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Karnal News: वसंत पंचमी के लिए पतंगों की बिक्री तेज
Sun, 04 Jan 2026 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 04 Jan 2026 02:08 AM IST
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करनाल। जिले में वसंत पंचमी को देखते हुए पतंग की बिक्री तेज हो गई है। हर तरफ बच्चे पतंग उड़ाते नजर आ रहे हैं। बाजार में अलग-अलग रंगों, डिजाइन और साइज की पतंगें आ चुकी हैं। दुकानदारों के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस बार पतंग के कारोबार में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बाजार में खास तौर पर उत्तर प्रदेश के रामपुर से पतंगें बच्चों को लुभा रही हैं।
बच्चों के लिए उनकी पसंद के कार्टून करेक्टर वाली पतंगें भी बाजार में हैं। लोग अपने हीरो, नेता या सिंगर की तस्वीर वाली पतंग भी तैयार भी करवा रहे हैं। मॉडल टाउन के दुकानदार मोहित ने बताया कि इस बार कोलकाता, रामपुर, गुजरात और बरेली से मंगाई जा रही हैं। पतंग के कारोबार में पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि इस बार चाइनीज मांझे न आकर कॉटन के धागे से बने मांझे बरेली से मंगाए जा रहे हैं।
सेक्टर 12 के दुकानदार ज्ञानचंद सैनी ने बताया कि मकर संक्रांति और वसंत पंचमी के नजदीक आते ही बाजारों में पतंगबाजी के लिए लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक, हर वर्ग में पतंग उड़ाने का खास क्रेज देखा जा रहा है। इसी के चलते इस बार सबसे ज्यादा पतंगें गुजरात से आ रही हैं। यहां की पतंगें हल्की, मजबूत मानी जाती हैं। इसके अलावा जयपुर और राजस्थान के कोटा की कागजी पतंगों की भी खास मांग है, जिन पर पारंपरिक प्रिंट और लोक कला की झलक मिलती है।
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सेक्टर 13 में पतंग विक्रेता आशीष ने बताया कि सिंथेटिक पेपर और फाइबर मिश्रित पतंगें भी बाजार में पहुंची हैं, जो ज्यादा टिकाऊ मानी जाती हैं। ये वजन में हलकी होती हैं और लंबी दूरी की उड़ान भरती है। इसके अलावा लोगों में राजनीतिक पतंगों का भी क्रेज है जिनमें मोदी के प्रिंट वाली पतंग की मांग सबसे अधिक है।
कुंजपुरा रोड के पतंग विक्रेता ज्ञानचंद सैनी का कहना है कि वसंत पंचमी पर पतंग उड़ाने की परंपरा और लोगों के बढ़ते क्रेज को देखते हुए अलग-अलग साइज की पतंग और मांझे मंगा लिए हैं। उन्होंने बताया कि इस बार 6 फुट की पतंग भी बाजार में आई है जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इसकी कीमत 400 रुपये है।
मॉडल टाउन के दुकानदार ललित नागपाल ने बताया कि बाजार में इस बार कस्टमाइज्ड पतंगों का भी ऑप्शन है। ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से पतंग पर फोटो लगवा सकते हैं जो रामपुर में पतंग फैक्ट्री में तैयार की जाती है। इसे बनाने में दो दिन लगते हैं। इसके अलावा चाइनीज मांजे की बजाए अब लोग कॉटन के बने धागे के मांजे का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
पतंग की वैरायटी और रेंज
मंजोली पतंग : पांच रुपये
आधा पतंग : सात रुपये
पूरा पतंग : 10 रुपये
एक तवा पतंग : 15 रुपये
1.5 तवा पतंग : 30 रुपये
बुडा पतंग 50 रुपये
तीन फुट की पतंग : 100 रुपये से 150 रुपये
चार फुट की पतंग : 200 रुपये
पांच फुट की पतंग : 300 से 350 रुपये
छह फुट की पतंग : 400 से 600 रुपये तक
आठ फुट की पतंग : 700 रुपये
मांझा में विकल्प
टीपू सुलतान मांझा : इसकी डोरी सबसे मजबूत होती है जो 100 रुपये प्रति चकरी उपलब्ध है।
एनआरके मांझा : 3 रील का नबी रजा खान मांझा प्रति चकरी 400 रुपये में उपलब्ध है। यह पतंगबाजी के मुकाबले के लिए उपयोग में लाई जाती है।
