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प्रस्तावित फ्लाईओवर का स्वरूप बदले तो होगा फायदा
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देव शर्मा
करनाल। स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा हरियाणा नर्सिंग होम से गुरुनानक खालसा कॉलेज तक और कमेटी चौक से कर्ण पार्क तक टी-आकार में प्रस्तावित फ्लाईओवर का टेंडर ऑनलाइन कर दिया गया है। हालांकि अभी किसी कंपनी ने टेंडर नहीं लिया है। इस पर करीब 154 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। लेकिन जानकारों का मानना है कि स्मार्ट सिटी द्वारा डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च करने के बाद भी इसका लोगों को अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाएगा। यदि इसमें कुछ बदलाव कर दिया जाए और हरियाणा नर्सिंग होम सेक्टर 13-14 के डिवाइडिंग रोड से शुरू करके खालसा कॉलेज के बजाय रेलवे रोड फिश मार्केट या चर्च के आसपास उतार दिया जाए जिससे इसका फायदा एक बड़े क्षेत्र के साथ कई स्कूलों, कॉलेजों के विद्यार्थियों को मिल जाएगा। धनराशि का सदुपयोग भी नजर आने लगेगा।
पिछले साल जब स्मार्ट सिटी के सीईओ ने फ्लाईओवर की कार्ययोजना तैयार की थी तो व्यापारियों ने विरोध जताया था। आशंका जाहिर की थी कि इससे संबंधित क्षेत्र के बाजार को भारी नुकसान पहुंचेगा। लेकिन मामला शहर के विकास से जुड़ा है इसलिए प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी गई। स्मार्ट सिटी के अधिकारी ने बताया कि फ्लाईओवर का टेंडर लाइव कर दिया है। खरीदारी मिलते ही उसे जारी कर दिया जाएगा। यह दो भागों में पहले 2.77 किमी और दूसरा 0.98 किमी है। जिसमें करीब 154 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
हजारों विद्यार्थियों को नहीं मिल पाएगा लाभ
रेलवे रोड व इसके आसपास ही राजकीय महिला कॉलेज, गवर्नमेंट सीनियर सेेकेंडरी स्कूल (बालक एवं बालिका), डीएवी महिला कॉलेज, डीएवी बीएड कॉलेज, डीएवी ब्वायज कॉलेज, एसडी आदर्श स्कूल, एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल मुल्तान, जैन गर्ल्स स्कूल, एसडी गर्ल्स स्कूल आदि कई स्कूल कॉलेज हैं, जिनके हजारों छात्र-छात्राएं रोज आते-जाते हैं लेकिन फ्लाईओवर यदि अभी तक प्रस्तावित स्वरूप पर ही बनाया गया तो इन विद्यार्थियों के लिए यह उल्टा पड़ेगा।
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इन क्षेत्रों से आने वाले ट्रैफिक को भी नहीं होगा खास लाभ
प्रस्तावित स्वरूप पर फ्लाईओवर बनता है तो घोघड़ीपुर से आने वाले ट्रैफिक को फायदा नहीं होगा। इसी तरह सदर बाजार को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा। रमेश नगर, इब्राहिम मंडी और सुभाष कॉलोनी आदि की आबादी को भी इसका कोई खास लाभ नहीं मिल पाएगा।
फ्लाईओवर का प्रस्तावित स्वरूप भले ही लोगों को पसंद न आ रहा हो लेकिन यदि इसका स्वरूप बदल दिया जाता है तो फ्लाईओवर एक बड़ी आबादी और ट्रैफिक के लिए कई गुना बेहतर साबित हो सकता है। इसका एक भाग यानी जो हरियाणा नर्सिंग होम सेक्टर 13 से शुरू होकर खालसा कॉलेज तक प्रस्तावित है, इसे थोड़ा छोटा करना होगा। इसे सेक्टर 13-14 के डिवाइडिंग रोड से शुरू करके खालसा कॉलेज के बजाय रेलवे रोड फिश मार्केट या फिर चर्च के आसपास उतार दिया जाए तो इसका फायदा रेलवे रोड के अधिकांश स्कूल कॉलेजों के विद्यार्थियों, शिक्षकों के साथ घोघड़ीपुर से आने वाले ट्रैफिक और आसपास की विभिन्न कॉलोनियों को मिल सकेगा। जब इतनी बड़ी धनराशि हरियाणा सरकार खर्च कर रही है तो उसे जनोपयोगी बनाया जाना आवश्यक है।
