{"_id":"612950d28ebc3ea75b224343","slug":"karnanagari-backward-in-sex-ratio-reached-20th-place-in-the-state-karnal-news-knl813301145","type":"story","status":"publish","title_hn":"लिंगानुपात में पिछड़ी कर्णनगरी, प्रदेश में 20वें स्थान पर पहुंची","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लिंगानुपात में पिछड़ी कर्णनगरी, प्रदेश में 20वें स्थान पर पहुंची
विज्ञापन
राकेश चौहान
करनाल। लिंगानुपात में कर्ण नगरी पिछड़ती जा रही है। सात माह में जिले का लिंगानुपात 879 पर पहुंच गया है जो कि प्रदेश में 20वें स्थान पर है। जबकि 2020 में जिले का लिंगानुपात 900 था और करनाल प्रदेश में तब 18वें स्थान पर था। फिलहाल प्रदेश में रोहतक 961 के साथ लिंगानुपात में पहले स्थान पर है। फतेहाबाद 862 सबसे पीछे है। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक जिले में 13703 बच्चे पैदा हुए हैं। इनमें 6412 बेटियां और 7291 बेटे शामिल हैं। ऐसे में दो साल में करनाल जिला लिंगानुपात में पिछड़ता जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि या तो जिले में भ्रूण जांच का खेल चल रहा है या गर्भवती महिलाएं अन्य जिले या प्रदेश में जाकर भ्रूण जांच करा रही हैं।
पीएनडीटी और एमटीपी एक्ट के तहत अब तक 59 एफआईआर हो चुकीं
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में अभी तक पीएनडीटी व एमटीपी एक्ट के तहत 59 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें पीएनडीटी के 34 और एमटीपी के 25 मामले शमिल हैं। 2020 की बात करें तो दो पीएनडीटी और दो मामले एमटीपी एक्ट के तहत दर्ज किए गए। जनवरी 2021 में भी एक पीएनडीटी व एमटीपी एक्ट के तहत एक-एक मामला दर्ज हुआ।
दलाल सक्रिय, कार में करते हैं लिंग जांच
जिले में कहीं न कहीं दलाल सक्रिय हैं। यही कारण है कि करनाल जिला पिछले दो साल से लिंगानुपात में पिछड़ता जा रहा है, क्योंकि जिले में पहले कई मामले सामने आ चुके हैं जो गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण की जांच करते थे। इस जांच के लिए वह 20 से 30 हजार रुपये लेते थे। इतना ही नहीं कार में भी भ्रूण जांच करने वालों को स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा है। कई बार विभाग ने उत्तर प्रदेश में भी छापा मारकर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
विज्ञापन
11 साल में करनाल में लिंगानुपात की स्थिति
वर्ष - लिंगानुपात
2010 - 834
2011 - 849
2012 - 847
2013 - 880
2014 - 886
2015 - 897
2016 - 909
2017 - 922
2018 - 934
2019 - 908
2020 - 900
लिंगानुपात को बेहतर करने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है तो वहीं आशा वर्करों को निर्देश दिए गए हैं कि वह गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग भी करती रहें। आमजन से भी अपील है कि यदि उन्हें लिंग जांच व गर्भपात करने के बारे में कहीं से सूचना मिले तो वह इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दे। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा और उसे पुरस्कार भी दिया जाएगा।
-डॉ. शीनू चौधरी, डिप्टी सीएमओ करनाल।
विज्ञापन
करनाल। लिंगानुपात में कर्ण नगरी पिछड़ती जा रही है। सात माह में जिले का लिंगानुपात 879 पर पहुंच गया है जो कि प्रदेश में 20वें स्थान पर है। जबकि 2020 में जिले का लिंगानुपात 900 था और करनाल प्रदेश में तब 18वें स्थान पर था। फिलहाल प्रदेश में रोहतक 961 के साथ लिंगानुपात में पहले स्थान पर है। फतेहाबाद 862 सबसे पीछे है। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक जिले में 13703 बच्चे पैदा हुए हैं। इनमें 6412 बेटियां और 7291 बेटे शामिल हैं। ऐसे में दो साल में करनाल जिला लिंगानुपात में पिछड़ता जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि या तो जिले में भ्रूण जांच का खेल चल रहा है या गर्भवती महिलाएं अन्य जिले या प्रदेश में जाकर भ्रूण जांच करा रही हैं।
पीएनडीटी और एमटीपी एक्ट के तहत अब तक 59 एफआईआर हो चुकीं
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में अभी तक पीएनडीटी व एमटीपी एक्ट के तहत 59 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें पीएनडीटी के 34 और एमटीपी के 25 मामले शमिल हैं। 2020 की बात करें तो दो पीएनडीटी और दो मामले एमटीपी एक्ट के तहत दर्ज किए गए। जनवरी 2021 में भी एक पीएनडीटी व एमटीपी एक्ट के तहत एक-एक मामला दर्ज हुआ।
विज्ञापन
दलाल सक्रिय, कार में करते हैं लिंग जांच
जिले में कहीं न कहीं दलाल सक्रिय हैं। यही कारण है कि करनाल जिला पिछले दो साल से लिंगानुपात में पिछड़ता जा रहा है, क्योंकि जिले में पहले कई मामले सामने आ चुके हैं जो गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण की जांच करते थे। इस जांच के लिए वह 20 से 30 हजार रुपये लेते थे। इतना ही नहीं कार में भी भ्रूण जांच करने वालों को स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा है। कई बार विभाग ने उत्तर प्रदेश में भी छापा मारकर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
विज्ञापन
11 साल में करनाल में लिंगानुपात की स्थिति
वर्ष - लिंगानुपात
2010 - 834
2011 - 849
2012 - 847
2013 - 880
2014 - 886
2015 - 897
2016 - 909
2017 - 922
2018 - 934
2019 - 908
2020 - 900
लिंगानुपात को बेहतर करने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है तो वहीं आशा वर्करों को निर्देश दिए गए हैं कि वह गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग भी करती रहें। आमजन से भी अपील है कि यदि उन्हें लिंग जांच व गर्भपात करने के बारे में कहीं से सूचना मिले तो वह इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दे। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा और उसे पुरस्कार भी दिया जाएगा।
-डॉ. शीनू चौधरी, डिप्टी सीएमओ करनाल।