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Karnal News: नरक चतुर्दशी पर घर के बाहर जलाया दीपक
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दीपावली की पूर्व संध्या पर बुधवार को छोटी दिवाली मनाई गई। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली मनाई गई। इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं ने रात को एक दीपक मृत्यु के देवता यम के लिए जलाया गया। श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी षष्टी बल्लभ ने बताया कि यम का दीपक दरवाजे या घर के बाहर रखकर ही जलाया गया। क्योंकि, यम को नकारात्मक का प्रतीक माना जाता है। ऐसी स्थिति में उनको घर में न बुलाकर बाहर से ही भोग देकर विदा कर दिया गया।
इस दीपक को रखने के लिए दक्षिण दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। उन्होंने बताया कि दिवाली की एक रात पहले यम का दीपक मृत्यु के देवता यमराज के लिए जलाया गया। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन यम का दीपक जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। साथ ही प्रार्थना की गई कि यमदेव नरक के द्वार बंद कर दें और हमें सेहतमंद रखें। ऐसा करने वाले जातकों पर यम की कृपा होती है। वहीं छोटी दिवाली के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन लोग राक्षस पर भगवान कृष्ण की जीत का जश्न मनाते हैं। घरों की सफाई करते हैं और इसे फूलों या लाइटों से सजाते हैं।
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करनाल। दीपावली की पूर्व संध्या पर बुधवार को छोटी दिवाली मनाई गई। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली मनाई गई। इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। श्रद्धालुओं ने रात को एक दीपक मृत्यु के देवता यम के लिए जलाया गया। श्री कर्णेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी षष्टी बल्लभ ने बताया कि यम का दीपक दरवाजे या घर के बाहर रखकर ही जलाया गया। क्योंकि, यम को नकारात्मक का प्रतीक माना जाता है। ऐसी स्थिति में उनको घर में न बुलाकर बाहर से ही भोग देकर विदा कर दिया गया।
इस दीपक को रखने के लिए दक्षिण दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। उन्होंने बताया कि दिवाली की एक रात पहले यम का दीपक मृत्यु के देवता यमराज के लिए जलाया गया। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन यम का दीपक जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। साथ ही प्रार्थना की गई कि यमदेव नरक के द्वार बंद कर दें और हमें सेहतमंद रखें। ऐसा करने वाले जातकों पर यम की कृपा होती है। वहीं छोटी दिवाली के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन लोग राक्षस पर भगवान कृष्ण की जीत का जश्न मनाते हैं। घरों की सफाई करते हैं और इसे फूलों या लाइटों से सजाते हैं।
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