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बढ़ा रुझान, 90 प्रतिशत तक विद्यार्थी हिंदी माध्यम में करने लगे पढ़ाई
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114: करतार सिंह
गगन तलवार
करनाल। समय के साथ हिंदी के प्रति नजरिया भी बदला है। बदलाव ऐसा कि इग्नू जैसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले 85 से 90 प्रतिशत तक विद्यार्थी हिंदी माध्यम में अपना कोर्स कर रहे हैं। पिछले पांच साल में हिंदी के प्रति यह रुझान तेजी से बढ़ा है। यही नहीं हिंदी विषय से एमए करने वालों की संख्या में भी ढाई गुना तक इजाफा हुआ है। पुलिस व बिजली निगम से रिटायर्ड कर्मचारी भी अब बुढ़ापे में एमए हिंदी की पढ़ाई कर रहे हैं।
करनाल स्थित इग्नू के क्षेत्रीय कार्यालय से प्रदेश भर के युवा 277 स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्स में पढ़ाई कर रहे हैं। 2017 से लेकर 2021 तक इन कोर्स में कुल 203323 दाखिले हुए इनमें से 177942 यानी 87.51 प्रतिशत विद्यार्थी हिंदी माध्यम में पढ़ाई कर रहे हैं। अकेले 2021-22 सत्र की ही बात करें तो दाखिल हुए कुल 49465 विद्यार्थियों में से 42486 हिंदी माध्यम में पढ़ाई कर रहे हैं। इधर, सिर्फ एमए हिंदी कोर्स में हुए दाखिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें काफी तेजी से विद्यार्थी बढ़े हैं। 2017 में जहां प्रदेश भर से केवल 267 विद्यार्थी ही इग्नू से एमए हिंदी कर रहे थे, 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 647 तक पहुंच गया है। 2022 सत्र की दाखिला प्रक्रिया शुरू है, अब तक 195 विद्यार्थी दाखिला ले चुके हैं। ब्यूरो
महज तीन कॉलेजों में है एमए हिंदी
करनाल में सरकारी और एडेड मिलाकर कुल 15 कॉलेजों में से महज तीन में ही एमए हिंदी है। जिनकी कुल सीट 140 हैं। इनमें से दो कॉलेजों (जीवन चानन महिला कॉलेज और राजकीय महिला कॉलेज रेलवे रोड) की कुल 90 सीटें महिला कॉलेजों की हैं। यानी इन पर केवल बेटियां ही पढ़ाई करती हैं। जबकि अन्य 50 सीट (को एजूकेशन) दयाल सिंह कॉलेज की हैं। यह सभी सीटें हर साल भर जाती हैं। इससे अलग एमए हिंदी करने वाले विद्यार्थी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय या इग्नू की दूरवर्ती शिक्षा से पढ़ाई करते हैं।
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इग्नू से कितने विद्यार्थी हिंदी माध्यम में पढ़ रहे
वर्ष दाखिले हिंदी माध्यम
2017 22063 19154
2018 31416 26567
2019 46453 41099
2020 53926 48636
2021 49465 42486
कुल 203323 177942
--
एमए हिंदी में हुए दाखिले
वर्ष एमए हिंदी
2017 267
2018 367
2019 509
2020 529
2021 647
2022 195 (दाखिला प्रक्रिया अभी जारी है)
पहले कम था रुझान, अब बढ़ी संख्या
हिंदी माध्यम में दाखिलों का रुझान काफी बढ़ा है। पिछले पांच साल के दाखिलों पर नजर डालें तो 87.51 विद्यार्थियों ने हिंदी माध्यम में कोर्स किए। पहले यह आंकड़ा कम था। दो साल पहले 90 प्रतिशत तक विद्यार्थी हिंदी माध्यम में पढ़े।
- डॉ. धर्मपाल, निदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय इग्नू करनाल
रिटायरमेंट के बाद हिंदी में पीएचडी करने का सपना
जेई के 78 वर्षीय पिता कर रहे एमए हिंदी
सेक्टर-13 अर्बन अस्टेट निवासी 78 वर्षीय आरके चौहान 2009 में बिजली बोर्ड से चालक के पद से रिटायर हुए थे। अब वे एमए हिंदी में पढ़ाई कर रहे हैं। 2016 में अखबार में 80 साल के जागीर सिंह द्वारा स्नातक की पढ़ाई पूरी करने पर फोटो छपा था। उनसे प्रभावित होकर उन्होंने पढ़ाई करने की ठानी और इग्नू में दाखिला ले लिया। जिस महकमे से वे चालक के पद से रिटायर्ड हैं, उसी में बेटा विक्रम चौहान जेई है।
विभाग में हिंदी में किया कार्य, अब करेंगे पीएचडी
कैथल की राधा स्वामी कॉलोनी निवासी 64 वर्षीय करतार सिंह 31 साल की सेवाओं के बाद 2016 में जेल हवलदार के पद से रिटायर हुए। गत वर्ष बीए की पढ़ाई के बाद उन्होंने एमए हिंदी में दाखिला लिया है। चंडीगढ़ कॉलेज में कार्यरत प्राध्यापक बेटे राजपाल ने पढ़ने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि पोती उनके पास बैठकर जब पढ़ती थी, तो वे भी किताबें पढ़ने में रुचि लेते थे। पुलिस की नौकरी के दौरान उन्होंने हिंदी में कार्य किया, अब वे हिंदी में पीएचडी करना चाहते हैं।
