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करनाल थाने ने निपटाए प्रदेश में सबसे अधिक मामले
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Tue, 27 Oct 2015 12:29 AM IST
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मामले निपटाने में महिला पुलिस थाना करनाल बेहतरीन कार्य कर रहा है। अब तक
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मामले निपटाने में प्रदेश में यह थाना प्रथम स्थान पर है। इतना ही नहीं
पहले महीने प्रथम रहे फरीदाबाद और गुुड़गांव को भी करनाल ने पीछे छोड़ दिया
है। महिला थाने की स्थापना 29 अगस्त को हुई।
अब तक 873 शिकायतें आईं, जिसमें से 636 शिकायतें प्रत्यक्ष रूप से आईं, जबकि 237 शिकायतें एसपी कार्यालय के माध्यम से भेजी गई हैं। कुल में से 784 मामलों का निपटारा हो चुका है। विभिन्न धाराओं के तहत 36 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 15 विषयों को लेकर मामले अदालत में चल रहे हैं, जबकि 5 मुकदमे कैंसिल कर दिए गए हैं व एक मुकदमा चंडीगढ़ भेजा गया है।
मात्र 15 मामले लंबित हैं, जिनकी जांच चल रही है। ज्यादातर मामलों में आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। थाने में 32 का स्टाफ है। एसपी पंकज नैन का कहना है कि महिला थाना खुलने से महिलाओं को जल्द न्याय मिल रहा है। इससे यकीनन अपराध कम होगा।
दूसरे थानों से आए 35 केस
महिला थाने की डीएसपी सुरेंद्र कौर ने बताया कि 35 मामले अन्य थानों से भी महिला पुलिस थाने में आए हैं, जिनमें से 22 मुकदमे अदालत में भेज दिए गए हैं, 13 मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि महिला थानों की स्थापना से महिलाओं में सरकार और पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि महिलाओं के लिए महिला थाने एक नई दिशा और दशा तय कर रहे हैं।
राइडर करती हैं गश्त
महिला थाने की एसएचओ लक्ष्मी देवी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला राइडर कॉलेजों, स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों के साथ-2 ऐसे स्थानों पर गश्त करती हैं, जहां पर उन्हें महिलाओं से छेड़छाड़ आदि की शिकायतें मिलती है। वैसे सामान्य गश्त निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार की जा रही है। थाने में महिलाओं के साथ मारपीट और घरेलू शिकायतें ज्यादा हैं। धीरे-धीरे क्राइम रेट कम होगा।
अब तक 873 शिकायतें आईं, जिसमें से 636 शिकायतें प्रत्यक्ष रूप से आईं, जबकि 237 शिकायतें एसपी कार्यालय के माध्यम से भेजी गई हैं। कुल में से 784 मामलों का निपटारा हो चुका है। विभिन्न धाराओं के तहत 36 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 15 विषयों को लेकर मामले अदालत में चल रहे हैं, जबकि 5 मुकदमे कैंसिल कर दिए गए हैं व एक मुकदमा चंडीगढ़ भेजा गया है।
मात्र 15 मामले लंबित हैं, जिनकी जांच चल रही है। ज्यादातर मामलों में आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। थाने में 32 का स्टाफ है। एसपी पंकज नैन का कहना है कि महिला थाना खुलने से महिलाओं को जल्द न्याय मिल रहा है। इससे यकीनन अपराध कम होगा।
दूसरे थानों से आए 35 केस
महिला थाने की डीएसपी सुरेंद्र कौर ने बताया कि 35 मामले अन्य थानों से भी महिला पुलिस थाने में आए हैं, जिनमें से 22 मुकदमे अदालत में भेज दिए गए हैं, 13 मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि महिला थानों की स्थापना से महिलाओं में सरकार और पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि महिलाओं के लिए महिला थाने एक नई दिशा और दशा तय कर रहे हैं।
राइडर करती हैं गश्त
महिला थाने की एसएचओ लक्ष्मी देवी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला राइडर कॉलेजों, स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों के साथ-2 ऐसे स्थानों पर गश्त करती हैं, जहां पर उन्हें महिलाओं से छेड़छाड़ आदि की शिकायतें मिलती है। वैसे सामान्य गश्त निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार की जा रही है। थाने में महिलाओं के साथ मारपीट और घरेलू शिकायतें ज्यादा हैं। धीरे-धीरे क्राइम रेट कम होगा।