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90 फीसदी गिरा मास्क और सेनिटाइजर का कारोबार
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कोरोना महामारी का करीब एक साल पूरा हो गया है। लॉकडाउन के दौरान जहां कई कारोबार ठप हो गए थे तो मास्क और सैनिटाइजर के कारोबार में जबरदस्त उछाल आया था। इन्हें बनाने वाली कंपनियों ने खूब मुनाफा कमाया लेकिन अब हालात बदल गए हैं। जो कंपनियां हर माह करीब ढाई करोड़ रुपये के मास्क और सैनिटाइजर बेचती थी उनका व्यापार 90 फीसदी गिरकर करीब 25 लाख रुपये तक रह गया है। कुछ कंपनियां तो बंद होने के कगार पर हैं। -संवाद
प्रतिदिन करीब 12 हजार लीटर सैनिटाइजर होता था सप्लाई
जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था तो जिले में करीब 40 कंपनियां प्रतिदिन करीब 12 हजार लीटर सैनिटाइजर सप्लाई कर करीब दो करोड़ का कारोबार कर रही थीं। पिछले चार महीनों से अब तक सैनिटाइजर की सप्लाई में 90 फीसदी गिरावट आ चुकी है। जिसमें अब सैनिटाइजर की सप्लाई 1200 लीटर प्रतिदिन रह गई है। इसी तरह मास्क बनाने वाली कंपनियों का भी कारोबार निचले पायदान पर पहुंच गया है। पिछले साल जो कंपनियां मार्च से जुलाई तक प्रति माह करीब दो लाख मास्क बेचती थी जिससे करीब दस लाख की आय होती थी। अब कंपनी केवल बीस से तीस हजार मास्क ही बेच पा रही हैं और इनकी आय एक लाख भी नहीं हो पा रही है। मास्क बनाने की जिले में करीब दस छोटी बड़ी कंपनियां हैं।
संक्रमण के प्रति हुए लापरवाह
पिछले चार महीनों से मास्क और सैनिटाइजर का कारोबार 90 फीसदी तक गिर गया है। दूसरी ओर जिले में कोरोना के केसों की भी संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन लोग संक्रमण के प्रति गंभीर नहीं हैं। जिसके चलते न तो वे मास्क का प्रयोग कर रहे हैं न सैनिटाइजर का। इसका सीधा असर कंपनियों पर पड़ रहा है। स्कूल खुलने के बाद केवल विद्यार्थी ही सैनिटाइजर खरीद रहे हैं। मास्क कोई भी नहीं खरीद रहा है।
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-रमन गुप्ता महासचिव -फार्मासिटिकल मैन्यूफैक्चररर्स एसोसिएशन
स्टॉक में पड़े हैं लाखों सैनिटाइजर और मास्क
-मास्क और सैनिटाइजर की खपत न होने से निर्माताओं के पास भारी मात्रा में स्टॉक पड़ा है। कोरोना के दौरान मांग ज्यादा होने के कारण कंपनियों ने ज्यादा मास्क और सैनिटाइजर बना लिए थे। जो कि अब बिक भी नहीं रहे हैं। अभी भी प्रत्येक कंपनी के पास 50 से 60 हजार मास्क और एक लाख के करीब सैनिटाइजर स्टॉक में रखे हैं।
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प्रतिदिन करीब 12 हजार लीटर सैनिटाइजर होता था सप्लाई
जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था तो जिले में करीब 40 कंपनियां प्रतिदिन करीब 12 हजार लीटर सैनिटाइजर सप्लाई कर करीब दो करोड़ का कारोबार कर रही थीं। पिछले चार महीनों से अब तक सैनिटाइजर की सप्लाई में 90 फीसदी गिरावट आ चुकी है। जिसमें अब सैनिटाइजर की सप्लाई 1200 लीटर प्रतिदिन रह गई है। इसी तरह मास्क बनाने वाली कंपनियों का भी कारोबार निचले पायदान पर पहुंच गया है। पिछले साल जो कंपनियां मार्च से जुलाई तक प्रति माह करीब दो लाख मास्क बेचती थी जिससे करीब दस लाख की आय होती थी। अब कंपनी केवल बीस से तीस हजार मास्क ही बेच पा रही हैं और इनकी आय एक लाख भी नहीं हो पा रही है। मास्क बनाने की जिले में करीब दस छोटी बड़ी कंपनियां हैं।
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संक्रमण के प्रति हुए लापरवाह
पिछले चार महीनों से मास्क और सैनिटाइजर का कारोबार 90 फीसदी तक गिर गया है। दूसरी ओर जिले में कोरोना के केसों की भी संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन लोग संक्रमण के प्रति गंभीर नहीं हैं। जिसके चलते न तो वे मास्क का प्रयोग कर रहे हैं न सैनिटाइजर का। इसका सीधा असर कंपनियों पर पड़ रहा है। स्कूल खुलने के बाद केवल विद्यार्थी ही सैनिटाइजर खरीद रहे हैं। मास्क कोई भी नहीं खरीद रहा है।
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-रमन गुप्ता महासचिव -फार्मासिटिकल मैन्यूफैक्चररर्स एसोसिएशन
स्टॉक में पड़े हैं लाखों सैनिटाइजर और मास्क
-मास्क और सैनिटाइजर की खपत न होने से निर्माताओं के पास भारी मात्रा में स्टॉक पड़ा है। कोरोना के दौरान मांग ज्यादा होने के कारण कंपनियों ने ज्यादा मास्क और सैनिटाइजर बना लिए थे। जो कि अब बिक भी नहीं रहे हैं। अभी भी प्रत्येक कंपनी के पास 50 से 60 हजार मास्क और एक लाख के करीब सैनिटाइजर स्टॉक में रखे हैं।