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करनाल। समय के साथ हिंदी के प्रति नजरिया भी बदला है। बदलाव ऐसा कि इग्नू जैसे राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले 85 से 90 प्रतिशत तक विद्यार्थी हिंदी माध्यम में अपना कोर्स कर रहे हैं। पिछले पांच साल में हिंदी के प्रति यह रुझान तेजी से बढ़ा है। यही नहीं हिंदी विषय से एमए करने वालों की संख्या में भी ढाई गुना तक इजाफा हुआ है। पुलिस व बिजली निगम से रिटायर्ड कर्मचारी भी अब बुढ़ापे में एमए हिंदी की पढ़ाई कर रहे हैं।
करनाल स्थित इग्नू के क्षेत्रीय कार्यालय से प्रदेश भर के युवा 277 स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्स में पढ़ाई कर रहे हैं। 2017 से लेकर 2021 तक इन कोर्स में कुल 203323 दाखिले हुए इनमें से 177942 यानी 87.51 प्रतिशत विद्यार्थी हिंदी माध्यम में पढ़ाई कर रहे हैं। अकेले 2021-22 सत्र की ही बात करें तो दाखिल हुए कुल 49465 विद्यार्थियों में से 42486 हिंदी माध्यम में पढ़ाई कर रहे हैं। इधर, सिर्फ एमए हिंदी कोर्स में हुए दाखिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें काफी तेजी से विद्यार्थी बढ़े हैं। 2017 में जहां प्रदेश भर से केवल 267 विद्यार्थी ही इग्नू से एमए हिंदी कर रहे थे, 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 647 तक पहुंच गया है। 2022 सत्र की दाखिला प्रक्रिया शुरू है, अब तक 195 विद्यार्थी दाखिला ले चुके हैं। ब्यूरो
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महज तीन कॉलेजों में है एमए हिंदी
करनाल में सरकारी और एडेड मिलाकर कुल 15 कॉलेजों में से महज तीन में ही एमए हिंदी है। जिनकी कुल सीट 140 हैं। इनमें से दो कॉलेजों (जीवन चानन महिला कॉलेज और राजकीय महिला कॉलेज रेलवे रोड) की कुल 90 सीटें महिला कॉलेजों की हैं। यानी इन पर केवल बेटियां ही पढ़ाई करती हैं। जबकि अन्य 50 सीट (को एजूकेशन) दयाल सिंह कॉलेज की हैं। यह सभी सीटें हर साल भर जाती हैं। इससे अलग एमए हिंदी करने वाले विद्यार्थी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय या इग्नू की दूरवर्ती शिक्षा से पढ़ाई करते हैं।
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इग्नू से कितने विद्यार्थी हिंदी माध्यम में पढ़ रहे
वर्ष दाखिले हिंदी माध्यम
2017 22063 19154
2018 31416 26567
2019 46453 41099
2020 53926 48636
2021 49465 42486
कुल 203323 177942
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एमए हिंदी में हुए दाखिले
वर्ष एमए हिंदी
2017 267
2018 367
2019 509
2020 529
2021 647
2022 195 (दाखिला प्रक्रिया अभी जारी है)
पहले कम था रुझान, अब बढ़ी संख्या
हिंदी माध्यम में दाखिलों का रुझान काफी बढ़ा है। पिछले पांच साल के दाखिलों पर नजर डालें तो 87.51 विद्यार्थियों ने हिंदी माध्यम में कोर्स किए। पहले यह आंकड़ा कम था। दो साल पहले 90 प्रतिशत तक विद्यार्थी हिंदी माध्यम में पढ़े।
- डॉ. धर्मपाल, निदेशक, क्षेत्रीय कार्यालय इग्नू करनाल
रिटायरमेंट के बाद हिंदी में पीएचडी करने का सपना
जेई के 78 वर्षीय पिता कर रहे एमए हिंदी
सेक्टर-13 अर्बन अस्टेट निवासी 78 वर्षीय आरके चौहान 2009 में बिजली बोर्ड से चालक के पद से रिटायर हुए थे। अब वे एमए हिंदी में पढ़ाई कर रहे हैं। 2016 में अखबार में 80 साल के जागीर सिंह द्वारा स्नातक की पढ़ाई पूरी करने पर फोटो छपा था। उनसे प्रभावित होकर उन्होंने पढ़ाई करने की ठानी और इग्नू में दाखिला ले लिया। जिस महकमे से वे चालक के पद से रिटायर्ड हैं, उसी में बेटा विक्रम चौहान जेई है।
विभाग में हिंदी में किया कार्य, अब करेंगे पीएचडी
कैथल की राधा स्वामी कॉलोनी निवासी 64 वर्षीय करतार सिंह 31 साल की सेवाओं के बाद 2016 में जेल हवलदार के पद से रिटायर हुए। गत वर्ष बीए की पढ़ाई के बाद उन्होंने एमए हिंदी में दाखिला लिया है। चंडीगढ़ कॉलेज में कार्यरत प्राध्यापक बेटे राजपाल ने पढ़ने के लिए प्रेरित किया। क्योंकि पोती उनके पास बैठकर जब पढ़ती थी, तो वे भी किताबें पढ़ने में रुचि लेते थे। पुलिस की नौकरी के दौरान उन्होंने हिंदी में कार्य किया, अब वे हिंदी में पीएचडी करना चाहते हैं।

113: आर के चौहान