फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   ndri clone the animal

एनडीआरआई ने एक और क्लोन कटड़ी पैदा कर रचा इतिहास

Fri, 13 Sep 2013 11:05 PM IST
करनाल
करनाल Updated Fri, 13 Sep 2013 11:05 PM IST
विज्ञापन
ndri clone the animal
विश्व प्रसिद्ध राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक क्लोनिंग के क्षेत्र में भारत का नाम निरंतर दुनिया भर में प्रसिद्ध कर रहे है। संस्थान में इस बार फिर एक क्लोन कटड़ी का जन्म हुआ है।
विज्ञापन


इससे न केवल संस्थान के वैज्ञानिकों की प्रतिभा को और बल मिला है, बल्कि संस्थान और हिंदुस्तान का नाम दुनिया भर में रोशन हुआ है। संस्थान के वैज्ञानिक इससे पूर्व चार अन्य क्लोन कटड़ियों को जन्म दिला चुके है। इस बार पैदा होने वाली क्लोन कटड़ी एनडीआरआई के हार्ट की सर्वाधिक दूध देने वाली सर्वश्रेष्ठ भैंस कर्ण कीर्ति की संतान है, जो संस्थान और उसके वैज्ञानिकाें के लिए गर्व की बात है।
विज्ञापन


सर्वाधिक दूध देने वाली भैंस ने दिया जन्म

एनडीआरआई में सबसे अधिक दूध देने वाली भैंस कर्ण कीर्ति ने करीब एक सप्ताह पूर्व छह सितंबर को क्लोन कटड़ी को जन्म दिया। वैज्ञानिकों ने उसका नाम पूर्णिमा रखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जन्म के समय पूर्णिमा 44 किलोग्राम की थी। वैज्ञानिकों के अनुसार मेडिकल फिटनेस की पुष्टि हुए बिना क्लोन कटड़ी का खुलासा करना उन लोगों के लिए संभव नहीं था लेकिन अब पूर्णिमा पूरी तरह स्वस्थ है। वह ठीक से दूध पी रही है। उसकी गतिविधि भी सामान्य नहीं बहुत अच्छी है।

यह रहा है कर्ण कीर्ति का रिकॉर्ड  
एनडीआरआई की सर्वश्रेष्ठ भैंस कर्ण कीर्ति ने सर्वाधिक दूध देने का रिकॉर्ड पहले ही स्थापित किया हुआ है। कर्ण कीर्ति के दूध के रिकॉर्ड 25.1 किलोग्राम दर्ज किया जा चुका है।

 इस सर्वश्रेष्ठ भैंस से 427 दिन में 4425 किलोग्राम दूध लिया गया है। इस भैंस ने 305 दिन में 3812 किलोग्राम दूध दिया।

पांच वैज्ञानिकों की टीम का सामूहिक प्रयास
संस्थान के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव के अनुसार इस क्लोन कटड़ी को पैदा करने के लिए भी पांच वैज्ञानिकों की टीम ने काम किया। टीम का नेतृत्व डॉ. एसके सिंघल ने किया। उनके साथ टीम में डॉ. एसएस चौहान, डॉ. आरएस माणिक, डॉ. पी पलटा और डॉ. शिव प्रसाद शामिल रहे।

संस्थान में पीएड करने वाले डॉ. मोनिका सैनी और डॉ. नरेश सीलोकर ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वैज्ञानिकों ने पहले की क्लोन कटड़ी की तरह इस क्लोन कटड़ी के जन्म के लिए भी हैंड गाइडेड तकनीक का प्रयोग किया है।

2009 में जन्मी थी पहली क्लोन कटड़ी
एनडीआरआई संस्थान पहली बार वर्ष 2009 में हैंड गाइडेड तकनीक से क्लोन कटड़ी समरूपा को पैदा कर विश्व भर में छा गया था। दुर्भाग्य से समरूपा अधिक दिन जिंदा नहीं रह सकी थी। करीब चार महीने बाद गरिमा ने जन्म दिया, जो झाई साल बाद एक्सपायर हो गई। उसके बाद वर्ष 2010 में गरिमा टू ने जन्म लिया। उसकी डिलीवरी हुई और उसने महिमा को जन्म दिया था।


 संस्थान के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव के अनुसार इस मामले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एस अय्यपन ने संस्थान के वैज्ञानिकों को बधाई देने के साथ कहा कि ऐसी तकनीक से भारत में दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलेगी।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed