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Karnal News: रुक्मिणी विवाह का सुनाया प्रसंग
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रुक्मिणी विवाह का सुनाया प्रसंग
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। रघुनाथ मंदिर में भगवत कथा के सप्तम दिवस पर साध्वी दीपमाला ने सोमवार को रास लीला एवं रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा में मुख्य यजमान के रूप में पूर्व विधायक सुमिता सिंह और डॉ. कपिल भाटिया ने व्यास जी को तिलक लगाया। साध्वी ने बताया की कृष्ण भगवान ने गोपियों संग रासलीला के पात्रों में राधा-कृष्ण तथा गोपिका रहती हैं। कृष्ण का गोपियों, सखियों के साथ अनुराग पूर्ण नृत्य होता है। कभी कृष्ण गोपियों के कार्यों एवं चेष्टाओं का अनुसरण करते हैं और कभी गोपियां कृष्ण की रूप चेष्टा का अनुसरण करती हैं और कभी राधा सखियों के, कृष्ण की रूप चेष्टाओं का अनुसरण करती हैं। यही लीला है।
उन्होंने कहा कि कभी कृष्ण गोपियों के हाथ में हाथ बांधकर नाचते हैं, इन लीलाओं की कथावस्तु प्रायः राधा-कृष्ण की प्रेम क्रीड़ा होती है। रुक्मिणी जी का बड़ा भाई रुक्मी भगवान श्री कृष्ण से बहुत द्वेष रखते थे। उसको यह बात बिल्कुल सहन न हुई कि मेरी बहन को श्रीकृष्ण हर ले गए और विवाह कर लिया। भगवान श्रीकृष्ण ने सब राजाओं का मन जीत लिया और विदर्भ राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधि पूर्वक पाणिग्रहण किया। कथा के अंत में मुख्य यजमान कृष्ण लाल तनेजा चेयरमैन, बलदेव खेतरपाल प्रधान, अजित सिंह चावला संरक्षक, सतीश चावला कार्यकारिणी सदस्य, अमित आहूजा ने आरती की।
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करनाल। रघुनाथ मंदिर में भगवत कथा के सप्तम दिवस पर साध्वी दीपमाला ने सोमवार को रास लीला एवं रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। कथा में मुख्य यजमान के रूप में पूर्व विधायक सुमिता सिंह और डॉ. कपिल भाटिया ने व्यास जी को तिलक लगाया। साध्वी ने बताया की कृष्ण भगवान ने गोपियों संग रासलीला के पात्रों में राधा-कृष्ण तथा गोपिका रहती हैं। कृष्ण का गोपियों, सखियों के साथ अनुराग पूर्ण नृत्य होता है। कभी कृष्ण गोपियों के कार्यों एवं चेष्टाओं का अनुसरण करते हैं और कभी गोपियां कृष्ण की रूप चेष्टा का अनुसरण करती हैं और कभी राधा सखियों के, कृष्ण की रूप चेष्टाओं का अनुसरण करती हैं। यही लीला है।
उन्होंने कहा कि कभी कृष्ण गोपियों के हाथ में हाथ बांधकर नाचते हैं, इन लीलाओं की कथावस्तु प्रायः राधा-कृष्ण की प्रेम क्रीड़ा होती है। रुक्मिणी जी का बड़ा भाई रुक्मी भगवान श्री कृष्ण से बहुत द्वेष रखते थे। उसको यह बात बिल्कुल सहन न हुई कि मेरी बहन को श्रीकृष्ण हर ले गए और विवाह कर लिया। भगवान श्रीकृष्ण ने सब राजाओं का मन जीत लिया और विदर्भ राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधि पूर्वक पाणिग्रहण किया। कथा के अंत में मुख्य यजमान कृष्ण लाल तनेजा चेयरमैन, बलदेव खेतरपाल प्रधान, अजित सिंह चावला संरक्षक, सतीश चावला कार्यकारिणी सदस्य, अमित आहूजा ने आरती की।
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