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Karnal News: कंबाइन के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाना है अनिवार्य
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अब धान की कटाई के लिए कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाना है जरूरी
बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम वाले कंबाइन हार्वेस्टरों को नहीं दी जाएगी धान कटाई की अनुमति
- पराली जलाने से दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लिया गया फैसला, प्रदेश भर में आदेश जारी
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल।
अब प्रदेश में धान की कटाई करने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के मालिकों को साथ में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाना होगा। राज्य में किसी भी कंबाइन हार्वेस्टर को बिना सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के धान कटाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। कटाई के बाद खुले खेत में धान की पराली जलाना राज्य और उससे सटे दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है और इस तरह की हरकतें मिट्टी और पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति पहुंचा रही हैं। राज्य में धान की पराली जलाने की समस्या और पर्यावरण पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 31-ए के तहत आदेश जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि धान की कटाई के दौरान जब कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाता है तो धान के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जा सकता है। जिससे किसानों को धान के अवशेषों को जलाए बिना अपनी अगली फसल बोने में सुविधा होती है। जिससे किसान आगजनी नहीं करता है और वायु प्रदूषण नहीं होता है । इसलिए धान की कटाई करने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के मालिक कंबाइन हार्वेस्टर के गाव सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवाना अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने सभी कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों से अनुरोध किया है कि वे सभी अपनी कंबाइन हार्वेस्टर पर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवा लें ताकि उनको सीजन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने सभी किसानों से अपील की है कि वे फसल कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों में आग न लगाएं बल्कि इसको पशु चारे के तौर पर या खेत में ही मिलाकर उपयोग करें।
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बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम वाले कंबाइन हार्वेस्टरों को नहीं दी जाएगी धान कटाई की अनुमति
- पराली जलाने से दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लिया गया फैसला, प्रदेश भर में आदेश जारी
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल।
अब प्रदेश में धान की कटाई करने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के मालिकों को साथ में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाना होगा। राज्य में किसी भी कंबाइन हार्वेस्टर को बिना सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के धान कटाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। कटाई के बाद खुले खेत में धान की पराली जलाना राज्य और उससे सटे दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है और इस तरह की हरकतें मिट्टी और पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति पहुंचा रही हैं। राज्य में धान की पराली जलाने की समस्या और पर्यावरण पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 31-ए के तहत आदेश जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि धान की कटाई के दौरान जब कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाता है तो धान के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जा सकता है। जिससे किसानों को धान के अवशेषों को जलाए बिना अपनी अगली फसल बोने में सुविधा होती है। जिससे किसान आगजनी नहीं करता है और वायु प्रदूषण नहीं होता है । इसलिए धान की कटाई करने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के मालिक कंबाइन हार्वेस्टर के गाव सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवाना अनिवार्य किया गया है।
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उन्होंने सभी कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों से अनुरोध किया है कि वे सभी अपनी कंबाइन हार्वेस्टर पर सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगवा लें ताकि उनको सीजन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने सभी किसानों से अपील की है कि वे फसल कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों में आग न लगाएं बल्कि इसको पशु चारे के तौर पर या खेत में ही मिलाकर उपयोग करें।
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