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Karnal News: पांच दिन में 125 मरीजों की फिर शुरू करनी पड़ी इनहेलर थेरेपी
Sun, 26 Oct 2025 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 26 Oct 2025 02:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिवाली के बाद बढ़े वायु प्रदूषण से लोगों की सेहत खराब हो रही है। जिला नागरिक अस्पताल की सांस रोग विभाग की ओपीडी में चार दिन में करीब 125 मरीज ऐसे पहुंचे हैं जिन्हें सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर दोबारा इनहेलर थेरेपी शुरू करनी पड़ी है। वहीं, शनिवार को भी ओपीडी में 80 से अधिक मरीज आए, जिनमें अधिकतर अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी पुरानी बीमारियों की चपेट में हैं।
नागरिक अस्पताल में इस समय फोराकॉर्ट और अस्थाकिन दो तरह के इनहेलर मरीजों को दिए जा रहे हैं। सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि दिवाली के बाद हवा में धूल और धुएं की मात्रा बढ़ने से अस्थमा और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों वाले मरीजों की परेशानी अधिक बढ़ गई है। कई मरीजों को सांस फूलने, खांसी और गले में जलन की शिकायत लेकर ओपीडी में आना पड़ रहा है।
अधिकतर मरीजों को फोराकॉर्ट की जरूरत पड़ रही है क्योंकि यह फेफड़ों की सूजन को कम करता है और सांस की नलियों को लंबे समय तक खुला रखता है जो नियमित जरूरत के लिए होता है। इसके अस्थाकिन सिर्फ तत्काल राहत देता है, पर सूजन पर तत्काल असर नहीं करता। ऐसे भी मरीज आ रहे हैं जिन्हें सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर अस्थमा अटैक पड़ने के कारण अस्थाकिन इनहेलर की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में शनिवार को भी करीब 150 मरीज आए जिनमें से केवल 25 से 30 टीबी से जुड़े तो बाकी श्वसन संबंधी बीमारियों से जुड़े मरीज आ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुभव मेहता ने कहा कि अब सामान्य लोगों को भी गले में खराश, सूखी खांसी और भारीपन की शिकायत बढ़ रही है। जो लोग पहले अस्थमा से पीड़ित नहीं थे, उन्हें भी सांस लेने में कठिनाई होने लगी है।
हर दिन 25 इनहेलर की मांग
मुख्य फार्मेसी अधिकारी ममता ने बताया कि इनहेलर की मांग में अचानक वृद्धि हुई है। खासतौर पर दिवाली के बाद से रोजाना 25 के आसपास मरीज इनहेलर लेने के लिए लाइनों में लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो दोनों तरह के इनहेलर की ही पर्चियां हैं लेकिन उनमें ज्यादातर फोराकॉर्ट की खपत है।
सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न महसूस होते ही मरीज को तुरंत अस्पताल आना चाहिए। प्रदूषण से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है। इसलिए धूल और धुएं से दूर रहने के लिए मास्क लगाना और डॉक्टर की ओर से दी गई दवा का नियमित सेवन जरूरी है।
- डॉ. प्रदीप टीबी और श्वास रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल
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करनाल। दिवाली के बाद बढ़े वायु प्रदूषण से लोगों की सेहत खराब हो रही है। जिला नागरिक अस्पताल की सांस रोग विभाग की ओपीडी में चार दिन में करीब 125 मरीज ऐसे पहुंचे हैं जिन्हें सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर दोबारा इनहेलर थेरेपी शुरू करनी पड़ी है। वहीं, शनिवार को भी ओपीडी में 80 से अधिक मरीज आए, जिनमें अधिकतर अस्थमा और फेफड़ों से जुड़ी पुरानी बीमारियों की चपेट में हैं।
नागरिक अस्पताल में इस समय फोराकॉर्ट और अस्थाकिन दो तरह के इनहेलर मरीजों को दिए जा रहे हैं। सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि दिवाली के बाद हवा में धूल और धुएं की मात्रा बढ़ने से अस्थमा और फेफड़ों की पुरानी बीमारियों वाले मरीजों की परेशानी अधिक बढ़ गई है। कई मरीजों को सांस फूलने, खांसी और गले में जलन की शिकायत लेकर ओपीडी में आना पड़ रहा है।
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अधिकतर मरीजों को फोराकॉर्ट की जरूरत पड़ रही है क्योंकि यह फेफड़ों की सूजन को कम करता है और सांस की नलियों को लंबे समय तक खुला रखता है जो नियमित जरूरत के लिए होता है। इसके अस्थाकिन सिर्फ तत्काल राहत देता है, पर सूजन पर तत्काल असर नहीं करता। ऐसे भी मरीज आ रहे हैं जिन्हें सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर अस्थमा अटैक पड़ने के कारण अस्थाकिन इनहेलर की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में शनिवार को भी करीब 150 मरीज आए जिनमें से केवल 25 से 30 टीबी से जुड़े तो बाकी श्वसन संबंधी बीमारियों से जुड़े मरीज आ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुभव मेहता ने कहा कि अब सामान्य लोगों को भी गले में खराश, सूखी खांसी और भारीपन की शिकायत बढ़ रही है। जो लोग पहले अस्थमा से पीड़ित नहीं थे, उन्हें भी सांस लेने में कठिनाई होने लगी है।
हर दिन 25 इनहेलर की मांग
मुख्य फार्मेसी अधिकारी ममता ने बताया कि इनहेलर की मांग में अचानक वृद्धि हुई है। खासतौर पर दिवाली के बाद से रोजाना 25 के आसपास मरीज इनहेलर लेने के लिए लाइनों में लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो दोनों तरह के इनहेलर की ही पर्चियां हैं लेकिन उनमें ज्यादातर फोराकॉर्ट की खपत है।
सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न महसूस होते ही मरीज को तुरंत अस्पताल आना चाहिए। प्रदूषण से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार है। इसलिए धूल और धुएं से दूर रहने के लिए मास्क लगाना और डॉक्टर की ओर से दी गई दवा का नियमित सेवन जरूरी है।
- डॉ. प्रदीप टीबी और श्वास रोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल