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Karnal News: जेबीटी भर्ती विवाद की जांच फिर तेज, 31 शिक्षकों को दोबारा सत्यापन के लिए बुलावा

Fri, 13 Feb 2026 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Fri, 13 Feb 2026 02:04 AM IST
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JBT recruitment controversy investigation intensified, 31 teachers called for re-verification
करनाल। वर्ष 2009-12 की जेबीटी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने संदेह की श्रेणी में शामिल शिक्षकों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। प्रदेशभर के 375 शिक्षकों की सूची में जिले के 32 जेबीटी शामिल हैं, जिन्हें सत्यापन के लिए पंचकूला मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
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शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, इन शिक्षकों को 11 से 14 फरवरी के बीच सुबह 11 बजे निर्धारित समय पर अपने मूल दस्तावेजों सहित उपस्थित होना है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2009-10 में आयोजित एचटेट (हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा) और इसके आधार पर वर्ष 2012 में हुई जेबीटी भर्ती को लेकर शिकायत सामने आई थी। एचटेट उत्तीर्ण न कर पाने वाली एक अभ्यर्थी ने चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। शिकायत में कुछ चयनित अभ्यर्थियों के नाम और पते भी दिए गए थे। प्रारंभिक जांच में ये अभ्यर्थी संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद वर्ष 2013 में सरकार की ओर से बड़े स्तर पर जांच कराई गई। उस समय प्रदेशभर में करीब 1170 शिक्षक डाउटफुल श्रेणी में चिन्हित किए गए थे।
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दस्तावेजों और बायोमेट्रिक में मिली थीं विसंगतियां
जांच के दौरान कई मामलों में शिक्षकों के थंब इम्प्रेशन और हस्ताक्षर आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे। इसी आधार पर कई अभ्यर्थियों को संदेहास्पद मानते हुए आगे की जांच में रखा गया। वर्ष 2023 में इन मामलों की वैज्ञानिक जांच मधुबन (करनाल) स्थित फॉरेंसिक लैब में कराई गई। जांच में कुछ शिक्षकों के हस्ताक्षर व रिकॉर्ड सही पाए गए, जिससे उन्हें राहत मिल गई। हालांकि, शेष मामलों में स्थिति स्पष्ट न होने पर जांच कमेटी ने प्रदेशभर से 375 शिक्षकों का दोबारा फिजिकल वेरिफिकेशन कराने की सिफारिश की थी। शिक्षा निदेशालय के अनुसार, दोबारा फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद ही संबंधित शिक्षकों की सेवा स्थिति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। करीब एक दशक से लंबित यह मामला अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है।
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