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Karnal News: निर्दलीय पूर्व पार्षद बिगाड़ सकते हैं सियासी खेले
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गगन तलवार
करनाल। नामांकन प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही निकाय चुनाव की जीत के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है।
भाजपा और कांग्रेस की ओर से अपनी-अपनी रणनीति के आधार पर जीत का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस बार करनाल नगर निगम चुनाव में कुछ वार्डों में निर्दलीय पार्टियों का खेल बिगाड़ सकते हैं।
क्योंकि यहां पर पूर्व पार्षद ही निर्दलीय मैदान में हैं। अपने ही दल में अनदेखी के बाद वे आजाद मैदान में उतरे हैं। ऐसे में इन्हें अपने कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों के बल पर तो दलों के उम्मीदवारों को संगठन की नीतियों के आधार पर जीत मिलने का भरोसा है, लेकिन जनता का भरोसा कौन जीत पाएगा, यह स्थिति तो 12 मार्च को चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगी।
करनाल नगर निगम के 20 वार्डों में आठ वार्ड ऐसे हैं, जहां पर पूर्व पार्षद या उनके परिवार के सदस्य निर्दलीय मैदान में उतरकर भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों को टक्कर दे रहे हैं। वार्ड-13, 14, 15 और 18 में तो निर्दलियों की भाजपा या कांग्रेस प्रत्याशी के साथ सीधी टक्कर है। भाजपा की ओर से सभी 20 वार्डों में प्रत्याशी घोषित किए गए हैं, इनमें से 12 में नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि विस चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने वाले नेताओं को इस चुनावी मैदान से बाहर रखा है।
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इधर, कांग्रेस की स्थिति यह है कि पार्टी ने 15 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं, इसके अलावा पांच में समर्थन का एलान किया। यहां कांग्रेस समर्थित निर्दलीय भाजपा के खेमे में जा बैठे हैं।
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करनाल। नामांकन प्रक्रिया संपन्न होने के साथ ही निकाय चुनाव की जीत के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है।
भाजपा और कांग्रेस की ओर से अपनी-अपनी रणनीति के आधार पर जीत का दावा किया जा रहा है, लेकिन इस बार करनाल नगर निगम चुनाव में कुछ वार्डों में निर्दलीय पार्टियों का खेल बिगाड़ सकते हैं।
क्योंकि यहां पर पूर्व पार्षद ही निर्दलीय मैदान में हैं। अपने ही दल में अनदेखी के बाद वे आजाद मैदान में उतरे हैं। ऐसे में इन्हें अपने कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों के बल पर तो दलों के उम्मीदवारों को संगठन की नीतियों के आधार पर जीत मिलने का भरोसा है, लेकिन जनता का भरोसा कौन जीत पाएगा, यह स्थिति तो 12 मार्च को चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगी।
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करनाल नगर निगम के 20 वार्डों में आठ वार्ड ऐसे हैं, जहां पर पूर्व पार्षद या उनके परिवार के सदस्य निर्दलीय मैदान में उतरकर भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों को टक्कर दे रहे हैं। वार्ड-13, 14, 15 और 18 में तो निर्दलियों की भाजपा या कांग्रेस प्रत्याशी के साथ सीधी टक्कर है। भाजपा की ओर से सभी 20 वार्डों में प्रत्याशी घोषित किए गए हैं, इनमें से 12 में नए चेहरों को मौका दिया गया है, जबकि विस चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने वाले नेताओं को इस चुनावी मैदान से बाहर रखा है।
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इधर, कांग्रेस की स्थिति यह है कि पार्टी ने 15 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं, इसके अलावा पांच में समर्थन का एलान किया। यहां कांग्रेस समर्थित निर्दलीय भाजपा के खेमे में जा बैठे हैं।