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पतंग की डोर ने 200 परिंदों के काट दिए पर

Sun, 14 Feb 2016 01:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल Updated Sun, 14 Feb 2016 01:11 AM IST
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kite cuts the wings of 200 birds
लहूलुहान पक्षियों को बाद में जीवो मंगलम संस्था में इलाज कराया गया। अब यहां पर संस्था के सदस्य और डॉक्टर इनका इलाज कर रहे हैं।
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शुक्रवार को वसंत पंचमी के त्योहार को लेकर शहर में खासा जोश रहा। खुशी में युवाओं ने पतंगबाजी की, वहीं काफी संख्या में युवाओं ने चाइनिज डोर का भी प्रयोग किया। एक-दूसरे को हराने की होड़ पक्षियों पर भारी पड़ी। खुले आसमान में उड़ रहे ये पक्षी पतंग की डोर से जख्मी हो गए। ऐसे में दर्जनों के पंख कटते ही आसमान से धरती पर गिरे। उधर, पहले से ही शहर के कई क्षेत्रों में घायल जीवों को तलाश रहे जीवो मंगलम संस्था के सदस्यों ने इन्हें उठाया और इलाज के लिए सेक्टर छह स्थित पक्षी विहार में ले आए।

अब यहां मिला जीवनदान
आसमान में उड़ती पतंग इन पक्षियों को घायल कर उन्हें जीवन भर के लिए अपंग बना देती है। अपनी खुशियों के लिए हम जाने अनजाने में ही यह भयंकर गलती साल दर साल दोहराते जा रहे हैं। खासकर वसंत पंचमी का दिन तो इनके लिए आफत लेकर आता है। पतंगों की चाइनीजी डोर से घायल ये निरीह और बेजुबान पक्षियों की जान पर बन आती है। इन घायल पक्षियों को बचाने का बीड़ा करनाल के सेक्टर 6 स्थित जीवो मंगलम संसथान किसी वरदान से कम नहीं है। यहां पतंगों की डोर में फंसकर घायल हुए पक्षियों का एक  इंसान की तरह पूरा इलाज किया जाता है। इलाज के बाद संस्थान कर्मी इन पक्षियों को खुले आसमान में उड़ने के लिए छोड़ देते हैं। पिछले दो दिनों के दौरान 200 पक्षी वसंत पंचमी के मौके पर यहां पहुंचे, जिनके पंख डोर से कटे हुए थे।
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ऐसे तो विलुप्त हो जांएगी पक्षियों की प्रजातियां : अर्पिता
संस्थान की केयर टेकर साध्वी अर्पिता ने बताया की पक्षियों की प्रजातियां धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं जिसके कारण पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा की खासकर वसंत पंचमी के दिन बच्चे जो पतंग उड़ाते हैं उसमें फंसकर ये पक्षी बुरी तरह घायल हो जाते हैं, जिससे कई बार तो ये मौत का शिकार भी बन जाते हैं अथवा जीवनभर के लिए उड़ने लायक नहीं रहते। साध्वी अर्पिता ने कहा की ये संस्थान ऐसे जीवों के लिए समर्पित है जो किसी कारणवश दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं और उड़ नहीं पाते। ऐसे पक्षियों का यहां पूरी तरह इलाज किया जाता है और पूरी तरह ठीक होने के बाद उन्हें खुले आसमान में छोड़ दिया जाता है।
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न करें पतंगबाजी : संतोष
साध्वी संतोष ने लोगों का आह्वान किया कि वे इन बेजुबान पक्षियों को बचाने के लिए पतंगबाजी कम करने और खतरनाक डोर का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा की हमें अपनी खुशियों की खातिर किसी अन्य जीव की जान से खलने का अधिकार नहीं है। वसंत पंचमी पर्व के मौके पर बड़ी संख्या में घायल पक्षियों को लोग इलाज के लिए यहाँ इन्हे लेकर आते हैं, इसलिए पहल से ही स्वयंसेवकों को शहर के क्षेत्रों में भेज दिया जाता है,ताकि पक्षियों को जल्दी इलाज मिल सके 
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