टाइम पर पहुंचे। साढ़े नौ बजे तक उनका कार्यालय उनकी राह तक रहा था।
कस्बे में भी मनमर्जी
निसिंग उपतहसील में तो साढ़े नौ बजे तक आफिस के ताले तक नहीं खुले थे। महज दो पटवारी ही कार्यालय पहुंचे।
-निसिंग उप तहसील में नौ बजकर 40 मिनट पर एक रूम खोला गया। इसमें सिस्टम ऑन करके सफाई की गई। अभी तक अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। सफाई कर्मी ने बताया कि दस बजे से पहले यहां कोई नहीं आता। नायब तहसीलदार भी नहीं।
ढील से बढ़ रही कोताही
शहर में लगभग सरकारी दफ्तर लघु सचिवालय में है। दफ्तर में पहुंचने का टाइम सुबह नौ बजे का है और शाम पांच बजे छुट्टी हो जाती है। कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सरकारी ड्यूटी को सिर्फ औपचारिकता समझते हैं। सुबह घंटाभर लेट आना और शाम को टाइम से पहले निकल जाने के सरकारी बाबू आदी हो गए हैं। सरकारी स्टाफ को टाइम के पाबंद बनाने के लिए साल भर में भी प्रशासन की तरफ से छापेमार कार्रवाई नहीं होती। सरकारी ढांचे को सभी कर्मचारी, अफसर भलीभांति समझते हैं।
लोगों की लगी रहती कतार
आमजन की सुबह टाइम पर ही सरकारी ऑफिसाें में आमजन की कतार लग जाती है। जब तक सरकारी स्टाफ आता है तब तक लोग समस्याओं को लेकर भटकते रहते हैं। अफसर तक मिलने के लिए उन्हें दोपहर हो जाती है। इस टाइम में भी अफसर कई बार मिलते नहीं। उन्हें कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए भी फील्ड में जाना पड़ता है। सरकारी तंत्र की यह स्थिति बिल्कुल गलत है। यह हाल तब का है जब एसपी, डीसी जैसे अफसर उनके सिर पर हैं, जो विभाग लघु सचिवालय से बाहर बने हुए है वहां की स्थिति और भी विकट हो सकती है।
वीरवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लेटलतीफी का जायजा लिया। करीब एक दर्जन कार्यालयों में कर्मचारी, अधिकारी निर्धारित समय पर नहीं थे। सवा नौ बजे के बाद न कोई कर्मचारी मिला और न ही अधिकारी। जिससे प्रशासन की लापरवाही सरेआम देखी गई।
सफाई कर्मचारियों ने ही साहब की कुर्सी को कूलिंग देने के लिए कई कार्यालयों में एसी चलाया हुआ था। इस व्यवस्था में आमजन परेशान हैं।
ये है लेटलतीफी का टाइम टेबल
हुडा के एस्टेट ऑफिसर आरके सिंह अपने दफ्तर में सुबह नौ बजकर 20 मिनट तक भी नहीं पहुंचे, जबकि इनके ऑफिस पहुंचने का टाइम नौ बजे है।
अकाउंट ऑफिसर की कुर्सी भी साहब का इंतजार करती मिली। मेज, कुर्सी और ऑफिस की सफाई कर्मचारियों ने टाइम पर कर दी थी, लेकिन साहब नौ बजकर 20 मिनट तक नहीं पहुंचे।
हुडा ईओ की पीए भी अपने निर्धारित टाइम पर पहुंचना ठीक नहीं समझते। सुबह नौ बजकर 20 मिनट तक ऑफिस नहीं पहुंचे थे।
बिजली निगम के सहायक कार्यकारी अभियंता ई. आदित्य कुंडू की कुर्सी भी साढ़े नौ बजे तक खाली पड़ी थी।
बिजली निगम में चार कुर्सियों के इंचार्ज भी टाइम पर नहीं पहुंच पाए। नौ बजकर 15 मिनट तक कोई भी बाबू दफ्तर में नहीं था।
कंज्यूमर क्लर्क भी लेट थे। नौ बजकर 25 मिनट पर इनकी कुर्सी भी इंतजार कर रही थी। बताया गया कि साहब तो ऐसे ही आते हैं।
सब डिवीजन क्लर्क भी सवा नौ बजे तक ऑफिस नहीं पहुंच पाए। यदि अधिकारी यहां पर कार्रवाई करें तो सभी कर्मचारी व अधिकारी टाइम पर पहुंच सकते हैं।
जूनियर इंजीनियर भी ऑफिस में टाइम पर पहुंचे। साढ़े नौ बजे तक उनका कार्यालय उनकी राह तक रहा था।
कस्बे में भी मनमर्जी
निसिंग उपतहसील में तो साढ़े नौ बजे तक आफिस के ताले तक नहीं खुले थे। महज दो पटवारी ही कार्यालय पहुंचे।
-निसिंग उप तहसील में नौ बजकर 40 मिनट पर एक रूम खोला गया। इसमें सिस्टम ऑन करके सफाई की गई। अभी तक अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। सफाई कर्मी ने बताया कि दस बजे से पहले यहां कोई नहीं आता। नायब तहसीलदार भी नहीं।
ढील से बढ़ रही कोताही
शहर में लगभग सरकारी दफ्तर लघु सचिवालय में है। दफ्तर में पहुंचने का टाइम सुबह नौ बजे का है और शाम पांच बजे छुट्टी हो जाती है। कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सरकारी ड्यूटी को सिर्फ औपचारिकता समझते हैं। सुबह घंटाभर लेट आना और शाम को टाइम से पहले निकल जाने के सरकारी बाबू आदी हो गए हैं। सरकारी स्टाफ को टाइम के पाबंद बनाने के लिए साल भर में भी प्रशासन की तरफ से छापेमार कार्रवाई नहीं होती। सरकारी ढांचे को सभी कर्मचारी, अफसर भलीभांति समझते हैं।
लोगों की लगी रहती कतार
आमजन की सुबह टाइम पर ही सरकारी ऑफिसाें में आमजन की कतार लग जाती है। जब तक सरकारी स्टाफ आता है तब तक लोग समस्याओं को लेकर भटकते रहते हैं। अफसर तक मिलने के लिए उन्हें दोपहर हो जाती है। इस टाइम में भी अफसर कई बार मिलते नहीं। उन्हें कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए भी फील्ड में जाना पड़ता है। सरकारी तंत्र की यह स्थिति बिल्कुल गलत है। यह हाल तब का है जब एसपी, डीसी जैसे अफसर उनके सिर पर हैं, जो विभाग लघु सचिवालय से बाहर बने हुए है वहां की स्थिति और भी विकट हो सकती है।