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अवैध गर्भपात पर कसेगा शिकंजा

Wed, 27 Nov 2013 11:56 PM IST
अमर उजाला, कैथ्ाल
अमर उजाला, कैथ्ाल Updated Wed, 27 Nov 2013 11:56 PM IST
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illegal abortion
कैथल में एमटीपी एक्ट 1971 के तहत गर्भपात करवाने के लिए पीएनडीटी कमेटी की तर्ज पर एक जिलास्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। जो जिले भर में गर्भपात करने वाले सेंटरों को मान्यता प्रदान करेगी। यदि कोई सेंटर बिना मान्यता के गर्भपात करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ एमटीपी एक्ट 1971 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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सीएमओ की अध्यक्षता में काम करेगी कमेटी
जिलास्तर पर गठित कमेटी में सीएमओ की अध्यक्षता में एक महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक, एक सर्जन, एक आईएमए सदस्य, एनजीओ प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। यह कमेटी अस्पताल संचालक की ओर से आवेदन करने पर उसके आवेदन पर विचार कर फैसला लेगी। जिसमें अस्पताल में आपात स्थिति में गर्भपात के लिए आवश्यक मशीनों, चिकित्सकों की योग्यता सहित आवश्यक उपकरण की जांच कर गर्भपात की अनुमति के लिए लाइसेंस जारी करेगी।
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जिले में इस समय 14 को अनुमति
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस समय 14 मान्यता प्राप्त केंद्र हैं, जहां एक्ट के अनुसार गर्भपात किया जा सकता है। इनमें सिंघानिया नर्सिंग होम, गर्ग आई एंड मेटरनिटी अस्पताल, मित्तल सर्जीकल एंड मैटरनिटी, कीर्ति अस्पताल, सूद अस्पताल, जैन अस्पताल, जीवन ज्योति अस्पताल, छतवाल अस्पताल, चानना अस्पताल चीका, संजीवनी अस्पताल, जिंदल अस्पताल, आर्या मेटरनिटी, शाह अस्पताल एवं आशीर्वाद अस्पताल को ही मंजूरी मिली हुई है। इसके अलावा जिले भर में 23 सरकारी प्रसूति केंद्रों पर भी गर्भपात किया जा सकता है।
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विचार कर लाइसेंस जारी किए जाएंगे
सिविल सर्जन डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने कहा कि बीस सप्ताह की गर्भावस्था तक गर्भपात करवाया जा सकता है। इसके लिए एमटीपी एक्ट 1975 बनाया गया है। अब तक गर्भपात के लिए जिले में कई केंद्रों को मान्यता दी गई थी, लेकिन विभागीय आदेशानुसार अब इस पर निगरानी के लिए जिलास्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। स्टेट नोडल ऑफिसर डा. अल्का गर्ग के निर्देशानुसार यह कमेटी नए आने वाले आवेदनों पर विचार-विमर्श करते हुए उनका रजिस्ट्रेशन करेगी।


विभाग की ओर से स्वीकृति के बिना यदि कोई गर्भपात करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ-साथ सभी केंद्रों से मासिक रिपोर्ट भी मंगवाई जाएगी कि वहां महीने में कितने मरीजों का एमटीपी किया गया। पहले से स्वीकृत केंद्रों को भी अपने रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण करवाना होगा।
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