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विशेषज्ञ की राय के बिना मरीज को किया रेफर, पीजीआई ने जताई आपत्ति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 15 Jul 2019 02:15 AM IST
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kalpna chawla medical college
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज मरीजों से अपना पीछा छुड़ाने के लिए बिना विशेषज्ञ की राय लिए पीजीआई या अन्य जगह रेफर कर देता है। इससे जहां सरकारी मशीनरी और मैन पॉवर का दुरुपयोग होता है, वहीं मरीज को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे ही एक मरीज को करनाल राजकीय मेडिकल कॉलेज ने पीजीआई रोहतक रेफर किया तो उन्होंने ओपीडी कार्ड पर ही इस पर कड़ी आपत्ति जताई और गंभीर टिप्पणी कर मरीज को वापस भेज दिया।
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पीजीआईएमएम रोहतक के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने मरीज के ओपीडी कार्ड पर लिखा कि इस मरीज को जनरल सर्जरी या आर्थोपैडिक विभाग की ओपिनियन की जरूरत है। मरीज को डोपलर टेस्ट की जरूरत नहीं है, बल्कि लगातार पट्टी बदलने की जरूरत है। कृपया आगे से किसी विशेषज्ञ की सलाह के बिना ऐसे मरीजों को यहां रेफर न करें। करनाल राजकीय मेडिकल कॉलेज की इस प्रकार की अनदेखी से सरकारी मशीनरी और मैन पॉवर का दुरुपयोग होता है।
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मामला जून माह का है। 14 जून की रात एक बेघर और बिना नाम के व्यक्ति को किसी ने कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में दाखिल कराया। उसके एक पैर के अंगूठे के पास का हिस्सा गला हुआ था। इमरजेंसी में बिना नाम से उसका ओपीडी कार्ड बना और ऑपरेशन और डोपलर टेस्ट बताकर उसे रात 10 बजे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस नंबर एचआर-45-6152 में उसको एंबुलेंस स्टॉफ के साथ रोहतक ले जाया गया। वहां पर इमरजेंसी विभाग ने बाकायदा उस व्यक्ति का ओपीडी कार्ड बनाया गया। यहां पर सीनियर डॉक्टर ने मरीज को देखा तो उसे सामान्य करार देकर कहा कि इस बीमारी का इलाज करनाल मेडिकल कॉलेज में हो सकता है। इसके बाद मरीज को दाखिल करने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं सीनियर रेजिडेंट ने इस पर इतनी कड़ी टिप्पणी तक लिख दी। इसके बाद एंबुलेंस स्टॉफ उस मरीज को लेकर वापस करनाल आ गए। लापरवाही यहीं पर नहीं रुकी, इसके अगले दिन फिर से करनाल मेडिकल कॉलेज ने उस मरीज को चंडीगढ़ रेफर कर दिया।
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कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल में मरीजों का इलाज न करके किस प्रकार से उनको रेफर करने का खेल खेला जाता है, इस खेल से पर्दा पीजीआईएमएस रोहतक के एक डॉक्टर ने उठाया है। डॉक्टर ने न केवल मामले को उजागर किया है, बल्कि करनाल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर मरीज के ओपीडी कार्ड पर सरकारी मशीनरी और मैन पॉवर के भारी नुकसान भी आशंका जताई है। डॉक्टर के इतने तीखे कमेंट के बाद से मेडिकल कॉलेज करनाल में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञ को दिखाए बिना ही कर दिया रेफर
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर के आदेश हैं कि बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी मरीज को रेफर नहीं किया जा सकता, लेकिन इस मामले में इस आदेश का भी उल्लंघन हुआ है। जनरल सर्जरी विभाग के जूनियर डॉक्टर ने मरीज को देखते ही रेफर कर दिया। इसको लेकर न तो अपने सीनियर की सलाह ली गई और न ही उसे दिखाया गया।
ये मामला प्रबंधन के संज्ञान में आया है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। जूनियर रेजिडेंट द्वारा मरीज को इस प्रकार से रेफर नहीं किया जा सकता है। जहां से भी लापरवाही होगी, उनको चेक कराकर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. गुलशन गर्ग, डीएमएस एवं प्रवक्ता, राजकीय मेडिकल कॉलेज, करनाल
कॉलेज में है डोपलर टेस्ट की सुविधा और सर्जन की भी
करनाल मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में अल्ट्रासाउंड मशीन भी है, इसी मशीन से डोपलर टेस्ट किए जा सकते हैं, लेकिन यहां पर रेडियोलाजिस्ट नहीं होने के कारण टेस्ट नहीं किए जाते हैं। इमरजेंसी में यह सुविधा केवल सुबह 8 से लेकर दोपहर 2 बजे तक मरीजों को इसी सुविधा मिलती है, रात के समय नहीं।

पट्टी बदलने की मेहनत के कारण किया रेफर
मेडिकल कॉलेज के सूत्र बताते हैं कि मरीज के पैर की एंपुटेशन (मामूली) सर्जरी होनी थी, लेकिन यहां पर ऐसा नहीं किया गया। मरीज के पैर का कुछ हिस्सा गला हुआ था। बता दें कि कालेज में सात सर्जन हैं, बावजूद इसके मामूली सी सर्जरी के लिए भी मरीज को पीजीआई रेफर कर दिया गया। सूत्र ये भी बताते हैं कि सर्जरी के बाद कई दिन तक मरीज की पटटी बदलनी पड़ती है, इसलिए इसी मेहनत से बचने के लिए उसे रेफर कर दिया गया।
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