-प्रो.जोगेंद्र मदान, शहरी भूगोलवेत्ता सीएचडी सिटी करनाल
यूं तो व्यापारी नहीं चाहते कि यह फ्लाईओवर बने यदि बनाया जाना ही है तो कुछ ऐसा किया जाए कि इसके निर्माण में समय कम लगे। इसके पिलर्स का कहीं अन्यत्र निर्माण कराया जाए और यहां लाकर खड़ा कर दिया जाए, क्योंकि कई साल तक चलने वाले निर्माण कार्यों से व्यापारी घबराते हैं, क्योंकि इतने दिनों में पूरी मार्केट चौपट हो जाती है। सारे ग्राहक टूट जाते हैं। स्मार्ट सिटी के सीईओ को व्यापारियों की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए।
- श्याम बतरा, पूर्व प्रधान जीटी रोड व्यापार मंडल करनाल
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जब इस फ्लाईओवर की कार्य योजना तैयार की गई तो इसमें संबंधित क्षेत्र के व्यापारियों को बुलाकर उनके साथ विचार विमर्श किया जाना चाहिए था। अभी भी यदि इसे जनोपयोगी बनाना है तो इसमें आंशिक बदलाव करने चाहिए। 154 करोड़ बड़ी धनराशि है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल शहर के लिए बेहतर करना चाहते हैं। इसलिए उनके संज्ञान में मामला लाया जाना चाहिए।
मेहर सिंह, आर्य समाजी करनाल
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अभी मामले में मंथन चल रहा है, हालांकि यह प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी का है, इसलिए नगर निगम का इसमें खास दखल नहीं है, फिर भी निगम इसको लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री के सामने भी बात रखी जाएगी, क्योंकि उनके प्रयासों से ही शहर को स्मार्ट बनाया जा रहा है। जब धनराशि व्यय हो रही है तो अधिकाधिक लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
- राजेश अग्घी, वरिष्ठ महापौर, नगर निगम करनाल
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करनाल। स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा हरियाणा नर्सिंग होम से गुरुनानक खालसा कॉलेज तक और कमेटी चौक से कर्ण पार्क तक टी-आकार में प्रस्तावित फ्लाईओवर का टेंडर ऑनलाइन कर दिया गया है। हालांकि अभी किसी कंपनी ने टेंडर नहीं लिया है। इस पर करीब 154 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। लेकिन जानकारों का मानना है कि स्मार्ट सिटी द्वारा डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च करने के बाद भी इसका लोगों को अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाएगा। यदि इसमें कुछ बदलाव कर दिया जाए और हरियाणा नर्सिंग होम सेक्टर 13-14 के डिवाइडिंग रोड से शुरू करके खालसा कॉलेज के बजाय रेलवे रोड फिश मार्केट या चर्च के आसपास उतार दिया जाए जिससे इसका फायदा एक बड़े क्षेत्र के साथ कई स्कूलों, कॉलेजों के विद्यार्थियों को मिल जाएगा। धनराशि का सदुपयोग भी नजर आने लगेगा।
पिछले साल जब स्मार्ट सिटी के सीईओ ने फ्लाईओवर की कार्ययोजना तैयार की थी तो व्यापारियों ने विरोध जताया था। आशंका जाहिर की थी कि इससे संबंधित क्षेत्र के बाजार को भारी नुकसान पहुंचेगा। लेकिन मामला शहर के विकास से जुड़ा है इसलिए प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी गई। स्मार्ट सिटी के अधिकारी ने बताया कि फ्लाईओवर का टेंडर लाइव कर दिया है। खरीदारी मिलते ही उसे जारी कर दिया जाएगा। यह दो भागों में पहले 2.77 किमी और दूसरा 0.98 किमी है। जिसमें करीब 154 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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हजारों विद्यार्थियों को नहीं मिल पाएगा लाभ
