{"_id":"b31b8539f2d00e5c3aa8f78bcebf973d","slug":"it-would-not-buy-paddy-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"धान खरीद नहीं होने पर किसानों का बवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धान खरीद नहीं होने पर किसानों का बवाल
असंध
Updated Sun, 13 Oct 2013 10:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर की नई अनाज मंडी में लगातार चौथे दिन भी धान की खरीद नहीं होने से परेशान दर्जनों किसानों ने रविवार को भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले मंडी गेट के समक्ष जाम लगा दिया। किसानों के जाम लगाए जाने से करनाल मार्ग के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई।
किसानों ने सरकार व मंडी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। भाकियू हलका प्रधान जोगेंद्र सिंह झींडा, शीशा सिंह, बलदेव, दलेर सिंह, मंजीत, जसविंदर, हरजीत सिंह, मोनू, महेंद्र, मांगेराम, प्रताप सिंह, संदीप, मंजीत, प्रमोद ने आरोप लगाया कि खरीद एजेंसियां किसानों की मेहनत के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
जानबूझकर किसानों को परेशान करने की नीयत से चार दिन से धान की खरीद बंद है। किसान अपनी फसल की सुरक्षा के लिए दिन रात मंडियों में पड़े हुए हैं। खरीद नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है और इसके साथ ही बेवजह मानसिक प्रताड़ना का सामना भी करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
खरीदे गए व्यापारियों के कट्टे शेड के नीचे पड़े हैं, जबकि किसानों के खून पसीने की कमाई खुले आसमान के नीचे रूल रही है। थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने जाम खुलवाने की कोशिश की, परंतु किसानों ने खरीद शुरू होने तक जाम नहीं खोलने की जिद की। समाचार लिखे जाने तक दो घंटे बीत जाने के बावजूद जाम जारी था।
विज्ञापन
किसानों ने सरकार व मंडी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। भाकियू हलका प्रधान जोगेंद्र सिंह झींडा, शीशा सिंह, बलदेव, दलेर सिंह, मंजीत, जसविंदर, हरजीत सिंह, मोनू, महेंद्र, मांगेराम, प्रताप सिंह, संदीप, मंजीत, प्रमोद ने आरोप लगाया कि खरीद एजेंसियां किसानों की मेहनत के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।
विज्ञापन
जानबूझकर किसानों को परेशान करने की नीयत से चार दिन से धान की खरीद बंद है। किसान अपनी फसल की सुरक्षा के लिए दिन रात मंडियों में पड़े हुए हैं। खरीद नहीं होने से उन्हें आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है और इसके साथ ही बेवजह मानसिक प्रताड़ना का सामना भी करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
खरीदे गए व्यापारियों के कट्टे शेड के नीचे पड़े हैं, जबकि किसानों के खून पसीने की कमाई खुले आसमान के नीचे रूल रही है। थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने जाम खुलवाने की कोशिश की, परंतु किसानों ने खरीद शुरू होने तक जाम नहीं खोलने की जिद की। समाचार लिखे जाने तक दो घंटे बीत जाने के बावजूद जाम जारी था।