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Karnal News: फौजियों के गांव से बनी पहचानलहना सिंह ने मारे थे 30 सैनिकदुश्मनों को चटा चुके हैं धूल
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संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। आठ हजार की आबादी वाले कुड़क गांव ने कई फौजी देश को दिए हैं। अब तक 50 से अधिक फौजी देश की सेवा कर चुके हैं, वहीं करीब 22 जांबाज अभी भी सीमाओं पर पहरा दे रहे हैं। कुछ सैनिक तो सेवानिवृत्ति के बाद गांव में खेती बाड़ी संभाल रहे हैं। सीजफायर पर ग्रामीणों को राहत तो है, लेकिन उनके परिजनों का कहना है कि पाकिस्तान को इस बार छोड़ना नहीं चाहिए था। मगर वह बच गया है।
अपने घर के बाहर परिवार के साथ बैठे मिले पूर्व सैनिक हरजिंदर सिंह ने बताया कि वह 25 साल से फौज में रहे। उनकी पत्नी व अन्य परिवार के सदस्यों का कहना है कि जिन आतंकवादियों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाकर उनकी हत्या की है, उनको सख्त सजा मिलनी चाहिए। हमारे देश की सेना ताकतवर है, अगर चाहे तो कुछ मिनट में आतंकवादियों के नामोनिशान मिटा दे। रिटायर्ड नरेश कुमार फौजी 22 साल की सेवा करके अब सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। कारगिल की लड़ाई में भी इन्होंने भाग लिया और दुश्मनों के छक्के छुड़ाएं। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन देश को उसकी औकात बता दी है। फौजी जितेंद्र सिंह 21 साल तक देश सेवा करके आए। उन्होंने कारगिल युद्ध में भाग लेकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं। इनका कहना है पाकिस्तान को पहलगाम की घिनौनी हरकत का मुंहतोड़ जवाब दे रही है। रिटायर फौजी अजमेर सिंह ने 1962 में फौज में भर्ती हुए थे। इन्होंने 65 और 71 की लड़ाई में भाग लिया। उनके परिवार के पांच भाई फौज में थे। अब भी दो भाई और दो भतीजे फौज में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। इनका कहना है पहले तो आमने-सामने की लड़ाई होती थी तब भी हम दुश्मन पर भारी पड़ते थे। अब तो मशीनी युग आ गया है। भारत को अत्याधुनिक हथियारों से पाकिस्तान मेें आतंकवादियों के अड्डों को नष्ट किया है। यहां की आबादी 6000 है।
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तरावड़ी। आठ हजार की आबादी वाले कुड़क गांव ने कई फौजी देश को दिए हैं। अब तक 50 से अधिक फौजी देश की सेवा कर चुके हैं, वहीं करीब 22 जांबाज अभी भी सीमाओं पर पहरा दे रहे हैं। कुछ सैनिक तो सेवानिवृत्ति के बाद गांव में खेती बाड़ी संभाल रहे हैं। सीजफायर पर ग्रामीणों को राहत तो है, लेकिन उनके परिजनों का कहना है कि पाकिस्तान को इस बार छोड़ना नहीं चाहिए था। मगर वह बच गया है।
अपने घर के बाहर परिवार के साथ बैठे मिले पूर्व सैनिक हरजिंदर सिंह ने बताया कि वह 25 साल से फौज में रहे। उनकी पत्नी व अन्य परिवार के सदस्यों का कहना है कि जिन आतंकवादियों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाकर उनकी हत्या की है, उनको सख्त सजा मिलनी चाहिए। हमारे देश की सेना ताकतवर है, अगर चाहे तो कुछ मिनट में आतंकवादियों के नामोनिशान मिटा दे। रिटायर्ड नरेश कुमार फौजी 22 साल की सेवा करके अब सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। कारगिल की लड़ाई में भी इन्होंने भाग लिया और दुश्मनों के छक्के छुड़ाएं। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन देश को उसकी औकात बता दी है। फौजी जितेंद्र सिंह 21 साल तक देश सेवा करके आए। उन्होंने कारगिल युद्ध में भाग लेकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए हैं। इनका कहना है पाकिस्तान को पहलगाम की घिनौनी हरकत का मुंहतोड़ जवाब दे रही है। रिटायर फौजी अजमेर सिंह ने 1962 में फौज में भर्ती हुए थे। इन्होंने 65 और 71 की लड़ाई में भाग लिया। उनके परिवार के पांच भाई फौज में थे। अब भी दो भाई और दो भतीजे फौज में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। इनका कहना है पहले तो आमने-सामने की लड़ाई होती थी तब भी हम दुश्मन पर भारी पड़ते थे। अब तो मशीनी युग आ गया है। भारत को अत्याधुनिक हथियारों से पाकिस्तान मेें आतंकवादियों के अड्डों को नष्ट किया है। यहां की आबादी 6000 है।
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