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Karnal News: नांगल खनन ब्लॉक मंजूरी को एनजीटी में चुनौती
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करनाल। नांगल खनन ब्लॉक की पर्यावरण मंजूरी के विस्तार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सुनील कुमार ने अपील संख्या 66/2026 में हरियाणा सरकार और परियोजना संचालक मैसर्स चौधरी ट्रांसपोर्ट कंपनी के खिलाफ अपील दायर कर मंजूरी की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि जिले की जिला सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) की पांच साल की अवधि 16 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुकी थी जबकि परियोजना को इसके बाद मई 2026 में पर्यावरण मंजूरी का विस्तार दिया गया।
मामले में हरियाणा राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) की ओर से 27 जुलाई 2026 को एनजीटी में जवाबी शपथपत्र दाखिल किया गया। प्राधिकरण ने अपने जवाब में 30 अप्रैल 2026 को हुई 199वीं बैठक का हवाला देते हुए मंजूरी विस्तार को उचित ठहराया है। एसईआईएए के अनुसार, एनजीटी में मामला विचाराधीन होने के बावजूद खनन गतिविधियों पर रोक लगाने या उन्हें प्रतिबंधित करने का कोई आदेश नहीं था। इसी आधार पर स्वीकृत खनन योजना और पर्यावरणीय सुरक्षा शर्तों के तहत मंजूरी का विस्तार किया गया।
याचिकाकर्ता ने अपील में 15 जनवरी 2016 और 25 जुलाई 2018 की अधिसूचनाओं का उल्लेख किया है। इनके प्रावधानों के अनुसार, जिला सर्वे रिपोर्ट की वैधता पांच वर्ष निर्धारित है। करनाल की डीएसआर 17 फरवरी 2021 को अंतिम रूप से तैयार की गई थी। इस आधार पर याचिकाकर्ता का दावा है कि रिपोर्ट की वैधता 16 फरवरी 2026 को समाप्त हो गई थी।
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ऐसे में अवधि पूरी होने के बाद पर्यावरण मंजूरी का विस्तार किस आधार पर किया गया, यह सवाल एनजीटी के समक्ष उठाया गया है।
82.85 हेक्टेयर में प्रस्तावित है खनन
दस्तावेज के अनुसार, नांगल उत्तर, नांगल दक्षिण, तातारपुर और कमालपुर गाड़ियां गांवों में फैले खनन ब्लॉक का कुल क्षेत्रफल 82.85 हेक्टेयर है। इसमें 56.53 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन प्रस्तावित है। खनन की अधिकतम गहराई तीन मीटर निर्धारित की गई है। परियोजना की सालाना अधिकतम क्षमता 33.63 लाख मीट्रिक टन और अनुमानित लागत 17 करोड़ रुपये बताई गई है।
पर्यावरण प्रबंधन पर भी सवाल
राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) की 320वीं बैठक के दस्तावेज के अनुसार, खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशालय ने पुनर्भरण अध्ययन छह जनवरी 2026 को एसईआईएए को भेजा था। इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को हुई एसईएसी की बैठक में मंजूरी विस्तार के प्रस्ताव पर विचार कर इसे आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई।
परियोजना के दस वर्षों के पर्यावरण प्रबंधन के लिए 1.49 करोड़ रुपये और कॉरपोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी के तहत 60 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। दस्तावेज में 32,808 पौधे लगाने, धूल नियंत्रण के लिए हाई प्रेशर स्प्रिंकलर और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए कंप्यूटरीकृत प्रवेश-निकास द्वार लगाने का भी उल्लेख है।
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मामले में हरियाणा राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) की ओर से 27 जुलाई 2026 को एनजीटी में जवाबी शपथपत्र दाखिल किया गया। प्राधिकरण ने अपने जवाब में 30 अप्रैल 2026 को हुई 199वीं बैठक का हवाला देते हुए मंजूरी विस्तार को उचित ठहराया है। एसईआईएए के अनुसार, एनजीटी में मामला विचाराधीन होने के बावजूद खनन गतिविधियों पर रोक लगाने या उन्हें प्रतिबंधित करने का कोई आदेश नहीं था। इसी आधार पर स्वीकृत खनन योजना और पर्यावरणीय सुरक्षा शर्तों के तहत मंजूरी का विस्तार किया गया।
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याचिकाकर्ता ने अपील में 15 जनवरी 2016 और 25 जुलाई 2018 की अधिसूचनाओं का उल्लेख किया है। इनके प्रावधानों के अनुसार, जिला सर्वे रिपोर्ट की वैधता पांच वर्ष निर्धारित है। करनाल की डीएसआर 17 फरवरी 2021 को अंतिम रूप से तैयार की गई थी। इस आधार पर याचिकाकर्ता का दावा है कि रिपोर्ट की वैधता 16 फरवरी 2026 को समाप्त हो गई थी।
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ऐसे में अवधि पूरी होने के बाद पर्यावरण मंजूरी का विस्तार किस आधार पर किया गया, यह सवाल एनजीटी के समक्ष उठाया गया है।
82.85 हेक्टेयर में प्रस्तावित है खनन
दस्तावेज के अनुसार, नांगल उत्तर, नांगल दक्षिण, तातारपुर और कमालपुर गाड़ियां गांवों में फैले खनन ब्लॉक का कुल क्षेत्रफल 82.85 हेक्टेयर है। इसमें 56.53 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन प्रस्तावित है। खनन की अधिकतम गहराई तीन मीटर निर्धारित की गई है। परियोजना की सालाना अधिकतम क्षमता 33.63 लाख मीट्रिक टन और अनुमानित लागत 17 करोड़ रुपये बताई गई है।
पर्यावरण प्रबंधन पर भी सवाल
राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) की 320वीं बैठक के दस्तावेज के अनुसार, खान एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशालय ने पुनर्भरण अध्ययन छह जनवरी 2026 को एसईआईएए को भेजा था। इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को हुई एसईएसी की बैठक में मंजूरी विस्तार के प्रस्ताव पर विचार कर इसे आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई।
परियोजना के दस वर्षों के पर्यावरण प्रबंधन के लिए 1.49 करोड़ रुपये और कॉरपोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी के तहत 60 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। दस्तावेज में 32,808 पौधे लगाने, धूल नियंत्रण के लिए हाई प्रेशर स्प्रिंकलर और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए कंप्यूटरीकृत प्रवेश-निकास द्वार लगाने का भी उल्लेख है।