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कुपोषण का सबब बन रहा रहन-सहन और फास्ट फूड का चलन
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101-डॉक्टर दीपा
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अनुज शर्मा
करनाल। बदलते रहन सहन और फास्ट फूड के बढ़ते चलन से महिलाओं के शरीर में रक्त और आयरन की कमी बढ़ रही है। इससे अधिकतर महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं गर्भधारण के बाद भी नवजात शिशु कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल करनाल के डिलीवरी वार्ड में जनवरी से अगस्त 2022 के बीच हुई डिलीवरी पर नजर डालें तो यहां पर पिछले आठ माह में कुल तीन हजार 81 गर्भवती महिलाएं दाखिल हुईं और कुल 964 डिलीवरी हुईं। इनमें से 161 गर्भवती महिलाओं में सात ग्राम से भी कम खून पाया गया। ऐसे में डॉक्टरों को इन महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी करवाने के लिए रक्त चढ़ाना पड़ा। वहीं दूसरी ओर इनमें 118 गर्भवती महिलाएं ऐसी मिलीं, जिनमें सात ग्राम खून होने के साथ आयरन की भी कमी मिली, जिनकी की सुरक्षित डिलीवरी करवाने के लिए आयरन सुक्रोज इंजेक्शन लगाना पड़ा।
हर माह पांच से छह केस हो रहे रेफर
नागरिक अस्पताल की डॉ. दीपा ने बताया कि पांच ग्राम तक खून वाली गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी में हाई रिस्क होता है, इसलिए मजबूरन उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जबकि सात ग्राम तक खून होने पर अलग से ब्लड चढ़ाकर सुरक्षित डिलीवरी कराई जाती है। उन्होंने बताया कि अस्पताल से अत्यधिक खून की कमी होने पर हर माह पांच-छह केस रेफर करने पड़ते हैं।
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गर्भावस्था में चार बार जांच जरूरी
डॉ. दीपा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाएं एक या दो बार ही चेकअप कराती हैं। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे की सही ग्रोथ का पता नहीं चल पाता। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार अपना हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। इससे निश्चित रूप से नवजात शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
गर्भधारण करने से पहले तीन माह तक रखें शरीर का विशेष ध्यान
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला परियोजना समन्वयक ज्योति गागट ने बताया कि महिलाएं गर्भधारण से कम से कम तीन माह पहले विशेष रूप से अपने शरीर का ध्यान जरूर रखें। रक्त की कमी को पूरा करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध और दही रोजाना खाएं। इसके साथ ही लगातार तीन माह तक फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से लें। वहीं गुड़, चने को भी अपने आहार में शामिल करें। शरीर के अंदर आयरन को अवशोषित करने के लिए रोजाना तुलसी के पत्ते को चबाएं और विटामिन सी लें। इससे शरीर के अंदर रक्त प्रवाह को गति मिलती है। उन्होंने कहा कि पालक के साथ कभी पनीर न खाएं। यह गर्भवती स्त्री के लिए अच्छा नहीं होता।
जिला नागरिक अस्पताल के डिलीवरी वॉर्ड की स्थिति
माह दाखिला डिलीवरी रक्त आयरन इंजेक्शन
जनवरी 490 189 09 07
फरवरी 322 115 09 04
मार्च 387 128 19 15
अप्रैल 281 86 16 11
मई 307 94 17 17
जून 336 117 13 07
जुलाई 408 136 41 25
अगस्त 551 199 37 32
कुल 3081 964 161 118
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करनाल। बदलते रहन सहन और फास्ट फूड के बढ़ते चलन से महिलाओं के शरीर में रक्त और आयरन की कमी बढ़ रही है। इससे अधिकतर महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं गर्भधारण के बाद भी नवजात शिशु कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल करनाल के डिलीवरी वार्ड में जनवरी से अगस्त 2022 के बीच हुई डिलीवरी पर नजर डालें तो यहां पर पिछले आठ माह में कुल तीन हजार 81 गर्भवती महिलाएं दाखिल हुईं और कुल 964 डिलीवरी हुईं। इनमें से 161 गर्भवती महिलाओं में सात ग्राम से भी कम खून पाया गया। ऐसे में डॉक्टरों को इन महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी करवाने के लिए रक्त चढ़ाना पड़ा। वहीं दूसरी ओर इनमें 118 गर्भवती महिलाएं ऐसी मिलीं, जिनमें सात ग्राम खून होने के साथ आयरन की भी कमी मिली, जिनकी की सुरक्षित डिलीवरी करवाने के लिए आयरन सुक्रोज इंजेक्शन लगाना पड़ा।
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हर माह पांच से छह केस हो रहे रेफर
नागरिक अस्पताल की डॉ. दीपा ने बताया कि पांच ग्राम तक खून वाली गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी में हाई रिस्क होता है, इसलिए मजबूरन उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जबकि सात ग्राम तक खून होने पर अलग से ब्लड चढ़ाकर सुरक्षित डिलीवरी कराई जाती है। उन्होंने बताया कि अस्पताल से अत्यधिक खून की कमी होने पर हर माह पांच-छह केस रेफर करने पड़ते हैं।
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गर्भावस्था में चार बार जांच जरूरी
डॉ. दीपा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाएं एक या दो बार ही चेकअप कराती हैं। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे की सही ग्रोथ का पता नहीं चल पाता। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार अपना हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। इससे निश्चित रूप से नवजात शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
गर्भधारण करने से पहले तीन माह तक रखें शरीर का विशेष ध्यान
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला परियोजना समन्वयक ज्योति गागट ने बताया कि महिलाएं गर्भधारण से कम से कम तीन माह पहले विशेष रूप से अपने शरीर का ध्यान जरूर रखें। रक्त की कमी को पूरा करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध और दही रोजाना खाएं। इसके साथ ही लगातार तीन माह तक फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से लें। वहीं गुड़, चने को भी अपने आहार में शामिल करें। शरीर के अंदर आयरन को अवशोषित करने के लिए रोजाना तुलसी के पत्ते को चबाएं और विटामिन सी लें। इससे शरीर के अंदर रक्त प्रवाह को गति मिलती है। उन्होंने कहा कि पालक के साथ कभी पनीर न खाएं। यह गर्भवती स्त्री के लिए अच्छा नहीं होता।
जिला नागरिक अस्पताल के डिलीवरी वॉर्ड की स्थिति
माह दाखिला डिलीवरी रक्त आयरन इंजेक्शन
जनवरी 490 189 09 07
फरवरी 322 115 09 04
मार्च 387 128 19 15
अप्रैल 281 86 16 11
मई 307 94 17 17
जून 336 117 13 07
जुलाई 408 136 41 25
अगस्त 551 199 37 32
कुल 3081 964 161 118