{"_id":"63e0148d42edaf22b0050fcf","slug":"natural-deaths-of-cattle-stopped-after-strictness-karnal-news-knl135040277-2023-02-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: सख्ती के बाद बंद हो गई गोवंश की स्वाभाविक मौतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: सख्ती के बाद बंद हो गई गोवंश की स्वाभाविक मौतें
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नगर निगम की गोशाला में 26 जनवरी की रात को हुई 45 गायों की मौत की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट 10 दिन बाद भी नहीं आई लेकिन लंबे समय से गोशाला नंदीग्राम में हो रही गोवंश की स्वाभाविक मौतों पर पिछले तीन दिनों से विराम लग गया है। सख्ती बढ़ी और साफ सफाई हुई तो गोवंश की मौतें भी बंद हो गई। सवाल है कि यदि नगर निगम, पशुपालन विभाग पहले ही व्यवस्था को संभाल लेता तो सैकड़ों गोवंश की जिंदगी बच सकती थी। संचालक संस्था की ओर से गोशाला छोड़ने के बाद नगर निगम और पशुपालन विभाग ने गोवंश की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल ली है।
मधुबन फॉरेंसिक लैब को भेजे गए मृत गायों के बिसरा और खाए गए चारे के सैंपलों की जांच रिपोर्ट रविवार को 10वें दिन भी नहीं आई है। जिस जांच रिपोर्ट का इंतजार पुलिस, नगर निगम की तीन सदस्यीय कमेटी और हरियाणा सरकार द्वारा मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय जांच कमेटी के साथ-साथ पशुपालन विभाग को भी है। इसमें आखिर इतना विलंब क्यों हो रहा है। इस पर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि जन सामान्य भी ये जानना चाहता है कि आखिर गोशाला में एक साथ 45 गायों की मौत कैसे हुई। पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने बताया कि अभी एफएसएल की रिपोर्ट नहीं आई है। संभवत: एक-दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी, इसके बाद गोवंश की मौत के मामले की जांच आगे बढ़ेगी। इस मामले में हर तथ्य की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
इधर, बाबा बंसी वाले गोसेवा धाम के प्रबंधक राजेश बंसल के गोशाला का संचालन छोड़ने के बाद नगर निगम ने जिस आस इंटरप्राइजेज संस्था को ठेका दिया था, इसके कर्मचारी तो काम कर रहे हैं लेकिन शेष देखरेख की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग निभा रहा है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. तरसेम राणा की अगुवाई में एक टीम रविवार को भी गोशाला पहुंची और गोवंश के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। डॉक्टर के अनुसार शुक्रवार से अब तक किसी भी गोवंश की स्वाभाविक मौत गोशाला में नहीं हुई है। यही बड़ा सवाल हर किसी की जुबां पर है, क्योंकि यदि पहले ही गोशाला की व्यवस्था को सुधार लिया जाता तो शायद गोवंश को अव्यवस्थाओं के कारण जान नहीं गंवानी पड़ती।
विज्ञापन
सात दिनों में गायब हो गए 114 गोवंश
निगमायुक्त अजय सिंह तोमर ने सोमवार को गोशाला के निरीक्षण के दौरान जब गोवंश की गिनती कराई थी तो उस दिन गोशाला नंदी ग्राम में 994 गोवंश था। इसके बाद लगातार लावारिस गोवंश को गोशाला पहुंचाया भी जाता रहा है, इसके बावजूद रविवार की शाम तक जब पशुपालन विभाग द्वारा गोवंश की टैगिंग की गई तो इसमें कुल 880 गोवंश ही पाया गया। पिछले सात दिन में 144 गोवंश की कमी हो गई। सवाल गोवंश की गिनती पर भी उठना स्वाभाविक है, या पहले गिनती ठीक से नहीं की गई या फिर अब टैगिंग ठीक से नहीं हुई। क्योंकि सात दिन में स्वाभाविक मौतों की संख्या इतनी नहीं हो सकती।
विज्ञापन
करनाल। नगर निगम की गोशाला में 26 जनवरी की रात को हुई 45 गायों की मौत की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट 10 दिन बाद भी नहीं आई लेकिन लंबे समय से गोशाला नंदीग्राम में हो रही गोवंश की स्वाभाविक मौतों पर पिछले तीन दिनों से विराम लग गया है। सख्ती बढ़ी और साफ सफाई हुई तो गोवंश की मौतें भी बंद हो गई। सवाल है कि यदि नगर निगम, पशुपालन विभाग पहले ही व्यवस्था को संभाल लेता तो सैकड़ों गोवंश की जिंदगी बच सकती थी। संचालक संस्था की ओर से गोशाला छोड़ने के बाद नगर निगम और पशुपालन विभाग ने गोवंश की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल ली है।
मधुबन फॉरेंसिक लैब को भेजे गए मृत गायों के बिसरा और खाए गए चारे के सैंपलों की जांच रिपोर्ट रविवार को 10वें दिन भी नहीं आई है। जिस जांच रिपोर्ट का इंतजार पुलिस, नगर निगम की तीन सदस्यीय कमेटी और हरियाणा सरकार द्वारा मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय जांच कमेटी के साथ-साथ पशुपालन विभाग को भी है। इसमें आखिर इतना विलंब क्यों हो रहा है। इस पर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि जन सामान्य भी ये जानना चाहता है कि आखिर गोशाला में एक साथ 45 गायों की मौत कैसे हुई। पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने बताया कि अभी एफएसएल की रिपोर्ट नहीं आई है। संभवत: एक-दो दिन में रिपोर्ट आ जाएगी, इसके बाद गोवंश की मौत के मामले की जांच आगे बढ़ेगी। इस मामले में हर तथ्य की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
विज्ञापन
इधर, बाबा बंसी वाले गोसेवा धाम के प्रबंधक राजेश बंसल के गोशाला का संचालन छोड़ने के बाद नगर निगम ने जिस आस इंटरप्राइजेज संस्था को ठेका दिया था, इसके कर्मचारी तो काम कर रहे हैं लेकिन शेष देखरेख की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग निभा रहा है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. तरसेम राणा की अगुवाई में एक टीम रविवार को भी गोशाला पहुंची और गोवंश के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। डॉक्टर के अनुसार शुक्रवार से अब तक किसी भी गोवंश की स्वाभाविक मौत गोशाला में नहीं हुई है। यही बड़ा सवाल हर किसी की जुबां पर है, क्योंकि यदि पहले ही गोशाला की व्यवस्था को सुधार लिया जाता तो शायद गोवंश को अव्यवस्थाओं के कारण जान नहीं गंवानी पड़ती।
विज्ञापन
सात दिनों में गायब हो गए 114 गोवंश
निगमायुक्त अजय सिंह तोमर ने सोमवार को गोशाला के निरीक्षण के दौरान जब गोवंश की गिनती कराई थी तो उस दिन गोशाला नंदी ग्राम में 994 गोवंश था। इसके बाद लगातार लावारिस गोवंश को गोशाला पहुंचाया भी जाता रहा है, इसके बावजूद रविवार की शाम तक जब पशुपालन विभाग द्वारा गोवंश की टैगिंग की गई तो इसमें कुल 880 गोवंश ही पाया गया। पिछले सात दिन में 144 गोवंश की कमी हो गई। सवाल गोवंश की गिनती पर भी उठना स्वाभाविक है, या पहले गिनती ठीक से नहीं की गई या फिर अब टैगिंग ठीक से नहीं हुई। क्योंकि सात दिन में स्वाभाविक मौतों की संख्या इतनी नहीं हो सकती।