रेलवे रोड व इसके आसपास ही राजकीय महिला कॉलेज, गवर्नमेंट सीनियर सेेकेंडरी स्कूल (बालक एवं बालिका), डीएवी महिला कॉलेज, डीएवी बीएड कॉलेज, डीएवी ब्वायज कॉलेज, एसडी आदर्श स्कूल, एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल मुल्तान, जैन गर्ल्स स्कूल, एसडी गर्ल्स स्कूल आदि कई स्कूल कॉलेज हैं, जिनके हजारों छात्र-छात्राएं रोज आते-जाते हैं लेकिन फ्लाईओवर यदि अभी तक प्रस्तावित स्वरूप पर ही बनाया गया तो इन विद्यार्थियों के लिए यह उल्टा पड़ेगा।
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इन क्षेत्रों से आने वाले ट्रैफिक को भी नहीं होगा खास लाभ
प्रस्तावित स्वरूप पर फ्लाईओवर बनता है तो घोघड़ीपुर से आने वाले ट्रैफिक को फायदा नहीं होगा। इसी तरह सदर बाजार को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा। रमेश नगर, इब्राहिम मंडी और सुभाष कॉलोनी आदि की आबादी को भी इसका कोई खास लाभ नहीं मिल पाएगा।
फ्लाईओवर का प्रस्तावित स्वरूप भले ही लोगों को पसंद न आ रहा हो लेकिन यदि इसका स्वरूप बदल दिया जाता है तो फ्लाईओवर एक बड़ी आबादी और ट्रैफिक के लिए कई गुना बेहतर साबित हो सकता है। इसका एक भाग यानी जो हरियाणा नर्सिंग होम सेक्टर 13 से शुरू होकर खालसा कॉलेज तक प्रस्तावित है, इसे थोड़ा छोटा करना होगा। इसे सेक्टर 13-14 के डिवाइडिंग रोड से शुरू करके खालसा कॉलेज के बजाय रेलवे रोड फिश मार्केट या फिर चर्च के आसपास उतार दिया जाए तो इसका फायदा रेलवे रोड के अधिकांश स्कूल कॉलेजों के विद्यार्थियों, शिक्षकों के साथ घोघड़ीपुर से आने वाले ट्रैफिक और आसपास की विभिन्न कॉलोनियों को मिल सकेगा। जब इतनी बड़ी धनराशि हरियाणा सरकार खर्च कर रही है तो उसे जनोपयोगी बनाया जाना आवश्यक है।
-प्रो.जोगेंद्र मदान, शहरी भूगोलवेत्ता सीएचडी सिटी करनाल
यूं तो व्यापारी नहीं चाहते कि यह फ्लाईओवर बने यदि बनाया जाना ही है तो कुछ ऐसा किया जाए कि इसके निर्माण में समय कम लगे। इसके पिलर्स का कहीं अन्यत्र निर्माण कराया जाए और यहां लाकर खड़ा कर दिया जाए, क्योंकि कई साल तक चलने वाले निर्माण कार्यों से व्यापारी घबराते हैं, क्योंकि इतने दिनों में पूरी मार्केट चौपट हो जाती है। सारे ग्राहक टूट जाते हैं। स्मार्ट सिटी के सीईओ को व्यापारियों की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए।
- श्याम बतरा, पूर्व प्रधान जीटी रोड व्यापार मंडल करनाल
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जब इस फ्लाईओवर की कार्य योजना तैयार की गई तो इसमें संबंधित क्षेत्र के व्यापारियों को बुलाकर उनके साथ विचार विमर्श किया जाना चाहिए था। अभी भी यदि इसे जनोपयोगी बनाना है तो इसमें आंशिक बदलाव करने चाहिए। 154 करोड़ बड़ी धनराशि है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल शहर के लिए बेहतर करना चाहते हैं। इसलिए उनके संज्ञान में मामला लाया जाना चाहिए।
मेहर सिंह, आर्य समाजी करनाल
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अभी मामले में मंथन चल रहा है, हालांकि यह प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी का है, इसलिए नगर निगम का इसमें खास दखल नहीं है, फिर भी निगम इसको लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री के सामने भी बात रखी जाएगी, क्योंकि उनके प्रयासों से ही शहर को स्मार्ट बनाया जा रहा है। जब धनराशि व्यय हो रही है तो अधिकाधिक लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
- राजेश अग्घी, वरिष्ठ महापौर, नगर निगम करनाल