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घोषणाओं में बीत गया साल, सिमटे सभी प्रोजेक्ट
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:25 AM IST
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न सीएम सिटी से डेयरियां शिफ्ट हो सकीं न ही रेहड़ियां। नए बस स्टैंड की
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सौगात भी घोषणाओं के जरिये शहरवासियों को मिली जरूर, लेकिन अब तक उस पर भी
जमीनी तौर पर कोई काम नहीं शुरू हो सका। 30 करोड़ रुपये की लागत से नगर
निगम का नया भवन बनाए जाने की घोषणा से सीएम सिटीवासियों का सीना फर्क से
फूला नहीं समा रहा था, लेकिन सरकार का एक साल पूरा होने तक भी इस प्रोजेक्ट
का अब तक कागजों में नक्शा ही तैयार हो सका है। सरकार के इस एक साल के
कार्यकाल के दौरान करनाल जिले सहित आसपास के जिलेवासियों के लिए सबसे बड़ी
सौगात जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सबसे पहली घोषणाओं में
से एक भी, कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी का निर्माण करना। वह भी आज तक
जमीनी स्तर पर शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि जिला प्रशासन के कागजों में
इस यूनिवर्सिटी के प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। घरौंडा में
बनने वाले सिटी फोरेस्ट व मूनक में 50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले
बागवानी विश्वविद्यालय की घोषणा भी भाजपा सरकार की देन है, लेकिन इनका भी
हाल वही है, जो दूसरी अन्य सीएम की घोषणाओं का रहा। सीएम ने घोषणा तो कर दी
लेकिन अधिकारियों ने पूरे साल इस पर कोई ध्यान देना जरूरी नहीं समझा।
बहरहाल यह वर्ष केवल और केवल घोषणाओं का साल बनकर रह गया। घोषणाएं पूरी
होनी तो दूर उन पर काम शुरू तक नहीं हो पाया। सीएम सिटी में ई लाइब्रेरी और
टॉय ट्रेन जो करोड़ों रुपये की सौगात हैं यह दोनों सौगातें ही अधिकारी
पूरी कर पाए हैं। अलबत्ता सीएम सिटी में 8 बड़ी घोषणाएं हुईं। सभी अधूरी
हैं।
32 एकड़ में बनना है नया बस अड्डा
शहर के बीचोंबीच स्थित करनाल के बस अड्डे को इंद्री बाईपास रोड पर बलड़ी के पास बनाए जाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की थी। करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट का सच यह है कि यहां अब तक एक ईंट भी नहीं रखी गई है। मजेदार बात तो यह है कि बस स्टैंड के लिए अब तक लैंड ट्रांसफर की कार्रवाई ही अभी तक पूरी हो पाई है। यदि कार्य इसी गति से चलता रहा तो सरकार इस शेष कार्यकाल में बस स्टैंड की नींव ही रखी जा सकेगी।
आज भी शहर के बीच में ही है मंडी
शहरवासियों के लिए आफत बनी सब्जी मंडी एक साल बाद भी शिफ्ट नहीं हो सकी है। 26 अक्टूबर को सरकार का एक साल पूरा हो जाएगा। इस सब्जी मंडी को लेकर मुख्यमंत्री अधिकारियों से कई बार पूछताछ कर चुके हैं लेकिन हर बार उन्हें अधिकारियों ने यही कहा कि बस एक सप्ताह, एक माह तक मंडी शिफ्ट कर दी जाएगी। इस मंडी के लिए 8 करोड़ रुपये में टेंडर हुए थे। इस प्रोजेक्ट का सच यह है कि यहां बनाई गई करीब 150 फड़ियों को बनाकर अभी तोड़ा जा रहा था। मंडी कब पूरी होगी यह तो जिला प्रशासन भी नहीं बता सकता। प्रशासन की इस लापरवाही के चलते आए दिन लोग जाम से जूझ रहे हैं। महज 500 मीटर एरिया पार करने में 20 मिनट का समय लग जाता है।
