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साहित्य और नाट्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों मिला सम्मान
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:27 AM IST
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सार्थक सांस्कृतिक संघ की ओर से ओपीएस विद्या मंदिर सेक्टर-13 में
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राज्यस्तरीय नाट्य संगोष्ठी एवं नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें
लगभग 30 स्कूलों के 80 शिक्षकों व विभिन्न संस्थाओं के 100 से अधिक
प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उद्घाटन सत्र की अगुवाई अभिनेत्री और
रंगकर्मी गीता अग्रवाल शर्मा ने की।
उन्होंने कहा कि नाटक की विधा का जिंदा रहना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता के लिए कोई सीमा तय नहीं होती है। यह नदी की तरह होता है और चल पड़ता है। डॉ. अशोक भाटिया ने नाटक की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नए लेखन के लिए प्रकाशकों द्वारा नाटक को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
संगोष्ठी के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि सुमेधा कटारिया ने कहा कि आज यहां पहुंचकर उन्हें रंगकर्मियों की चिंता और उनकी टीम से परिचय हुआ। लेखक, कवि रंगकर्मी और नृत्यकार सभी अपने-अपने क्षेत्र में अपना कार्य कर रहे हैं। दूसरे सत्र मेें विभिन्न स्कूलों से आए अध्यापक-अध्यापिकाओं के लिए नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसे फिल्म अभिनेत्री और रंगकर्मी गीता अग्रवाल शर्मा ने संचालित किया। दो घंटे की कार्यशाला में उन्होंने शिक्षकों को सिखाया कि किस प्रकार बच्चों को नाटक की तकनीक के साथ जोड़ा जा सकता है। कार्यशाला के दौरान सभी प्रतिभागियों की जिज्ञासा और सुझाव देखने योग्य थे। तीसरे व अंतिम सत्र में सार्थक सांस्कृतिक संघ ने करनाल में विभिन्न साहित्यिक व नाट्य संस्थाओं को सम्मानित किया। संस्था ने शहर की अखिल भारतीय साहित्य परिषद् कारखाने, अपना विचार मंच, साझा साहित्य मंच व स्कूल ऑफ एक्टिंग के सदस्यों को उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया। सम्मान समारोह में करनाल के पुलिस अधीक्षक पंकज नैन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। एसपी ने करनाल शहर के स्मार्ट लोगों की प्रशंसा करते हुए सांस्कृतिक संघ के प्रयास को नई पहचान की एक कड़ी बताया और सफल कार्यक्रम के आयोजन की संस्था को बधाई दी। संघ के संरक्षक प्रो. जोगिंद्र मदान व करनाल इकाई के अध्यक्ष संजय मदान ने मुख्य अतिथि को सम्मानित किया। एमडीडी बाल आश्रम के बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। उनको भी मंच से सम्मान प्राप्त हुआ। सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के अध्यक्ष व राष्ट्रपति अवार्डी डॉ. राजन लांबा को भी उनकी इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। ओपीएस विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या को उनके सहयोग व परिसर के लिए भी स्मृतिचिह्न प्रदान किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पंकज भारती, मैनेजिंग ट्रस्टी, करनाल विकास निधि ने सभी साहित्यकारों और सार्थक सांस्कृतिक संघ को बधाई देते हुए शुभकामनाएं दी।
उन्होंने कहा कि नाटक की विधा का जिंदा रहना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता के लिए कोई सीमा तय नहीं होती है। यह नदी की तरह होता है और चल पड़ता है। डॉ. अशोक भाटिया ने नाटक की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नए लेखन के लिए प्रकाशकों द्वारा नाटक को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
संगोष्ठी के समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि सुमेधा कटारिया ने कहा कि आज यहां पहुंचकर उन्हें रंगकर्मियों की चिंता और उनकी टीम से परिचय हुआ। लेखक, कवि रंगकर्मी और नृत्यकार सभी अपने-अपने क्षेत्र में अपना कार्य कर रहे हैं। दूसरे सत्र मेें विभिन्न स्कूलों से आए अध्यापक-अध्यापिकाओं के लिए नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसे फिल्म अभिनेत्री और रंगकर्मी गीता अग्रवाल शर्मा ने संचालित किया। दो घंटे की कार्यशाला में उन्होंने शिक्षकों को सिखाया कि किस प्रकार बच्चों को नाटक की तकनीक के साथ जोड़ा जा सकता है। कार्यशाला के दौरान सभी प्रतिभागियों की जिज्ञासा और सुझाव देखने योग्य थे। तीसरे व अंतिम सत्र में सार्थक सांस्कृतिक संघ ने करनाल में विभिन्न साहित्यिक व नाट्य संस्थाओं को सम्मानित किया। संस्था ने शहर की अखिल भारतीय साहित्य परिषद् कारखाने, अपना विचार मंच, साझा साहित्य मंच व स्कूल ऑफ एक्टिंग के सदस्यों को उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए सम्मानित किया। सम्मान समारोह में करनाल के पुलिस अधीक्षक पंकज नैन ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। एसपी ने करनाल शहर के स्मार्ट लोगों की प्रशंसा करते हुए सांस्कृतिक संघ के प्रयास को नई पहचान की एक कड़ी बताया और सफल कार्यक्रम के आयोजन की संस्था को बधाई दी। संघ के संरक्षक प्रो. जोगिंद्र मदान व करनाल इकाई के अध्यक्ष संजय मदान ने मुख्य अतिथि को सम्मानित किया। एमडीडी बाल आश्रम के बच्चों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। उनको भी मंच से सम्मान प्राप्त हुआ। सहोदय स्कूल कांप्लेक्स के अध्यक्ष व राष्ट्रपति अवार्डी डॉ. राजन लांबा को भी उनकी इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। ओपीएस विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या को उनके सहयोग व परिसर के लिए भी स्मृतिचिह्न प्रदान किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पंकज भारती, मैनेजिंग ट्रस्टी, करनाल विकास निधि ने सभी साहित्यकारों और सार्थक सांस्कृतिक संघ को बधाई देते हुए शुभकामनाएं दी।