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यूपी के शूटर बदमाशों ने बरसाई थीं गोरखा पर गोलियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Feb 2021 12:56 AM IST
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murdaer - फोटो : Kurukshetra
धर्मनगरी में बुधवार को दिन दिहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग कर रवि उर्फ गोरखा की हत्या करने वाले यूपी के शूटर थे। इसी के साथ यह भी तस्वीर भी साफ होने लगी है। दरअसल रिपोर्ट में रवि के भाई साहिल ने जिन चार नामों पर शक जताया था, उनमें से भूप्पी राणा और हैरी सैनी, सौरभ और राहुल के नाम शामिल थे। पुलिस को पुख्ता इनपुट मिल चुका है। अब इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी यूपी के दो शूटर के अलावा इस प्रकरण के पीछे राहुल और सौरभ के नाम बताए गए हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिये पुलिस टीम ने यूपी के मेरठ, मुजफ्फरनगर और अन्य कई इलाकों में शुक्रवार को दबिश दी।
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पता चला है कि यूपी में कई जगहों पर दबिश के बाद नारकोटिक सेल की टीम को बड़ा क्लू मिला था, जिसके बाद चार अपराधियों को पकड़ना संभव हो सका है। हालांकि अधिकृत रुप से इन चारों के नाम पुलिस ने उजागर नहीं किये हैं। यह वही चार लोग हैं, जिन्होंने बुधवार को कुरुक्षेत्र के सलारपुर रोड पर रवि उर्फ गोरखा का मर्डर किया था? या कोई और ? इसका खुलासा पुलिस अधीक्षक हिमांशु गर्ग कर सकते हैं।
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बड़ा सवाल यह है कि रवि की हत्या प्रकरण में राहुल और सौरभ नाम के जिन दो लोगों की भूमिका मानी जा रही है, इससे पहले उनका कोई बड़ा आपराधिक रिकार्ड नहीं है।ऐसे में इनका नेटवर्क यूपी के शूटरों से कैसे जुड़ा,अगले दिनों में पुलिस को इसकी भी जांच करनी है। बता दें कि रवि उर्फ गोरखा पिछले कुछ समय से काला राणा के संपर्क में था,जिसे केआर गुट कहा जाता है। वहीं जेल में जिस व्यक्ति भूप्पी राणा के साथ उसका विवाद के चलते नाम आ रहा था उसके गुट का नाम बीआर गुट है। केआर और बीआर दोनों में छत्तीस का आंकड़ा बताया जाता है।
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रवि उर्फ गोरखा के बारे में भले यह बताया जाता हो कि वह के आर गैंग के संपर्क में था,मगर अब वह अपनी पहचान शिकारी गैंग के रुप में बना रहा था। दरअसल रवि गोरखा, सौरभ और अंकुश की तिगड़ी से एक गुमनाम गिरोह के सदस्य भयभीत थे। बताया गया है कि यह गुमनाम गिरोह इस तिगड़ी में दरार डालने में सफल हुआ था। परिणाम स्वरूप अंकुश और सौरभ ने रवि उर्फ गोरखा से अलग हो गए। वहीं अंकुश और सौरभ को यह विश्वास दिला गया था कि अलग होने पर रवि उनकी हत्या कर सकता है। इसकी एवज में गुमनाम गिरोह ने इन दोनों दो लाख रुपये असलाह यूपी से लाने के लिये दिया था, ताकि रवि से पहले उसका काम तमाम हो सके,मगर इस गिरोह ने और तगड़ी चाल चली थी। इन्होंने रवि को विश्वास दिला दिया कि दोनों मिलकर उसकी हत्या कर सकते हैं। इससे पहले कुछ होता,रवि ने दो साल पहले अंकुश की गांव अमीन में हत्या कर दी थी। वहीं रात को ही सौरभ के पिता अनिल पर जानलेवा हमला कर दिया था। इसके बाद से रवि जेल में था और 12 जनवरी जन्मदिन पर जब वह जेल से बाहर आया तो 3 फरवरी को उसकी हत्या हो गई।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक रवि उर्फ गोरखा की हत्या के लिए विदेश से पैसा आया था। यह पैसा सौरभ के विदेश में रह रहे परिवार के किसी सदस्य द्वारा पुरानी रंजिश को पूरा करते हुए रवि को रास्ते से हटाने के लिये दिया गया था। इसी विदेशी पैसे से हथियार और उत्तर प्रदेश से शूटर हायर किये गये थे।मगर सवाल ये उठ रहा है कि इन शूटर तक यह दोनों कैसे पहुंचे।
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