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Karnal News: दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना भारत, प्रतिवर्ष 248 मिलियन टन उत्पादन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 01:48 AM IST
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India becomes the world's largest milk producer, producing 248 million tonnes annually
दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत करते डॉ के के इया स्मृति संस्थान
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में शुक्रवार को 22वें दीक्षांत समारोह के शैक्षणिक पखवाड़े के तहत प्रतिष्ठित डॉ. केके इया स्मृति भाषण कार्यक्रम आयोजित हुआ। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक यानी नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन चुका है और देश में प्रतिवर्ष लगभग 248 मिलियन टन दूध का उत्पादन हो रहा है, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि 2014-25 के दौरान डेयरी क्षेत्र में 5.7 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण दूध उत्पादन में 69 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता बढ़कर 485 ग्राम प्रतिदिन तक पहुंच गई है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और भारत की श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन की ओर से शुरू किए गए ऑपरेशन फ्लड को दिया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. केके इया को दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।
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22 दुग्ध व 240 जिला संघ कर रहीं कार्य

डॉ. कृष्णन ने कहा कि देश में डेयरी क्षेत्र का व्यापक नेटवर्क है, जिसमें 22 दुग्ध संघ, 240 जिला संघ और करीब 2.30 लाख गांवों में फैली 1.5 लाख से अधिक सहकारी समितियां कार्य कर रही हैं। इनसे लगभग 1.8 करोड़ किसान जुड़े हैं, जिनमें 35 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
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जीडीपी में करीब पांच प्रतिशत योगदान
डॉ. कृष्णन ने कहा कि डेयरी क्षेत्र देश की जीडीपी में करीब पांच प्रतिशत योगदान देता है और आठ करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। फसल खराब होने, सूखा, बाढ़ और बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियों में डेयरी किसानों को स्थिर आय प्रदान करती है।


600 से अधिक संगठनों को किया प्रोत्साहित
उन्होंने बताया कि डेयरी अवसंरचना विकास कोष और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष से देशभर में डेयरी प्रसंस्करण क्षमता, दूध पाउडर संयंत्र और थोक दूध कूलर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही 600 से अधिक दुग्ध उत्पादक संगठनों को भी प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने भविष्य में जीनोमिक्स आधारित गर्मी सहनशील नस्लों के विकास, मीथेन उत्सर्जन कम करने वाले चारे, आईटी आधारित पशु स्वास्थ्य निगरानी जैसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
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