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नोटबंदी से त्रस्त किसानों व उद्योगपतियों को बजट से राहत की उम्मीद

Sat, 21 Jan 2017 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल
अमर उजाला ब्यूरो/करनाल Updated Sat, 21 Jan 2017 12:23 AM IST
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करनाल। केंद्र सरकार 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2016-17 का आम बजट प्रस्तुत करने जा रहा है। नोटबंदी के बाद आ रहे इस बजट से किसानों को काफी उम्मीदें हैं। नोटबंदी से परेशान किसान चाहते हैं कि सरकार बजट के माध्यम से किसानों की सभी परेशानियों को दूर करे। किसानों का कहना है कि सरकार इस बार के आम बजट से अलग से कृषि बजट प्रस्तुत करे। साथ ही स्वामी रंगनाथन रिपोर्ट को लागू करने के साथ किसानों को पूरी तरह से कर्ज मुक्त किया जाए। वहीं कृषि उपकरण निर्यात में करनाल को अव्वल रखने वाले यहां के कृषि उद्योगपति भी मोदी सरकार के तीसरे बजट से काफी उम्मीदें रखते हैं। कृषि उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार दूसरे देशों से मंगाए जाने वाले कृषि उपकरणों के रॉ मैैटेरियल पर हमें राहत दे। 
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लागू किया जाए स्वामी नाथन रिपोर्ट सरकार इस बार के आम बजट में किसानों के बेहतरी के लिए स्वामी नाथन की रिपोर्ट लागू करें। भार एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए कृषि के लिए अलग से बजट होना चाहिए। साथ ही सरकार किसानों को कर्ज मुक्त कर उन्हें राहत दे। किसान पहले से ही कर्ज में दबा हुआ है और पिछले कई साल से फसल अच्छी नहीं हो रही है और न ही किसानों को फसलों के अच्छे दाम मिल रहे हैं। बजट में किसान के लिए खास होना चाहिए।
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 - रतन मान, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन
फसल बीमा योजना में हो बदलाव सरकार ने फसलों को सुरक्षा देने के लिए जो फसल बीमा योजना बनाई है, उसमें बदलाव करे। क्योंकि किसानों को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। उम्मीद है कि इस बार के बजट में सरकार किसानों के हित में नई घोषणाएं करेगी।
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-राजेंद्र आर्य, किसान
रॉ मटैरियल इंपोर्ट करने पर ड्यूटी से मिले राहत कृषि उपकरणों से जुड़े रॉ मटैरियल को दूसरे देशों से मंगाने पर इस समय सरकार भारी शुल्क वसूलती है। हम कस्टम ड्यूटी, एक्साईज ड्यूटी और इंपोर्ट ड्यूटी के नाम पर सरकार को भारी-भरकम शुल्क देते हैं। जिस कारण कृषि उपकरण बनने के बाद उसकी लागत बढ़ जाती है और हम ग्लोबल मार्केट में पिछड़ जाते हैं। सरकार हमें इसमें राहत दे, अगर सरकार को शुल्क वसूलना ही है तो वह इंपोर्ट होने वाले फिनीश गुड पर शुल्क लगाए।

- रणबीर अरोड़ा, कृषि उद्योगपति
करनाल को मिले ट्रेनिंग और टेस्टिंग सेंटर कृषि और कृषि उद्योग में करनाल हरियाणा का अव्वल जिला है। यहां पर सबसे ज्यादा कृषि उपकरण बनाए जाते हैं। यहां बने उपकरण विदेशों में भी इंपोर्ट होते हैं, लेकिन इसके बाद अभी तक यहां पर न तो ट्रेनिंग सेंटर है और न ही टेस्टिंग सेंटर। इसलिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार से हमारी मांग है कि यह सुविधाएं करनाल को दी जाए।
 - सोमनाथ सचदेवा, कृषि उद्योगपति
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