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जेबीटी अध्यापकों की भर्ती का रिकार्ड नहीं

Mon, 24 Feb 2014 11:57 PM IST
कैथल
कैथल Updated Mon, 24 Feb 2014 11:57 PM IST
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JBT teachers
वर्ष 2000 में भर्ती हुए जेबीटी अध्यापकों का मौलिक शिक्षा निदेशालय के पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। यह खुलासा आरटीआई के माध्यम से मांगी गई सूचना में हुआ है। जेबीटी अध्यापकों की अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग समिति के संयोजक सुरेश द्रविड़ ने निदेशालय से आरटीआई के माध्यम से इस भर्ती के संबंध में सूचना मांगी थी। निदेशालय का कहना है कि इस भर्ती का पूरा रिकॉर्ड सीबीआई के पास है।
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ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार चार मार्च को किस तरह से उच्च न्यायालय में जवाब देगी। यह खुलासा आरटीआई के माध्यम से मांगी गई सूचना में हुआ है। सुरेश द्रविड़ ने बताया कि उन्होंने कुल 25 प्रश्न पूछे थे जिसमें इस भर्ती में कुल कितने अध्यापक भर्ती हुए, इसमें एससी एवं बीसी के कितने अध्यापक हैं। विज्ञापन किस-किस समाचार पत्र में निकाला गया था। भर्ती का फैसला मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया था या नहीं। भर्ती की क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। भर्ती रोस्टर को ध्यान में रखते हुए की गई थी क्या।
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आरक्षण लागू किया गया या नहीं। कुल कितने उम्मीदवारों ने आवेदन किया। कितने साक्षात्कार प्रक्रिया में शामिल हुए। जेबीटी अध्यापकों की भर्ती के लिए कितनी कमेटियां बनाई गईं। साक्षात्कार के बाद कितनी सूचियां बनाई गईं। राज्यस्तर पर तैयार की गई सूची उपलब्ध करवाई जाए। साक्षात्कार में निर्धारित अंकों में प्रत्येक उम्मीदवार को कितने अंक दिए गए। साक्षात्कार के बाद राज्यस्तर पर सूची बनाने का लिखित आदेश किसने दिया। साक्षात्कार के पश्चात राज्यस्तर पर सूची बनाने वाले कितने कर्मचारी और अधिकारी थे। जेबीटी अध्यापकों की भर्ती के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक कौन थे। उस समय शिक्षामंत्री कौन थे।
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नई मेरिट सूची कैसे होगी तैयार
इस सभी बातों को लेकर उन्होंने 11 फरवरी को आरटीआई के माध्यम से जवाब मांगा था जिसके जवाब में उन्हें निदेशक मौलिक शिक्षा हरियाणा पंचकूला की ओर से जवाब भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि इस भर्ती से संबंधित सारा रिकॉर्ड सीबीआई के पास है। सुरेश द्रविड़ का कहना है कि यदि पूरा रिकॉर्ड सीबीआई के पास है तो चार मार्च को सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दिए जाने वाले जवाब पर भी संशय हो सकता है क्योंकि जब विभाग के पास रिकॉर्ड ही नहीं है तो न्यायालय में दी जाने वाली नई मेरिट सूची किस आधार पर तैयार होगी। पहले भी सरकार द्वारा न्यायालय से इस संबंध में समय लिया जा चुका है।
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