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एनडीआरआई की पहल, स्वरोजगार संग पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 02:30 AM IST
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NDRI's initiative, self-employed with environmental protection will get a boost
कर्मबीर लाठर
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने गोमय यानी गोबर से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करने की पहल की है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसे जहां स्वरोजगार के रूप में अपनाया जा सकेगा, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।
गाय के गोबर को पहले से ही हम पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों में प्रयोग करते हैं, लेकिन अब इससे आकर्षक मूर्तियां और दीये बनाए जा सकेंगे। गाय की देसी नस्लों साहिवाल, थारपारकर और गीर के गोमय से निर्मित इन कलाकृतियों से पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। मूर्ति को जल में विसर्जित करने पर पानी को नुकसान होने की बजाय जलीय जीवों व वनस्पति को खाद के रूप में खुराक मिलेगी। इन दीयों को इस्तेमाल के बाद गमलों में डालने पर ये पौधों को खुराक देंगे। संस्थान के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान के मार्गदर्शन में इस विधि से कलाकृतियां बनाने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे स्वरोजगार से जुड़ें और स्वावलंबी बनें। संस्थान के जलवायु प्रतिरोधी पशुधन अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. आशुतोष ने बताया कि कलाकृतियों को चूना, हल्दी व गेरू से रंगा गया है। इनके बॉक्स भी गत्ते से निर्मित हैं। गोमय से निर्मित कलाकृति को विसर्जन करने पर दस मिनट में खत्म हो जाएगी। जल में कोई नुकसान नहीं होगा।
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गोमय से निर्मित आकृतियों का किया गया वैज्ञानिक आकलन
यदि दीपावली पर एक परिवार 11 दीपक जलाता है तो प्रति दीपक बनाने पर 20 ग्राम मिट्टी लगती है। 11 करोड़ दीपकों के लिए 22 हजार क्विंटल मिट्टी लगती है। एक क्विंटल मिट्टी को 900 डिग्री सेंटीग्रेड पर पकाने के लिए लकड़ी ईंधन की मात्रा 553 किलोग्राम लगती है। 22 हजार क्विंटल मिट्टी पकाने के लएि 1.21 लाख 660 क्विंटल ईंधन की जरूरत पड़ती है। इससे हजारों पेड़ों की बलि चढ़ जाती है। लकड़ी महंगी भी पड़ती है। एक क्विंटल ईंधन लकड़ी जलाने पर 175 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। मिट्टी से बने दीये हजारों वर्ष मिट्टी में नष्ट नहीं होते। वहीं गोमय निर्मित दीयों के लिए उपजाऊ मिट्टी और ईंधन लकड़ी की कोई आवश्यकता नहीं। उपयोग के पश्चात गोमय उत्पाद क्यारी व गमलों में खाद के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं। जल विसर्जित सभी गोमय उत्पाद कुछ ही समय में पानी में घुल जाते हैं।
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