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Haryana : करनाल में जातीय समीकरणों और मोदी फैक्टर के भरोसे भाजपा की मनोहर जीत, कांग्रेस को ले डूबी गुटबाजी
Wed, 05 Jun 2024 06:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा
देव शर्मा, करनाल
देव शर्मा, करनाल
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 05 Jun 2024 06:36 AM IST
सार
शहरी मतदाताओं ने भी एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया। इसके साथ मोदी फैक्टर का भी बड़ा असर यहां देखने को मिला। पंजाबी, वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं को साधने में मनोहर लाल कामयाब रहे।
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हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्व सीएम मनोहर लाल की जीत का मुख्य आधार जातीय समीकरण और मजबूत बूथ प्रबंधन रहा है। शहरी मतदाताओं ने भी एक बार फिर भाजपा पर भरोसा जताया। इसके साथ मोदी फैक्टर का भी बड़ा असर यहां देखने को मिला। पंजाबी, वैश्य और ब्राह्मण मतदाताओं को साधने में मनोहर लाल कामयाब रहे। हालांकि कांग्रेस ने भी पंजाबी प्रत्याशी को ही मैदान में उतारा था, लेकिन अनुभव की कमी, कमजोर संगठन और गुटबाजी कांग्रेस की हार का मुख्य कारण रही। इस चुनाव में मनोहर लाल ने कांग्रेस के दिव्यांशु बुद्धिराजा को हराया है।
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मनोहर लाल के प्रति इस बार ग्रामीण क्षेत्रों और कुछ खास बिरादरियों में नाराजगी थी। इसी लिए भाजपा प्रत्याशी ने अपने चुनावी कार्यक्रमों के दौरान कई बिरादरियों से जुड़े कार्यक्रम करके उन्हें साधने का प्रयास भी किया। साथ ही भाजपा ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया था। इसके विपरीत कांग्रेस की बूथ स्तर पर कोई तैयारी नहीं थी, जिलास्तर पर भी संगठन गठित नहीं था।
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जहां तक शहरी और ग्रामीण मतदाताओं की बात है तो शहरी मतदाताओं ने मनोहर लाल पर अधिक भरोसा जताया। यही कारण रहा कि करनाल, घरौंडा, इंद्री, असंध आदि विधान सभाओं में मनोहर लाल को अच्छे खासे मत मिले। नीलोखेड़ी के निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर चुनाव के दौरान ही भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस के साथी बने, लेकिन इसका कोई खास असर मतदाताओं पर नहीं दिखा। दूसरी ओर कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी तब घोषित किया, जब भाजपा अपने चुनाव प्रचार में जोर-शोर से जुट चुकी थी, कांग्रेस प्रत्याशी की युवाओं को छोड़कर हलके में पहचान भी कम थी, जबकि मनोहर लाल राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। कांग्रेस में कई स्तर पर आपसी गुटबाजी भी देखी गई, जो कांग्रेस प्रत्याशी के लिए नुकसानदायक साबित हुई।
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जीत की वजह
- बूथ स्तर पर भाजपा की लंबे समय से चुनावी तैयारी काम आई
- नौ में से पांच विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा विधायकों की मेहनत रंग लाई
- पीएम नरेंद्र मोदी के नाम का भी मनोहर लाल को काफी फायदा मिला
हार का कारण
- कांग्रेस को कमजोर संगठन, आपसी मनमुटाव और गुटबाजी ने नुकसान पहुंचाया
- प्रत्याशी को देरी से घोषित किया गया, जिससे तैयारी का पूरा मौका भी नहीं मिल सका
- मुकाबला पूर्व सीएम से होना, जिनका केंद्र में मंत्री बनना तय माना जा रहा था