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थोड़ी सेवा से ही प्रसन्न हो जाते हैं भगवान शिव : शास्त्री
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- सेक्टर छह स्थित शिव मंदिर में शिव महापुराण कथा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सेक्टर छह के शिव मंदिर में मंदिर सभा की ओर से आयोजित शिव महापुराण कथा में रामकरण शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव थोड़ी सी सेवा से प्रसन्न हो जाते हैं। सावन मास में सभी श्रद्धालुओं को परिवार सहित भोले बाबा की पूजा करनी चाहिए, इससे उनके परिवार में सुख-समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार से मनुष्य जीवन में भारी नुकसान कर बैठता है।
उन्होंने कहा कि नारद जी महाराज हिमालय पर तप कर रहे थे तो इंद्र ने कामदेव को भेजा, लेकिन नारद जी पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। इस प्रकार नारद जी को अहंकार हो गया कि इस संसार में मेरा जैसा तपधारी कोई नहीं है। उन्होंने भगवान भोले नाथ से सारी बात साझा की। भगवान भोले नाथ ने नारद जी से ये बात विष्णु भगवान से न बताने को कहा, लेकिन नारद जी ने सारी बात विष्णु जी से कह दी। विष्णु भगवान ने अपने भक्त के अहंकार को दूर करने के लिए अपनी माया का प्रभाव दिखाकर एक नगर की रचना कर नारद जी की कन्या से विवाह करने की मन में इच्छा प्रकट की।
विवाह न होने पर नारद जी को क्रोध आ गया और भगवान को अपशब्द कहते हुए भगवान को श्राप दे दिया। माया का प्रभाव दूर हुआ तो भगवान से क्षमा मांगने लगे। तब भगवान ने कहा कि नारद जब मेरे भक्त के दिल में अहंकार प्रवेश कर जाता है तो में उसे नष्ट कर देता हूं और उसे अपनी शरण में ले लेता हूं। शास्त्री ने कहा कि हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। इस अवसर पर मंदिर सभा के प्रधान मुकेश शर्मा, महासचिव एडवोकेट केडी गोयल, कैशियर हर भगवान अरोड़ा, संयुक्त सचिव श्रीपाल और प्रबंधक राम प्रकाश के साथ अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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करनाल। सेक्टर छह के शिव मंदिर में मंदिर सभा की ओर से आयोजित शिव महापुराण कथा में रामकरण शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव थोड़ी सी सेवा से प्रसन्न हो जाते हैं। सावन मास में सभी श्रद्धालुओं को परिवार सहित भोले बाबा की पूजा करनी चाहिए, इससे उनके परिवार में सुख-समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार से मनुष्य जीवन में भारी नुकसान कर बैठता है।
उन्होंने कहा कि नारद जी महाराज हिमालय पर तप कर रहे थे तो इंद्र ने कामदेव को भेजा, लेकिन नारद जी पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। इस प्रकार नारद जी को अहंकार हो गया कि इस संसार में मेरा जैसा तपधारी कोई नहीं है। उन्होंने भगवान भोले नाथ से सारी बात साझा की। भगवान भोले नाथ ने नारद जी से ये बात विष्णु भगवान से न बताने को कहा, लेकिन नारद जी ने सारी बात विष्णु जी से कह दी। विष्णु भगवान ने अपने भक्त के अहंकार को दूर करने के लिए अपनी माया का प्रभाव दिखाकर एक नगर की रचना कर नारद जी की कन्या से विवाह करने की मन में इच्छा प्रकट की।
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विवाह न होने पर नारद जी को क्रोध आ गया और भगवान को अपशब्द कहते हुए भगवान को श्राप दे दिया। माया का प्रभाव दूर हुआ तो भगवान से क्षमा मांगने लगे। तब भगवान ने कहा कि नारद जब मेरे भक्त के दिल में अहंकार प्रवेश कर जाता है तो में उसे नष्ट कर देता हूं और उसे अपनी शरण में ले लेता हूं। शास्त्री ने कहा कि हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। इस अवसर पर मंदिर सभा के प्रधान मुकेश शर्मा, महासचिव एडवोकेट केडी गोयल, कैशियर हर भगवान अरोड़ा, संयुक्त सचिव श्रीपाल और प्रबंधक राम प्रकाश के साथ अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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