{"_id":"673cfeb6fa062c4e15055294","slug":"krishnas-character-cannot-be-understood-without-dignity-karnal-news-c-18-knl1008-522542-2024-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: मर्यादाहीन होकर कृष्ण चरित्र को नहीं समझा जा सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: मर्यादाहीन होकर कृष्ण चरित्र को नहीं समझा जा सकता
विज्ञापन
करनाल। सेक्टर आठ के चांद एन्क्लेव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य मिथलेश नंदन कौशिक ने कृष्ण जन्म पर नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की भजन गाकर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि कृष्ण चरित्र का श्रवण वही कर सकता है जिसके जीवन में मर्यादाएं हों, मर्यादाहीन होकर कोई भी कृष्ण चरित्र को नहीं समझ सकता।
शुकदेव जी महाराज ने भी परीक्षित को कृष्ण कथा सुनाने से पहले भगवान श्री राम की कथा सुनाई क्योंकि यदि जीवन में मर्यादा ही नहीं है तो व्यक्ति कृष्ण चरित्र में प्रवेश नहीं कर सकता। प्रभु श्री राम हमें मर्यादा में रहना सिखाते हैं। भगवान कृष्ण ने जब कारागार में देवकी के गर्भ से अवतार लिया उसी समय वसुदेव जी ने भगवान कृष्ण को एक छोटी सी टोकरी में उठाकर अपने सिर पर रखा और गोकुल ले गए। जब भगवान कृष्ण को वसुदेव जी ने अपने सिर पर उठाया उसी समय वसुदेव जी की हथकड़ी खुल गई, जेल के सारे ताले खुल गए, सैनिक सोने लग गए, इसका मतलब है जब भी व्यक्ति भगवान का आश्रय लेता है, जब भी व्यक्ति भगवान की शरणागति हो जाता है तो व्यक्ति के माया रूपी सारे बंधन खुल जाते हैं।
वसुदेव जी महाराज जब कृष्ण को गोकुल छोड़कर आए और वहां से एक कन्या को लेकर चले आए तो वसुदेव जी की सारी हथकड़ी लग गईं, सारे ताले बंद होने लगे, सैनिक जागने लगे। जीव जब भगवान का आश्रय लेता है तो उसके सारे बंधन खुल जाते हैं और वहीं जीव जब माया का आश्रय लेता है तो उसके सारे बंधन बंध जाते हैं वह माया में फंस जाता है भगवान कृष्ण पूर्ण ईश्वर हैं। इस मौके पर प्रधान रमेश जिंदल ने बताया कि कथा सेक्टर आठ पार्ट वन में पार्क नंबर चार में दोपहर तीन बजे से शाम 6.15 बजे तक हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शुकदेव जी महाराज ने भी परीक्षित को कृष्ण कथा सुनाने से पहले भगवान श्री राम की कथा सुनाई क्योंकि यदि जीवन में मर्यादा ही नहीं है तो व्यक्ति कृष्ण चरित्र में प्रवेश नहीं कर सकता। प्रभु श्री राम हमें मर्यादा में रहना सिखाते हैं। भगवान कृष्ण ने जब कारागार में देवकी के गर्भ से अवतार लिया उसी समय वसुदेव जी ने भगवान कृष्ण को एक छोटी सी टोकरी में उठाकर अपने सिर पर रखा और गोकुल ले गए। जब भगवान कृष्ण को वसुदेव जी ने अपने सिर पर उठाया उसी समय वसुदेव जी की हथकड़ी खुल गई, जेल के सारे ताले खुल गए, सैनिक सोने लग गए, इसका मतलब है जब भी व्यक्ति भगवान का आश्रय लेता है, जब भी व्यक्ति भगवान की शरणागति हो जाता है तो व्यक्ति के माया रूपी सारे बंधन खुल जाते हैं।
विज्ञापन
वसुदेव जी महाराज जब कृष्ण को गोकुल छोड़कर आए और वहां से एक कन्या को लेकर चले आए तो वसुदेव जी की सारी हथकड़ी लग गईं, सारे ताले बंद होने लगे, सैनिक जागने लगे। जीव जब भगवान का आश्रय लेता है तो उसके सारे बंधन खुल जाते हैं और वहीं जीव जब माया का आश्रय लेता है तो उसके सारे बंधन बंध जाते हैं वह माया में फंस जाता है भगवान कृष्ण पूर्ण ईश्वर हैं। इस मौके पर प्रधान रमेश जिंदल ने बताया कि कथा सेक्टर आठ पार्ट वन में पार्क नंबर चार में दोपहर तीन बजे से शाम 6.15 बजे तक हो रही है।
विज्ञापन