पॉश एरिया में चल रहीं डेयरियां
सीएम के प्रोजेक्ट में एक बड़ा प्रोजेक्ट है शहर से डेयरी शिफ्ट करना। प्रशासन ने जमीन तो तलाश ली है। लेकिन अब तक इस जमीन की केवल चहारदीवारी का 15 लाख रुपये में टेंडर ही दिया गया है। इसके लिए पिंगली गांव में करीब 32 एकड़ जमीन में 3 करोड़ रुपये के कार्य कराए जाने हैं लेकिन यह कार्य कब होंगे यह कहा नहीं जा सकता। इसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। अलबत्ता शहर के पॉश एरिया में अभी भी 235 डेयरियां चल रही हैं।
रेहड़ियां भी शिफ्टिंग के इंतजार में
शहर से 12 साल बाद भी डेयरियां शिफ्ट हुईं ओवरब्रिज के नीचे रेहडिय़ां। अलबत्ता सीएम सिटी अभी भी जाम और गंदगी में फंसी है और जनता त्राहिमाम कर रही है। इस प्रोजेक्ट को बार-बार हरी झंडी मिलने के बाद भी अधिकारी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। योजना के तहत शहर कैथल व काछवा रोड स्थित दोनों पुलों (रेलवे ओवरब्रिज )के नीचे रेहड़ी वालों को शिफ्ट किया जाना था। इसके लिए 237 प्लाट दोनों पुलों के नीचे रेहड़ी वालों का अलॉट भी 14 सितंबर तक कर दिए गए थे, लेकिन करीब डेढ़ माह बाद भी यह शिफ्ट नहीं हुई। इन 237 रेहड़ियों को शिफ्ट करने के बाद भी शहर में करीब 600 रेहड़ी शहर में रह जाएंगी।
हेल्थ यूनिवर्सिटी भी सिर्फ कागजों में
कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट करनाल के लिए बड़ी सौगात है। करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से यह यूनिवर्सिटी बनाई जानी है। कुटेल की करीब 200 एकड़ जमीन मे यह यूनिवर्सिटी बनाई जानी है। लेकिन अब तक इस यूनिवर्सिटी के लिए पंचायत की जो जमीन है वह डायरेक्ट मेडिकल के नाम ही ट्रांसफर हो सकी है। शेष कोई काम नहीं हो सका है। अलबत्ता यह प्रोजेक्ट भी अगले 4 साल में पूरा होना संभव नहीं लगता।
कोट
9 अक्टूबर को विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की गई थी। सीएम के सभी प्रोजेक्ट्स पर कार्य तेजी से चल रहे हैं। सब्जी मंडी को मार्केटिंग बोर्ड बना रहा है। इस मंडी का निर्माण कार्य अब पूरा कर लिया गया है। बस स्टैंड के लिए लैंड ट्रांसफर कर ली गई है, जल्द ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए पंचायती जमीन को डायरेक्टर मेडिकल के नाम ट्रांसफर कर दिया गया है।
डॉ. जेगणेशन, डीसी करनाल।
32 एकड़ में बनना है नया बस अड्डा
शहर के बीचोंबीच स्थित करनाल के बस अड्डे को इंद्री बाईपास रोड पर बलड़ी के पास बनाए जाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की थी। करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट का सच यह है कि यहां अब तक एक ईंट भी नहीं रखी गई है। मजेदार बात तो यह है कि बस स्टैंड के लिए अब तक लैंड ट्रांसफर की कार्रवाई ही अभी तक पूरी हो पाई है। यदि कार्य इसी गति से चलता रहा तो सरकार इस शेष कार्यकाल में बस स्टैंड की नींव ही रखी जा सकेगी।
आज भी शहर के बीच में ही है मंडी
