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सामूहिक दुष्कर्म मामला ः भाटिया के बेटे का आरोप, महिला ने समझौते के मांगे थे 1.20 करोड़ रुपये
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करनाल। सामूहिक दुष्कर्म मामले में प्रताप पब्लिक स्कूल के मालिक अजय भाटिया के पक्ष में उनके बेटे प्रतीक भी आ गए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने महिला पर आरोप लगाया है कि उसने केस वापस लेने की एवज में 1 करोड़ 20 लाख रुपये मांगे थे। इसके सबूत के रूप में आडियो और वीडियो रिकार्डिंग भी हैं। ये सभी सबूत पुलिस और अदालत को दे चुके हैं। समय आने पर इनको सार्वजनिक किया जाएगा। ये भी आरोप लगाया कि परिवार और स्कूल को बदनाम करके ब्लैकमेलिंग करने में अकेली महिला ही नहीं बल्कि पूरा गैंग है। जिसमें वकील और लोग भी शामिल हैं। प्रतीक भाटिया का आरोप है कि महिला छह लाख रुपये लेने के बाद और डिमांड कर रही थी। जिसके चलते पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। हमें अदालत पर पूरा भरोसा है, एक दिन सच सबके सामने आयेगा।
पति को कैंसर पीड़ित बताकर लिया था इंक्रीमेंट
महिला लाइब्रेरियन को इंक्रीमेंट क्यों लगाया। इस बारे में प्रतीक का कहना है कि महिला ने हमें बताया था कि उसके पति को कैंसर है। इसलिए मानवीय दृष्टि से वेतन बढ़ाया था। जब हमने पता किया तो पति ने कहा कि उसे कैंसर नहीं है। महिला ने स्कूल में जहर खाने का ड्रामा किया तो पुलिस को सूचना भी दी थी। इसके अगले दिन महिला ने लिखित में माफी मांगी थी।
मुझ पर बैंक लोन है, प्रति माह वेतन जितना करा दो
प्रतीक ने महिला की एक रिकार्डिंग का दावा किया है, हालांकि उस ओडियो से यह पुष्टि नहीं होती है कि वह उसी महिला की है। ओडियो के अनुसार वह एक व्यक्ति से बात कर रही है और कह रही कि मेरा सिस्टम करा दो। या फिर जितनी सैलरी थी, हर माह के लिए ऐसा कुछ हो जाए। आडियो में यह भी कहा गया है कि उसके पास बैंक का लोन है, इसलिए 38 हजार रुपये की तो किस्त ही चली जाती है। जबकि सामने वाला व्यक्ति ये कहता है कि पहले ही वो 6 लाख रुपये दे चुके हैं। और पैसे के लिए उनको कैसे कहा जा सकता है। करीब छह मिनट की रिकार्डिंग में महिला हंसकर व्यक्ति को कह रही है कि कुछ तो उनको दंड लगना चाहिए। उधर, भाटिया का दावा है कि महिला नहीं बल्कि उसके पति की भी रिकार्डिंग हैं। जिससे ये साबित होता है कि वे किस प्रकार से ब्लैकमेल कर रहे थे।
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सबूत दिखाएं : एडवोकेट बंसल
महिला के वकील विनय बंसल ने कहा कि उनके पास कोई सबूत है तो सार्वजनिक करें। भाटिया के बेटे झूठी स्टोरी सुना रहे हैं। मेरा सवाल ये है कि पुलिस की एसआईटी ने अब तक क्या जांच की? पैसे मांगने का तो मामला ही नहीं है, ये सब झूठ है। महिला की ओर से पैसे नहीं मांगे गए। पुलिस ने जबरदस्ती महिला के पास पैसों का थैला फेंका है। दूसरा, अब अजय भाटिया के बेटे सामने क्यों आ रहे हैं। अगर उनके पास रिकार्डिंग थी तो पहले क्यों नहीं उन्होंने बताया? या फिर ट्रेप कराया । इसमें राजनीतिक और वकालत से जुड़े लोग शामिल हैं। हमें अदालत पर पूरा भरोसा है, एक दिन सच सबके सामने होगा।