जुबैर अहमद का मांझा : यह बरेली में तैयार किया जाता है और मुलायम होता है जिससे बच्चों के हाथों में चोट नहीं लगती।
लेप वाला मांझा: चावल की मांड और प्राकृतिक गोंद से तैयार, मध्यम स्तर की पतंगबाजी के लिए, कीमत 150 से 300 रुपये प्रति चकरी।
स्पेशल ब्रांडेड मांझा : अच्छी पकड़ वाला यह मांझा 400 रुपये प्रति चकरी मिल रहा है।
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बच्चों के लिए उनकी पसंद के कार्टून करेक्टर वाली पतंगें भी बाजार में हैं। लोग अपने हीरो, नेता या सिंगर की तस्वीर वाली पतंग भी तैयार भी करवा रहे हैं। मॉडल टाउन के दुकानदार मोहित ने बताया कि इस बार कोलकाता, रामपुर, गुजरात और बरेली से मंगाई जा रही हैं। पतंग के कारोबार में पिछले साल के मुकाबले 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि इस बार चाइनीज मांझे न आकर कॉटन के धागे से बने मांझे बरेली से मंगाए जा रहे हैं।
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सेक्टर 12 के दुकानदार ज्ञानचंद सैनी ने बताया कि मकर संक्रांति और वसंत पंचमी के नजदीक आते ही बाजारों में पतंगबाजी के लिए लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक, हर वर्ग में पतंग उड़ाने का खास क्रेज देखा जा रहा है। इसी के चलते इस बार सबसे ज्यादा पतंगें गुजरात से आ रही हैं। यहां की पतंगें हल्की, मजबूत मानी जाती हैं। इसके अलावा जयपुर और राजस्थान के कोटा की कागजी पतंगों की भी खास मांग है, जिन पर पारंपरिक प्रिंट और लोक कला की झलक मिलती है।
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सेक्टर 13 में पतंग विक्रेता आशीष ने बताया कि सिंथेटिक पेपर और फाइबर मिश्रित पतंगें भी बाजार में पहुंची हैं, जो ज्यादा टिकाऊ मानी जाती हैं। ये वजन में हलकी होती हैं और लंबी दूरी की उड़ान भरती है। इसके अलावा लोगों में राजनीतिक पतंगों का भी क्रेज है जिनमें मोदी के प्रिंट वाली पतंग की मांग सबसे अधिक है।
कुंजपुरा रोड के पतंग विक्रेता ज्ञानचंद सैनी का कहना है कि वसंत पंचमी पर पतंग उड़ाने की परंपरा और लोगों के बढ़ते क्रेज को देखते हुए अलग-अलग साइज की पतंग और मांझे मंगा लिए हैं। उन्होंने बताया कि इस बार 6 फुट की पतंग भी बाजार में आई है जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इसकी कीमत 400 रुपये है।
मॉडल टाउन के दुकानदार ललित नागपाल ने बताया कि बाजार में इस बार कस्टमाइज्ड पतंगों का भी ऑप्शन है। ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से पतंग पर फोटो लगवा सकते हैं जो रामपुर में पतंग फैक्ट्री में तैयार की जाती है। इसे बनाने में दो दिन लगते हैं। इसके अलावा चाइनीज मांजे की बजाए अब लोग कॉटन के बने धागे के मांजे का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
पतंग की वैरायटी और रेंज
मंजोली पतंग : पांच रुपये
आधा पतंग : सात रुपये
पूरा पतंग : 10 रुपये
एक तवा पतंग : 15 रुपये
1.5 तवा पतंग : 30 रुपये
बुडा पतंग 50 रुपये
तीन फुट की पतंग : 100 रुपये से 150 रुपये
चार फुट की पतंग : 200 रुपये
पांच फुट की पतंग : 300 से 350 रुपये
छह फुट की पतंग : 400 से 600 रुपये तक
आठ फुट की पतंग : 700 रुपये
मांझा में विकल्प
टीपू सुलतान मांझा : इसकी डोरी सबसे मजबूत होती है जो 100 रुपये प्रति चकरी उपलब्ध है।
एनआरके मांझा : 3 रील का नबी रजा खान मांझा प्रति चकरी 400 रुपये में उपलब्ध है। यह पतंगबाजी के मुकाबले के लिए उपयोग में लाई जाती है।
जुबैर अहमद का मांझा : यह बरेली में तैयार किया जाता है और मुलायम होता है जिससे बच्चों के हाथों में चोट नहीं लगती।
लेप वाला मांझा: चावल की मांड और प्राकृतिक गोंद से तैयार, मध्यम स्तर की पतंगबाजी के लिए, कीमत 150 से 300 रुपये प्रति चकरी।
स्पेशल ब्रांडेड मांझा : अच्छी पकड़ वाला यह मांझा 400 रुपये प्रति चकरी मिल रहा है।