शहरवासियों के लिए आफत बनी सब्जी मंडी एक साल बाद भी शिफ्ट नहीं हो सकी है। 26 अक्टूबर को सरकार का एक साल पूरा हो जाएगा। इस सब्जी मंडी को लेकर मुख्यमंत्री अधिकारियों से कई बार पूछताछ कर चुके हैं लेकिन हर बार उन्हें अधिकारियों ने यही कहा कि बस एक सप्ताह, एक माह तक मंडी शिफ्ट कर दी जाएगी। इस मंडी के लिए 8 करोड़ रुपये में टेंडर हुए थे। इस प्रोजेक्ट का सच यह है कि यहां बनाई गई करीब 150 फड़ियों को बनाकर अभी तोड़ा जा रहा था। मंडी कब पूरी होगी यह तो जिला प्रशासन भी नहीं बता सकता। प्रशासन की इस लापरवाही के चलते आए दिन लोग जाम से जूझ रहे हैं। महज 500 मीटर एरिया पार करने में 20 मिनट का समय लग जाता है।
पॉश एरिया में चल रहीं डेयरियां
सीएम के प्रोजेक्ट में एक बड़ा प्रोजेक्ट है शहर से डेयरी शिफ्ट करना। प्रशासन ने जमीन तो तलाश ली है। लेकिन अब तक इस जमीन की केवल चहारदीवारी का 15 लाख रुपये में टेंडर ही दिया गया है। इसके लिए पिंगली गांव में करीब 32 एकड़ जमीन में 3 करोड़ रुपये के कार्य कराए जाने हैं लेकिन यह कार्य कब होंगे यह कहा नहीं जा सकता। इसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। अलबत्ता शहर के पॉश एरिया में अभी भी 235 डेयरियां चल रही हैं।
रेहड़ियां भी शिफ्टिंग के इंतजार में
शहर से 12 साल बाद भी डेयरियां शिफ्ट हुईं ओवरब्रिज के नीचे रेहडिय़ां। अलबत्ता सीएम सिटी अभी भी जाम और गंदगी में फंसी है और जनता त्राहिमाम कर रही है। इस प्रोजेक्ट को बार-बार हरी झंडी मिलने के बाद भी अधिकारी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। योजना के तहत शहर कैथल व काछवा रोड स्थित दोनों पुलों (रेलवे ओवरब्रिज )के नीचे रेहड़ी वालों को शिफ्ट किया जाना था। इसके लिए 237 प्लाट दोनों पुलों के नीचे रेहड़ी वालों का अलॉट भी 14 सितंबर तक कर दिए गए थे, लेकिन करीब डेढ़ माह बाद भी यह शिफ्ट नहीं हुई। इन 237 रेहड़ियों को शिफ्ट करने के बाद भी शहर में करीब 600 रेहड़ी शहर में रह जाएंगी।
हेल्थ यूनिवर्सिटी भी सिर्फ कागजों में
कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट करनाल के लिए बड़ी सौगात है। करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से यह यूनिवर्सिटी बनाई जानी है। कुटेल की करीब 200 एकड़ जमीन मे यह यूनिवर्सिटी बनाई जानी है। लेकिन अब तक इस यूनिवर्सिटी के लिए पंचायत की जो जमीन है वह डायरेक्ट मेडिकल के नाम ही ट्रांसफर हो सकी है। शेष कोई काम नहीं हो सका है। अलबत्ता यह प्रोजेक्ट भी अगले 4 साल में पूरा होना संभव नहीं लगता।
कोट
9 अक्टूबर को विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की गई थी। सीएम के सभी प्रोजेक्ट्स पर कार्य तेजी से चल रहे हैं। सब्जी मंडी को मार्केटिंग बोर्ड बना रहा है। इस मंडी का निर्माण कार्य अब पूरा कर लिया गया है। बस स्टैंड के लिए लैंड ट्रांसफर कर ली गई है, जल्द ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। कल्पना चावला मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए पंचायती जमीन को डायरेक्टर मेडिकल के नाम ट्रांसफर कर दिया गया है।
डॉ. जेगणेशन, डीसी करनाल।