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Karnal News: कोरोना से कमजोर हुए फेफड़े, ढाई गुना बढ़े अस्थमा के मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कोविड-19 के बाद से बदली जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्थमा के रोगी करीब ढाई गुना तक बढ़ गए हैं। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में पहले 15 से 20 रोगी आते थे, अब यह संख्या 35 से 40 तक पहुंच गई है। इसमें बुजुर्गों के साथ ही बच्चे व युवा भी शामिल हैं।
श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि कोविड-19 एक रेस्पिरेटरी वायरस है। जिसने फेफड़ों को सीधे प्रभावित किया। इसी कारण अस्थमा के मरीज ढाई गुने तक बढ़ गए। पिछले कुछ महीनों से जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई लेवल) काफी बढ़ गया है। यह भी अस्थमा के मरीजों के बढ़ने की वजह है। श्वास रोग विशेषज्ञ ने बताया कि पहले घरों में अलग से रसोई घर बने होते थे, जिससे धुआं बाहर ही निकल जाता था। वर्तमान में घरों को नए ट्रेंड से बनाया जाता है, जिसमें ओपन किचन घरों के अंदर होते हैं। ऐसे में खाना बनाते समय होने वाला धुआं अंदर ही अंदर घूमता है। यह भी सांस की दिक्कत की एक वजह है। जो कि धीरे-धीरे अस्थमा जैसी बीमारी का रूप ले लेता है।
जांच के दौरान पाया जाता है कि युवा वर्ग इनहेलर जैसे जीवन रक्षक उपकरण के प्रयोग से हिचकिचा रहे हैं। अस्थमा में इनहेलर काफी लाभदायक होता है। उन्होंने अपील की कि अस्थमा के मरीजों को इनहेलर हमेशा अपने पास रखना चाहिए और इसका बिना किसी झिझक के इसका प्रयोग करना चाहिए। समय पर पहचान होने पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
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करनाल। कोविड-19 के बाद से बदली जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्थमा के रोगी करीब ढाई गुना तक बढ़ गए हैं। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में पहले 15 से 20 रोगी आते थे, अब यह संख्या 35 से 40 तक पहुंच गई है। इसमें बुजुर्गों के साथ ही बच्चे व युवा भी शामिल हैं।
श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि कोविड-19 एक रेस्पिरेटरी वायरस है। जिसने फेफड़ों को सीधे प्रभावित किया। इसी कारण अस्थमा के मरीज ढाई गुने तक बढ़ गए। पिछले कुछ महीनों से जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई लेवल) काफी बढ़ गया है। यह भी अस्थमा के मरीजों के बढ़ने की वजह है। श्वास रोग विशेषज्ञ ने बताया कि पहले घरों में अलग से रसोई घर बने होते थे, जिससे धुआं बाहर ही निकल जाता था। वर्तमान में घरों को नए ट्रेंड से बनाया जाता है, जिसमें ओपन किचन घरों के अंदर होते हैं। ऐसे में खाना बनाते समय होने वाला धुआं अंदर ही अंदर घूमता है। यह भी सांस की दिक्कत की एक वजह है। जो कि धीरे-धीरे अस्थमा जैसी बीमारी का रूप ले लेता है।
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जांच के दौरान पाया जाता है कि युवा वर्ग इनहेलर जैसे जीवन रक्षक उपकरण के प्रयोग से हिचकिचा रहे हैं। अस्थमा में इनहेलर काफी लाभदायक होता है। उन्होंने अपील की कि अस्थमा के मरीजों को इनहेलर हमेशा अपने पास रखना चाहिए और इसका बिना किसी झिझक के इसका प्रयोग करना चाहिए। समय पर पहचान होने पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
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