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Karnal News: खाद्य सैंपलों की जांच के लिए बनेगी माइक्रोबॉयोलॉजी लैब
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काजल पांचाल
करनाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जिले में माइक्रोबॉयोलॉजी फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी। जिस पर करीब 3.96 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इस अत्याधुनिक लैब में करनाल ही नहीं, प्रदेश के 11 जिलों के खाद्य नमूनों की भी जांच होगी। इसका निर्माण कार्य अगले 10 दिनों में शुरू हो जाएगा। इसकी जिम्मेदारी दिल्ली की एशियन साइंटिफिक इंडस्ट्रीज को सौंपी गई है। इससे पहले यह जांच अन्य जिलों की प्राइवेट लैब में होती थी जिस पर ज्यादा खर्च आता था।
जिला लोक एवं सह खाद्य विश्लेषक हरियाणा पूनम मुदगिल ने बताया कि यह लैब खाने-पीने की चीजों में सूक्ष्म जीवों जैसे बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि की वैज्ञानिक जांच करेगी। यह लैब छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगी।
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इसमें 11 जिलों से आने वाले फूड सैंपल की जांच करेगी जिसमें अंबाला, पंचकूला, पानीपत, झज्जर, रेवाड़ी, नारनौल, गुड़गांव, मेवात, हिसार, फरीदाबाद और सोनीपत शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये लैब हानिकारक बैक्टीरिया की पहचान करने में सक्षम होगी। ये सूक्ष्मजीव न केवल आम फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं बल्कि गंभीर मामलों में गर्भपात, लकवा, किडनी फेलियर और मृत्यु तक का खतरा पैदा करते हैं।
चंडीगढ़ में भी एक माइक्रोबाॅयोलॉजी लैब का निर्माण चल रहा है, लेकिन वह अधूरा है। ऐसे में करनाल यह सुविधा पाने वाला प्रदेश का पहला जिला बनने जा रहा है। संवाद
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करनाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से जिले में माइक्रोबॉयोलॉजी फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी। जिस पर करीब 3.96 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इस अत्याधुनिक लैब में करनाल ही नहीं, प्रदेश के 11 जिलों के खाद्य नमूनों की भी जांच होगी। इसका निर्माण कार्य अगले 10 दिनों में शुरू हो जाएगा। इसकी जिम्मेदारी दिल्ली की एशियन साइंटिफिक इंडस्ट्रीज को सौंपी गई है। इससे पहले यह जांच अन्य जिलों की प्राइवेट लैब में होती थी जिस पर ज्यादा खर्च आता था।
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जिला लोक एवं सह खाद्य विश्लेषक हरियाणा पूनम मुदगिल ने बताया कि यह लैब खाने-पीने की चीजों में सूक्ष्म जीवों जैसे बैक्टीरिया, वायरस, फंगस आदि की वैज्ञानिक जांच करेगी। यह लैब छह महीने में बनकर तैयार हो जाएगी।
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इसमें 11 जिलों से आने वाले फूड सैंपल की जांच करेगी जिसमें अंबाला, पंचकूला, पानीपत, झज्जर, रेवाड़ी, नारनौल, गुड़गांव, मेवात, हिसार, फरीदाबाद और सोनीपत शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये लैब हानिकारक बैक्टीरिया की पहचान करने में सक्षम होगी। ये सूक्ष्मजीव न केवल आम फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं बल्कि गंभीर मामलों में गर्भपात, लकवा, किडनी फेलियर और मृत्यु तक का खतरा पैदा करते हैं।
चंडीगढ़ में भी एक माइक्रोबाॅयोलॉजी लैब का निर्माण चल रहा है, लेकिन वह अधूरा है। ऐसे में करनाल यह सुविधा पाने वाला प्रदेश का पहला जिला बनने जा रहा है। संवाद