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Karnal News: चार वर्षों में 1903 ने नेत्र, 120 ने देहदान का लिया संकल्प

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 09:00 AM IST
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In four years, 1903 donated eyes, 120 pledged to donate their bodies.
लखविंद्र सिंह ने नेत्र दान करने का संकल्प लिया साथ में नागरिक अस्पताल की नेत्र दान सलाहकार सुमन।
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। अंगदान महादान है। इससे दूसरों की जिंदगी बचाई जा सकती है। हर वर्ष 27 नवंबर को राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक वर्ष इस दिन लोगों को अंगदान करने के लिए प्रेरित करता है, चूंकि अंगदान से जहां कई जिंदगियां बचती हैं, वहीं बेहतर डॉक्टर भी तैयार होते हैं।
कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के निदेशक प्रो. जगदीश चंद्र दुरेजा ने बताया कि एक बेहतर डॉक्टर बनने के लिए मानव शरीर की संरचना को समझना जरूरी होता है, चूंकि चिकित्सा विज्ञान में पढ़ाई के लिए मृत्यु के बाद शरीर का दान आवश्यक हो जाता है। ऐसे में देश को बेहतर डॉक्टर बनाने में मानव शरीर का अहम योगदान है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल मानव शरीर पूर्ण नहीं होता। मानव शरीर की संरचना समझने के लिए मृत शरीर होना जरूरी है। इसके साथ-साथ अगर ट्रांसप्लांट के योग्य अंग हो तो उनसे कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। विश्व अंगदान दिवस का उद्देश्य इंसान को मृत्यु के बाद अंगदान या देह दान की मात्र प्रतिज्ञा दिलाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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छह साल में 120 लोगों ने लिया देह दान का संकल्प
केसीजीएमसी के निदेशक प्रो. जगदीश चंद्र दुरेजा ने बताया कि बहुत कम ऐसे दानवीर होते हैं, जो शरीर या अंगदान करते हैं। शरीर दान दिवस पर लोगों से अपील है कि यह महादान समाज कल्याण के लिए करें। साथ ही अपने परिवार से आग्रह करें कि मृत्यु के बाद शरीर चिकित्सा विज्ञान संस्था को दान कर दिया जाए। पिछले छह साल में 120 लोगों ने देह दान का फार्म भरा है। पिछले छह साल में 16 लोगों ने देह दान किया है। इससे लगता है कि अब लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
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जिला नागरिक अस्पताल की नेत्रदान सलाहकार सुमन ने बताया कि अंगदान की बजाय नेत्र दान करने में लोग सबसे आगे हैं। पिछले साढ़े चार साल में जिला नागरिक अस्पताल में 1903 लोगों ने नेत्र दान का फार्म भरा है। इनमें से करीब 65 लोग नेत्र दान कर चुके हैं।
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