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सौ साल का हुआ एनडीआरआई, मुर्रा भैंस की क्लोनिंग से दुनिया में चमका नाम
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। मुर्रा भैसों की क्लोनिंग कर दुनिया भर में वाहवाही बटोरने वाले करनाल के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) को आज 100 वर्ष हो गए हैं। संस्थान अब विलुप्त होती जा रही गिर गाय की क्लोनिंग, सीमन सेपरेशन जैसे महत्वपूर्ण अनुसंधानात्मक कार्य पर अपने कदम आगे बढ़ा रहा है और एक जुलाई से अपना शताब्दी समारोह मनाने की शुरूआत करेगा।
यहां एक स्तंभ पर शिलालेख के रूप में अंकित किया गया गया है, जिसमें संस्थान की उपलब्धियों का इतिहास चमकेगा। बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर संस्थान में इस स्मृति स्तंभ का अनावरण करेंगे। एक वर्ष तक चलने वाले शताब्दी समारोह में संस्थान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी से भी यहां आने के लिए आग्रह किया जाएगा।
संस्थान के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. धीर सिंह ने बुधवार को बताया कि एक जुलाई 1923 को बेंगलुरु में इस संस्थान की स्थापना हुई थी। 1955 में इसे करनाल में स्थानांतरित किया गया। 1989 को एनडीआरआई को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। इस संस्थान ने देश के विकास में अहम योगदान दिया। शुरुआत में कर्ण फ्रिज व कर्ण स्विस नस्ल की गायें विकसित करने की उपलब्धि दर्ज कीं। क्लोनिंग तकनीक विकसित कर दुनिया के सामने इतिहास रचा है। दूध में मिलावट व रसायन के मिश्रण से संबंधित जांच तकनीकें विकसित कर हस्तांतरित की हैं ताकि मिलावटी व नकली दूध पर अंकुश लग सके।
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प्रमुख उपलब्ध्यिां
संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके डांग ने बताया कि संस्थान में ऑक्सीजन पार्क तैयार किया गया है। संस्थान की उपलब्धियों में कालेस्ट्रॉल फ्री घी बनाया गया। दूध में डिटर्जेंट का पता लगाने के लिए एक नया परीक्षण किया गया। एंटी बायोटिक अवशेषों के लिए एक किट ईजाद की, जानवरों के लिए विशिष्ठ खनिज मिश्रण, आयरन फोर्टिफाइड बिस्किट के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है। दूध में प्रोबायोटिक डालकर न्यूट्रीशन वेल्यू बढ़ाने पर काम किया है।
इन पर चल रहा अनुसंधान
आगामी अनुसंधानों में गिर गाय की क्लोनिंग के प्रयास चल रहे हैं। देसी गाय की नस्लों के दूध की गुणवत्ता पर शोध किया जा रहा है। आने वाले समय में दूध की गुणवत्ता बढ़ाना और दुग्ध उत्पादों की ब्रांडिंग करने पर ध्यान केंद्रित रहेगा। भविष्य में बकरी के दूध से उत्पाद बनाने के प्रयास किए जाएंगे। देसी जानवरों की विशेषताओं को लेकर उन्हें बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा सीमन सेपरेशन पर अहम अनुसंधान किया जा रहा है। गाय-भैंसों के कृत्रिम गर्भाधान में पहले ही तय हो जाता है कि मेल या फीमेल कॉफ मिलेगा। उम्मीद की जा रही है कि यह अनुसंधान सफल होगा।
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करनाल। मुर्रा भैसों की क्लोनिंग कर दुनिया भर में वाहवाही बटोरने वाले करनाल के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) को आज 100 वर्ष हो गए हैं। संस्थान अब विलुप्त होती जा रही गिर गाय की क्लोनिंग, सीमन सेपरेशन जैसे महत्वपूर्ण अनुसंधानात्मक कार्य पर अपने कदम आगे बढ़ा रहा है और एक जुलाई से अपना शताब्दी समारोह मनाने की शुरूआत करेगा।
यहां एक स्तंभ पर शिलालेख के रूप में अंकित किया गया गया है, जिसमें संस्थान की उपलब्धियों का इतिहास चमकेगा। बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर संस्थान में इस स्मृति स्तंभ का अनावरण करेंगे। एक वर्ष तक चलने वाले शताब्दी समारोह में संस्थान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी से भी यहां आने के लिए आग्रह किया जाएगा।
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संस्थान के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. धीर सिंह ने बुधवार को बताया कि एक जुलाई 1923 को बेंगलुरु में इस संस्थान की स्थापना हुई थी। 1955 में इसे करनाल में स्थानांतरित किया गया। 1989 को एनडीआरआई को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। इस संस्थान ने देश के विकास में अहम योगदान दिया। शुरुआत में कर्ण फ्रिज व कर्ण स्विस नस्ल की गायें विकसित करने की उपलब्धि दर्ज कीं। क्लोनिंग तकनीक विकसित कर दुनिया के सामने इतिहास रचा है। दूध में मिलावट व रसायन के मिश्रण से संबंधित जांच तकनीकें विकसित कर हस्तांतरित की हैं ताकि मिलावटी व नकली दूध पर अंकुश लग सके।
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प्रमुख उपलब्ध्यिां
संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके डांग ने बताया कि संस्थान में ऑक्सीजन पार्क तैयार किया गया है। संस्थान की उपलब्धियों में कालेस्ट्रॉल फ्री घी बनाया गया। दूध में डिटर्जेंट का पता लगाने के लिए एक नया परीक्षण किया गया। एंटी बायोटिक अवशेषों के लिए एक किट ईजाद की, जानवरों के लिए विशिष्ठ खनिज मिश्रण, आयरन फोर्टिफाइड बिस्किट के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है। दूध में प्रोबायोटिक डालकर न्यूट्रीशन वेल्यू बढ़ाने पर काम किया है।
इन पर चल रहा अनुसंधान
आगामी अनुसंधानों में गिर गाय की क्लोनिंग के प्रयास चल रहे हैं। देसी गाय की नस्लों के दूध की गुणवत्ता पर शोध किया जा रहा है। आने वाले समय में दूध की गुणवत्ता बढ़ाना और दुग्ध उत्पादों की ब्रांडिंग करने पर ध्यान केंद्रित रहेगा। भविष्य में बकरी के दूध से उत्पाद बनाने के प्रयास किए जाएंगे। देसी जानवरों की विशेषताओं को लेकर उन्हें बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा सीमन सेपरेशन पर अहम अनुसंधान किया जा रहा है। गाय-भैंसों के कृत्रिम गर्भाधान में पहले ही तय हो जाता है कि मेल या फीमेल कॉफ मिलेगा। उम्मीद की जा रही है कि यह अनुसंधान सफल होगा।