पुलिस के पास ब्लैकमेलिंग के पुख्ता सबूत : एसपी
एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने बताया कि महिला द्वारा ब्लैकमेलिंग करने के पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं। रिकार्डिंग समेत अन्य मैसेज भी हैं। पुलिस महिला को दोबारा से रिमांड पर लेने का प्रयास करेगी, ताकि शेष छह लाख रुपये और बरामद हो सकें। इसके लिए विधिक राय ले ली गई हैं। एक - दो दिन में अदालत में दोबारा से रिमांड के लिए अपील की जाएगी।
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पति को कैंसर पीड़ित बताकर लिया था इंक्रीमेंट
महिला लाइब्रेरियन को इंक्रीमेंट क्यों लगाया। इस बारे में प्रतीक का कहना है कि महिला ने हमें बताया था कि उसके पति को कैंसर है। इसलिए मानवीय दृष्टि से वेतन बढ़ाया था। जब हमने पता किया तो पति ने कहा कि उसे कैंसर नहीं है। महिला ने स्कूल में जहर खाने का ड्रामा किया तो पुलिस को सूचना भी दी थी। इसके अगले दिन महिला ने लिखित में माफी मांगी थी।
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मुझ पर बैंक लोन है, प्रति माह वेतन जितना करा दो
प्रतीक ने महिला की एक रिकार्डिंग का दावा किया है, हालांकि उस ओडियो से यह पुष्टि नहीं होती है कि वह उसी महिला की है। ओडियो के अनुसार वह एक व्यक्ति से बात कर रही है और कह रही कि मेरा सिस्टम करा दो। या फिर जितनी सैलरी थी, हर माह के लिए ऐसा कुछ हो जाए। आडियो में यह भी कहा गया है कि उसके पास बैंक का लोन है, इसलिए 38 हजार रुपये की तो किस्त ही चली जाती है। जबकि सामने वाला व्यक्ति ये कहता है कि पहले ही वो 6 लाख रुपये दे चुके हैं। और पैसे के लिए उनको कैसे कहा जा सकता है। करीब छह मिनट की रिकार्डिंग में महिला हंसकर व्यक्ति को कह रही है कि कुछ तो उनको दंड लगना चाहिए। उधर, भाटिया का दावा है कि महिला नहीं बल्कि उसके पति की भी रिकार्डिंग हैं। जिससे ये साबित होता है कि वे किस प्रकार से ब्लैकमेल कर रहे थे।
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सबूत दिखाएं : एडवोकेट बंसल
महिला के वकील विनय बंसल ने कहा कि उनके पास कोई सबूत है तो सार्वजनिक करें। भाटिया के बेटे झूठी स्टोरी सुना रहे हैं। मेरा सवाल ये है कि पुलिस की एसआईटी ने अब तक क्या जांच की? पैसे मांगने का तो मामला ही नहीं है, ये सब झूठ है। महिला की ओर से पैसे नहीं मांगे गए। पुलिस ने जबरदस्ती महिला के पास पैसों का थैला फेंका है। दूसरा, अब अजय भाटिया के बेटे सामने क्यों आ रहे हैं। अगर उनके पास रिकार्डिंग थी तो पहले क्यों नहीं उन्होंने बताया? या फिर ट्रेप कराया । इसमें राजनीतिक और वकालत से जुड़े लोग शामिल हैं। हमें अदालत पर पूरा भरोसा है, एक दिन सच सबके सामने होगा।
पुलिस के पास ब्लैकमेलिंग के पुख्ता सबूत : एसपी
एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने बताया कि महिला द्वारा ब्लैकमेलिंग करने के पुलिस के पास पुख्ता सबूत हैं। रिकार्डिंग समेत अन्य मैसेज भी हैं। पुलिस महिला को दोबारा से रिमांड पर लेने का प्रयास करेगी, ताकि शेष छह लाख रुपये और बरामद हो सकें। इसके लिए विधिक राय ले ली गई हैं। एक - दो दिन में अदालत में दोबारा से रिमांड के लिए अपील की जाएगी।