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करोड़ों खर्च कर किया जल शुद्धिकरण, फिर दूषित ड्रेन में छोड़ रहे
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एक तरफ जहां जल शुद्धिकरण की परियोजनाओं पर प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। बड़े प्लांट से पानी शुद्ध किया जा रहा है, लेकिन उस पानी को फिर दूषित पानी में छोड़ा जा रहा है। यह सुनकर कोई भी हैरत में पड़ जाएगा। सवाल यह है कि यदि पानी को दूषित पानी में ही मिलाना था तो फिर इतनी बड़ी धनराशि व्यय करके शुद्ध करने की आवश्यकता क्या है ? लेकिन ऐसा नगर निगम करनाल क्षेत्र में हर रोज किया जा रहा है। वार्ड एक व दो क्षेत्र में बने आठ एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी को शुद्ध करने के बाद मंगलपुर गांव से लगती इंद्री एस्केप ड्रेन के दूषित पानी में छोड़ा जा रहा है। शुद्ध पानी का न तो कृषि सिंचाई में इस्तेमाल किया जा रहा और न ही फारेस्ट्री या अन्य कार्यों में।
नौ करोड़ में बना है नया एसटीपी
-नौ करोड़ रुपये की लागत से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से आरकेपुरम के समीप 8 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। सितंबर 2019 में यह प्लांट चालू हो गया। अर्पण कंस्ट्रक्शन कंपनी ने निर्माण किया और अब इसका संचालन कर रही है। आइटीआई चौक-कुंजपुरा रोड से उत्तर की दिशा में लगती शहर की तमाम कालोनियों व कैलाश गांव तक का सीवरेज पानी कनेक्शन इसके साथ जोड़ा जाएगा। अभी रोजाना दो से 2.50 एमएलडी पानी ही इसमें पहुंच रहा है। सभी कालोनियों के कनेक्शन जुड़ने बाकी हैं। प्लांट 24 घंटे चल रहा है।
प्रति लीटर ट्रीटमेंट कॉस्ट नहीं बता पाए ठेकेदार
-कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक अनुराग गर्ग का कहना है कि पब्लिक हेल्थ विभाग ने इसे नगर निगम के हैंडओवर कर दिया था। वह अपने बिल लेकर दोनों विभागों में घूम रहे हैं। डेढ़ साल से कोई भुगतान नहीं हुआ है। इस प्रोजेक्ट को अनाथ छोड़ दिया है। आपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम हम कर रहे हैं। हर साल के संचालन के ठेके की दर अलग-अलग है। इस समय वह ठेका राशि नहीं बता पाएंगे। प्रति लीटर पानी ट्रीटमेंट पर कितना खर्च आ रहा है, इस सवाल पर भी उन्होंने कहा कि रिकार्ड देखकर बताएंगे।
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एसटीपी के कर्मचारी के अनुसार प्लांट के जल प्रवेश बिंदु पर पानी का बीओडी (बायोलाजिकल ऑक्सीजन डिमांड) स्तर 100 से 150 तक होता है। प्रतिदिन दो से ढाई एमएलडी पानी आ रहा है। डिस्चार्ज प्वाइंट पर पानी का बीओडी लेवल 5, 6 या 7 तक होता है। ऑटोमेटिक सेंसर मीटर लगे हैं।
वर्जन
-नगर निगम के डिप्टी मेयर नवीन कुमार का कहना है कि इंद्री एस्केप ड्रेन पक्की की जाएगी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इसकी मंजूरी हो चुकी है। एसटीपी के पानी को ड्रेन में छोड़ने की वह जांच करेंगे। पानी के सही इस्तेमाल के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
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नौ करोड़ में बना है नया एसटीपी
-नौ करोड़ रुपये की लागत से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से आरकेपुरम के समीप 8 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया। सितंबर 2019 में यह प्लांट चालू हो गया। अर्पण कंस्ट्रक्शन कंपनी ने निर्माण किया और अब इसका संचालन कर रही है। आइटीआई चौक-कुंजपुरा रोड से उत्तर की दिशा में लगती शहर की तमाम कालोनियों व कैलाश गांव तक का सीवरेज पानी कनेक्शन इसके साथ जोड़ा जाएगा। अभी रोजाना दो से 2.50 एमएलडी पानी ही इसमें पहुंच रहा है। सभी कालोनियों के कनेक्शन जुड़ने बाकी हैं। प्लांट 24 घंटे चल रहा है।
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प्रति लीटर ट्रीटमेंट कॉस्ट नहीं बता पाए ठेकेदार
-कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक अनुराग गर्ग का कहना है कि पब्लिक हेल्थ विभाग ने इसे नगर निगम के हैंडओवर कर दिया था। वह अपने बिल लेकर दोनों विभागों में घूम रहे हैं। डेढ़ साल से कोई भुगतान नहीं हुआ है। इस प्रोजेक्ट को अनाथ छोड़ दिया है। आपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम हम कर रहे हैं। हर साल के संचालन के ठेके की दर अलग-अलग है। इस समय वह ठेका राशि नहीं बता पाएंगे। प्रति लीटर पानी ट्रीटमेंट पर कितना खर्च आ रहा है, इस सवाल पर भी उन्होंने कहा कि रिकार्ड देखकर बताएंगे।
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एसटीपी के कर्मचारी के अनुसार प्लांट के जल प्रवेश बिंदु पर पानी का बीओडी (बायोलाजिकल ऑक्सीजन डिमांड) स्तर 100 से 150 तक होता है। प्रतिदिन दो से ढाई एमएलडी पानी आ रहा है। डिस्चार्ज प्वाइंट पर पानी का बीओडी लेवल 5, 6 या 7 तक होता है। ऑटोमेटिक सेंसर मीटर लगे हैं।
वर्जन
-नगर निगम के डिप्टी मेयर नवीन कुमार का कहना है कि इंद्री एस्केप ड्रेन पक्की की जाएगी। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इसकी मंजूरी हो चुकी है। एसटीपी के पानी को ड्रेन में छोड़ने की वह जांच करेंगे। पानी के सही इस्तेमाल के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।