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मूनक क्षेत्र में जमकर हो रहा अवैध खनन

Thu, 28 Nov 2013 10:16 PM IST
करनाल
करनाल Updated Thu, 28 Nov 2013 10:16 PM IST
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Munk illegal mining in the area being fiercely
करनाल के गांव मूनक क्षेत्र में रेत माफिया खनन करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है। खनन माफिया को पुलिस और अधिकारियों की परवाह भी नहीं है।
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क्षेत्रवासियों ने भी पुलिस अधिकारियों पर खनन माफिया से मिलीभगत होने का आरोप लगाया है। हर माह लाखों रुपये का रेत क्षेत्र से निकाला जा रहा है लेकिन खनन रोकने की दिशा में काई कार्रवाई नहीं हो रही। इसका सबूत गांव मूनक हेड के पास से ड्रेन की पटरी पर पड़े रेत के ढेर हैं।

रेत के ढेर देखकर कोई इंकार नहीं कर सकता है कि क्षेत्र में रेत खनन का काम नहीं हो रहा है। पुलिस हर बार मात्र आठ दस चालान करने की बात कहकर अपने सिर से जिम्मेदारी का पल्ला झाड़ लेती है। अधिकारी कहते हैं रेत चोरी होने पर उन्हें शिकायत की जा सकती है। पश्चिमी यमुना नहर से थोड़ा दूर से चल रही बरसाती पानी की ड्रेन को भी रेत माफिया ने नहीं बख्शा।
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नहर से रेत निकालने का काम तो ग्रामीण पहले ही करते हैं लेकिन अब पिछले कई माह से ग्रामीणों ने ड्रेन से भी रेत निकालकर लाखों रुपये कमाने का काम शुरू कर दिया है। इस ड्रेन में दस किलोमीटर की दूरी तक नजर दौड़ाई जाए तो ड्रेन के भीतर करीब दस फुट तक गहराई तक रेत निकाला जा चुका है।
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पिछले करीब छह माह में करोड़ों रुपये का रेत निकालकर न्यायालय के आदेशों को ठेंगा दिखाया गया है। गांव गगसीना और मूनक में यह काम धड़ल्ले से जारी है। खनन माफिया सरेआम रेत पटरी पर डालकर बेचते हैं। गहराई से बुग्गी और ट्रैक्टर ट्रॉली के जरिए रेत निकाला जाता है।

क्षेत्रवासियों ने पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। गांव के लोगों की बात मानें तो वे इस मामले में कुछ भी नहीं कर सकते, अवैध खनन को रोकना पुलिस और संबंधित विभाग का काम है। रेत पटरी पर सरेआम बेचा जा रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि खनन माफिया के हौसले कितने बुलंद हैं।

लोगों के अनुसार ड्रेन से निकाले गए रेत की एक बुग्गी 1200 रुपये में बेची जा रही है। ट्रॉली करीब साढे़ तीन हजार रुपये में बिकती है। थोड़ा बहुत रेत लेने वाले को भी रेत 30 रुपये फुट दिया जा रहा है। साफ है मुफ्त के माल पर लूट की जा रही है।

चालाक हैं रेत चोर

रेत चोर बेहद चालाक हैं। वे लोग मूनक पुलिस चौकी के पास ही अपने लोग पहरे पर बैठा देते हैं। पुलिस ड्रेन की ओर जाती है, इससे पहले ही सूचना उन लोगों के पास पहुंच जाती है।


वे लोग भी परेशान हैं। आठ दस बार लोगों के चालान किए जा चुके हैं। पुलिसकर्मी भी कम है। पुलिस की मिलीभगत नहीं है और वह अपना काम ईमानदारी से कर रही है।
लखविंदर सिंह, इंचार्ज, पुलिस चौकी, मूनक
 
प्रकृति के लिए खतरनाक

खनन अधिकारी माधवी गुप्ता पहले ही कह चुकी हैं कि रेत खनन की सूचना मिलने पर वे कार्रवाई करती हैं। खनन करना क्षेत्र के लोगों के साथ प्रकृति के लिए भी खतरनाक साबित होता है।

पुलिस और संबंधित विभाग कतई जोखिम लेने को तैयार नहीं रहते। दूसरे पर जिम्मेदारी सौंपते हैं। 
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