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चकबंदी मामला : सुबह एक पक्ष ने किया प्रदर्शन तो शाम को दूसरे पक्ष ने खोला मोर्चा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Aug 2019 02:27 AM IST
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land dispute
पांच गांवों की जमीन की चकबंदी का मामला गरमा गया है। सुबह एक पक्ष के किसानों ने लघु सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया और इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की। साथ ही एसीओ दलबीर के खिलाफ केस दर्ज करने की भी अपील की। किसानों ने आरोप लगाया कि एसीओ के साथ मिलीभगत करके ही किसानों ने गलत तरीके से चकबंदी करा दी थी। वहीं, जब इसकी भनक दूसरे पक्ष को लगी तो वे भी करनाल पहुंचे और सेक्टर -12 में मीटिंग करके पहले पक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पक्ष के लोगों ने 948 एकड़ जमीन पर कब्जा किया हुआ है। इसमें 300 एकड़ उनकी है और 448 एकड़ दीक्षित अवार्ड और 200 एकड़ केंद्रीय सरकार की जमीन है। किसानों ने कहा कि उन्हें 20 प्रतिशत जमीन पर कब्जा दिलाया जाए, जिस पर पहले पक्ष ने कब्जा किया हुआ है। उधर, दिनभर लघु सचिवालय में पुलिस बल तैनात रहा और किसानों की रणनीति पर नजर बनाए रखी। बताया जाता है कि आने वाले दिनों में ये मामला और भड़क सकता है। दोनों पक्ष आमने-सामने आ सकते हैं। हालात को देखकर पुलिस ने गांव में पीसीआर भी तैनात की है, ताकि किसी भी प्रकार का विवाद न हो सके।
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ये कहना है पहले पक्ष का
पहले पक्ष के किसान प्रदीप कालरम, राजबल राणा, श्री राम, सुरेंद्र सैनी, कृष्ण, ईश्वर, राजबीर, नकली, अकल सिंह, माई चंद, तारा चंद, तेग सिंह, कर्मबीर समेत अन्य ने बताया कि वह कालरम, भरतपुर, अराईपुरा, लालुपुरा व अमृतपुर कलां समेत पांच गांवों के चकबंदी पीड़ित किसान हैं। 1938-39 में कैरवाली, अमृतपुर कलां व खुर्द के 16 हजार 660 बिगाह जमीन का यह मामला है। इन्हीं वर्षों में हमारे बुजुर्गों ने इनमें से अधिकतर जमीन खरीद ली। 1964-65 में चकबंदी हुई तो जिसने जो जमीन खरीदी थी, उसे वह खरीदी हुई जमीन मिल गई। इसके बाद 1990 में उन्हें जमीन से बेदखल कर दिया। फिर 1995 दोबारा चकबंदी के लिए रिकार्ड तैयार कर दिया। खडी़ फसल को नष्ट कर दिया। इसके बाद जिन लोगों से उनके बुजुर्गों ने जमीन खरीदी थी, वे कोर्ट में चले गए ओर खरीदी जमीन पर अपना हक जताकर वापस मांगने लगे। आरोप है कि प्रशासन ने गलत तरीके से चकबंदी कर दी।
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ये कहना है दूसरे पक्ष का
दूसरे पक्ष के अमृतपुर कलां गांव के पूर्व सरपंच बलजीत सिंह, उदय सिंह कैरवाली ने बताया कि अमृतपुर कलां, अमृतपुर खुर्द व कैरवाली का रकबा 16660 बीघा की चकबंदी 1965 में गिरदावरी के हिसाब से की गई थी। उस दौरान जिन्होंने नाजायज जमीन पर कब्जा किया हुआ था उन्हें वही जमीन मिल गई और हकदार खाली रह गए। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो उन्होंने आदेश दिए कि 1965 में हुई चकबंदी को खारिज कर शरत वाजब उल अर्ज के आधार पर नई स्कीम बनाकर चकबंदी की जाए। 1995 में नई स्कीम तैयार कर 1998 में तकसीम का कार्य पूर्ण किया गया। 374 किसानों हकदारान को जमीन के मालीकान कागज विभाग ने दिए। 1999 में जब विभाग द्वारा कब्जा कार्यवाही करवाई गई तथा 80 प्रतिशत जमीन पर कब्जा हो चुका है। पहला पक्ष के 20 किसानों ने लगभग 500 एकड़ से अधिकृत जमीन काश्त कर रहे थे, उन्होंने निदेशक चकबंदी से अपील खारिज होने पर उच्च न्यायालय में की। 2005 में भी सर्वोच्च न्यायालय ने भी उनकी अपील खारिज कर दी।
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पहले पक्ष ने सीबीआई जांच की करी मांग
लघु सचिवालय में प्रदर्शन करने के बाद किसान प्रदीप कालरम, राजबल राणा, श्रीराम आदि ने कहा कि डीसी कॉलोनी में एक मकान में मिले चकबंदी के दस्तावेजों के मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। उन्होंने एसीओ दलबीर के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि पहला पक्ष जमीन पर कब्जा किया हुआ है और जानबूझकर झूठी शिकायतें कर रहा है।
डीसी कॉलोनी स्थित एक मकान में चकबंदी से संबंधित जमीन के दस्तावेज मिलने के मामले में उच्च अधिकारियों को विभागीय जांच के लिए पत्र भेजा हुआ है और साथ ही एसीओ के तबादले के लिए भी लिखा हुआ है। विभाग के निदेशक के आदेश के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। जहां तक पांच गांवों की चकबंदी का विवाद है तो इसको सुलझाने के लिए जमाबंदी का कार्य चल रहा है और उसके लिए ही रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। - श्याम लाल, डीआरओ, करनाल।
मांगें नहीं मानने पर 15 अगस्त और रक्षा बंधन काले दिवस के रूप में मनाएंगे किसान
करनाल। चकबंदी का दंश झेल रहे अराईपुरा, कालरम, लालुपुरा, भरतपुर, अमृतपुर कलां के चकबंदी पीड़ित किसानों ने चेताया है कि 15 अगस्त और रक्षा बंधन को दिल्ली के जंतर-मंतर पर काले दिवस रूप में मनाएंगे। किसान नेता राजेंद्र आर्य दादूपुर ने कहा कि अब यह लड़ाई पीड़ित किसानों की ना रहकर संघर्ष समिति से जुड़े देशभर के 300 किसान संगठन व हरियाणा प्रदेश के 11 किसान संगठन और पांच मजदूर संगठनों की हो गई है। एसडीएम को सौंपे ज्ञापन में चकबंदी संयोजक प्रदीप कालरम ने कहा कि अगर 14 अगस्त तक किसानों की सभी मांगें नहीं मानी गई तो 14 अगस्त को सभी पांच गांवों के किसान महिलाओं व बच्चों समेत अपने घरों को ताला लगा कर जंतर-मंतर पर बैठेंगे। 15 अगस्त और रक्षा बंधन को जंतर-मंतर पर काले दिवस के रूप में मनाएंगे।

इस अवसर पर मुख्य रूप से चकबंदी सह-संयोजक राजबल राणा भरतपुर, नकली सिंह राणा, अकल सिंह राणा, वेद पाल राणा, कृष्ण रोड़, परमवीर आर्य, सुनील चौपड़ा, ईश्वर जोगी, अनिल जोगी, लधा राम, राम निवास सैनी, बलवान डेरा तार पुर, श्री राम, पाला राम रोड़ आदि उपस्थित रहे।
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