करनाल लाठीचार्ज मामला: आयोग ने पांच किसानों के दर्ज किए बयान, खून लगे कपड़े साथ लेकर पहुंचा लाठीचार्ज में घायल किसान
करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज में कईं किसान घायल हुए थे। आरोप लगा था कि लाठीचार्ज के कारण एक किसान की मौत हुई है। साथ ही एसडीएम आयुष सिन्हा का एक विवादित वीडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद किसान संगठनों ने पूरे प्रकरण की जांच व मृतक किसान के परिवार और घायल किसानों को मुआवजा की मांग को लेकर करनाल लघु सचिवालय का घेराव किया था। प्रशासन ने किसानों को मुआवजा देने व मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से करवाने की मांग मान ली थी। मामले की जांच अभी जारी है।
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हरियाणा के करनाल में बसताड़ा टोल पर 28 अगस्त को किसानों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में आयोग के चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन अग्रवाल ने बुधवार को किसानों के बयान दर्ज किए। न्यायाधीश की ओर से सात किसानों को बुलाया गया था। इनमें लाठीचार्ज में घायल होने वाले दो किसान और भाकियू प्रदेश अध्यक्ष रतनमान भी शामिल हैं। लेकिन पांच किसान ही बयान दर्ज कराने पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष रतनमान व किसान गुरजंट बयान दर्ज कराने नहीं पहुंच पाए। किसान महेंद्र पूनिया अपने साथ खून लगे कपड़े भी साथ लेकर आए थे, क्योंकि लाठीचार्ज में वह घायल हो गए थे।
आयोग के चेयरमैन ने दोपहर करीब दो बजे तक पांच किसानों के बयान दर्ज किए। गुरुवार व शुक्रवार को भी 6-7 किसानों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद दो नवंबर को गुरनाम सिंह चढूनी के बयान दर्ज होंगे। चेयरमैन ने बताया कि इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बयान दर्ज होंगे।
जिनमें डीसी निशांत कुमार यादव, एसपी गंगाराम पूनिया, एसडीएम आयुष सिन्हा सहित पुलिस कर्मचारी शामिल होंगे। मामले की जांच में करीब चार महीने का समय लगेगा। इसके लिए उन्होंने सरकार को पत्र भी भेजा है। 25 अक्टूबर को 6 किसानों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
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बयान में जिसका नाम आएगा उसे जांच में किया जाएगा शामिल
आयोग के चेयरमैन ने बताया कि किसानों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं फिर प्रशासनिक अधिकारियों के दर्ज किए जाएंगे। इन बयानों में जो भी व्यक्ति सामने आएगा उसे जांच में शामिल किया जाएगा। लाठीचार्ज के जो भी फोटो और वीडियो हैं वह बयान दर्ज कराने वाले किसान व प्रशासनिक अधिकारी आयोग को दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि घटनास्थल का उन्होंने 18 अक्तूबर को ही निरीक्षण कर लिया था। उन्होंने बताया कि जो किसान किसी कारण से बयान दर्ज नहीं करा पाएं हैं उन्हें आयोग की ओर से दोबारा मौका दिया जाएगा।
यह बोले किसान
आयोग की ओर से गांव बड़ौता निवासी महेश पूनिया, महेंद्र पूनिया, सत्यवान पूनिया, गांव हसनपुर निवासी सुनील, गांव बादशाहपुर निवासी हैप्पी ओलख, भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतनमान व गुरजंट को बुलाया गया था। इनमें बड़ौता निवासी महेश पूनिया, महेंद्र पूनिया, सत्यवान पूनिया, गांव हसनपुर निवासी सुनील, गांव बादशाहपुर निवासी हैप्पी ओलख ही बयान दर्ज कराने काछवा रोड स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पहुंचे। हैप्पी ओलख ने करीब डेढ़ घंटे तक बयान दर्ज कराए। ओलख का कहना है कि उसने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है। महेंद्र पूनिया अपने साथ खून लगे कपड़े भी साथ लेकर आए थे, क्योंकि लाठीचार्ज में वह घायल हो गए थे। किसानों का कहना है कि उन्होंने आयोग को जो उनके साथ हुआ और जो कुछ प्रशासन ने किया वह सब बताया है।