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एक बार फिर सरकार को करने होंगे एनडीसी पोर्टल में बदलाव
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पिछले साल जब लगातार अस्थायी संपत्ति आईडी पर रजिस्ट्री होने पर शक गहराया तो उसे रोकने के लिए नगर निगम करनाल के ही आईएएस कमिश्नर विक्रम के सुझाव पर ही 23 नवंबर से नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) पोर्टल में बदलाव करके निगम अधिकारियों का अनुमोदन अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन अब इन अफसरों के फोन नंबरों व उनके स्थान पर अपने नंबरों को अंकित कराकर पोर्टल हैक करके फर्जी आईडी जारी करनी शुरू कर दी। ऐसे में निगमायुक्त ने एक बार फिर हरियाणा सरकार को एनडीसी पोर्टल में बदलाव के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं। दावा है कि इसके लागू होने के बाद फर्जी आईडी जारी करना नामुमकिन हो जाएगा। इन सुझावों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। संभावना है कि पोर्टल में शीघ्र बदलाव किया जा सकता है।
23 नवंबर से पहले एनडीसी पोर्टल से ही सीधे अस्थायी संपत्ति आईडी जारी की जाती थी। नगर निगम को इसकी जानकारी ही नहीं हो पाती थी कि कब कितनी और किस कालोनी की संपत्ति आईडी जारी कर दी गई है। इन आईडी पर सीधे रजिस्ट्री होती रहती थी। परिणाम यह हुआ लगातार अवैध कालोनियां बसती जा रही थीं। नगर निगम व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण चाह कर भी अवैध कालोनियों को विकसित होने से नहीं रोक पा रहे थे। ऐसे में नगर निगम करनाल के कमिश्नर विक्रम ने सरकार को सुझाव दिया था कि यदि पोर्टल पर यह व्यवस्था लागू हो जाए कि अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करने से पहले निगम अधिकारियों से अनुमोदन लिया जाए तो यह अधिकारी अवैध कालोनियों में संपत्ति आईडी को अनुमोदन नहीं देंगे तो वहां रजिस्ट्री भी नहीं होगी। हरियाणा सरकार ने 23 नवंबर-2020 को यह नियम लागू करते हुए पोर्टल में बदलाव कर दिया लेकिन अब पोर्टल को हैक करके अनुमोदन करने वाले अधिकारियों के स्थान पर दूसरे फोन नंबर अंकित कराकर फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करने का मामला सामने आया है। ऐसे में एक बार फिर निगम कमिश्नर विक्रम ने सरकार को अहम सुझाव दिए हैं। इन सुझावों पर सरकार ने विचार विमर्श शुरू कर दिया है।
यह हैं तीन प्रमुख सुझाव-
-पहला यह कि यूजर आईडी स्थानीय निकाय निदेशालय पंचकूला से ही जारी हो, यूजर आईडी वाले निगम अफसरों के फोन नंबर भी संबंधित निगम कमिश्नर के लिखित आदेश पर ही अंकित या बदले जाएं। दूसरा यह कि अस्थायी संपत्ति आईडी तभी जारी हो, जब भूमि मालिक के संपत्ति दस्तावेजों को अपलोड कर दिया जाए। यह वास्तविकता पता चल सके कि आखिर यह संपत्ति किस कालोनी, सेक्टर में हैं। तीसरा यह कि पिछले दिनों यानी कंपनी द्वारा किए गए संपत्ति सर्वे के डाटा को ही अपडेट कर दिया, ताकि अस्थायी संपत्ति आईडी को जारी करने की जरूरत ही खत्म हो जाए।
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23 नवंबर से पहले एनडीसी पोर्टल से ही सीधे अस्थायी संपत्ति आईडी जारी की जाती थी। नगर निगम को इसकी जानकारी ही नहीं हो पाती थी कि कब कितनी और किस कालोनी की संपत्ति आईडी जारी कर दी गई है। इन आईडी पर सीधे रजिस्ट्री होती रहती थी। परिणाम यह हुआ लगातार अवैध कालोनियां बसती जा रही थीं। नगर निगम व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण चाह कर भी अवैध कालोनियों को विकसित होने से नहीं रोक पा रहे थे। ऐसे में नगर निगम करनाल के कमिश्नर विक्रम ने सरकार को सुझाव दिया था कि यदि पोर्टल पर यह व्यवस्था लागू हो जाए कि अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करने से पहले निगम अधिकारियों से अनुमोदन लिया जाए तो यह अधिकारी अवैध कालोनियों में संपत्ति आईडी को अनुमोदन नहीं देंगे तो वहां रजिस्ट्री भी नहीं होगी। हरियाणा सरकार ने 23 नवंबर-2020 को यह नियम लागू करते हुए पोर्टल में बदलाव कर दिया लेकिन अब पोर्टल को हैक करके अनुमोदन करने वाले अधिकारियों के स्थान पर दूसरे फोन नंबर अंकित कराकर फर्जी अस्थायी संपत्ति आईडी जारी करने का मामला सामने आया है। ऐसे में एक बार फिर निगम कमिश्नर विक्रम ने सरकार को अहम सुझाव दिए हैं। इन सुझावों पर सरकार ने विचार विमर्श शुरू कर दिया है।
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यह हैं तीन प्रमुख सुझाव-
-पहला यह कि यूजर आईडी स्थानीय निकाय निदेशालय पंचकूला से ही जारी हो, यूजर आईडी वाले निगम अफसरों के फोन नंबर भी संबंधित निगम कमिश्नर के लिखित आदेश पर ही अंकित या बदले जाएं। दूसरा यह कि अस्थायी संपत्ति आईडी तभी जारी हो, जब भूमि मालिक के संपत्ति दस्तावेजों को अपलोड कर दिया जाए। यह वास्तविकता पता चल सके कि आखिर यह संपत्ति किस कालोनी, सेक्टर में हैं। तीसरा यह कि पिछले दिनों यानी कंपनी द्वारा किए गए संपत्ति सर्वे के डाटा को ही अपडेट कर दिया, ताकि अस्थायी संपत्ति आईडी को जारी करने की जरूरत ही खत्म हो जाए।
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