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टीबी मरीज की जानकारी नहीं दी तो निजी अस्पताल संचालक को हो सकती है दो साल की सजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 02:32 AM IST
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If the information about the TB patient is not given, the private hospital operator may be sentenced to two years
राकेश चौहान
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करनाल। टीबी के मरीज की जानकारी न देने पर अब प्राइवेट अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिसमें प्राइवेट अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। वहीं अस्पताल संचालक को दो साल की सजा भी हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में सभी प्राइवेट अस्पताल संचालकों को यह निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य टीबी को जड़ से खत्म करना है।
केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें टीबी के मरीजों को खोज रही है। ताकि उनको बेहतर इलाज देकर ठीक किया जा सके।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में अब तक टीबी के 2632 मरीजों को खोजा गया है। इनमें से 1846 का इलाज चल रहा है। बाकी मरीज ठीक हो चुके हैं। इस साल स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के 4800 मरीजों को खोजने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों ने बताया कि टीबी के मरीज का निक्षय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है, इसके बाद वह मरीज देश में कहीं से भी दवा ले सकता है।
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प्राइवेट अस्पताल इसलिए नहीं देते टीबी मरीज की जानकारी
सरकार की ओर से टीबी के मरीज का इलाज निशुल्क करने की व्यवस्था है। ऐसे में मरीज को दवाइयां भी सरकार की ओर से ही दी जाती हैं। जब कोई मरीज प्राइवेट अस्पताल में जाता है तो वह उस मरीज की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को इस कारण नहीं देते, क्योंकि फिर वह मरीज सरकारी से ही निशुल्क इलाज कराने लगता है, उस प्राइवेट अस्पताल से दवाइयां नहीं लेता। लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।
दो महीने चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो सितंबर से एक नवंबर तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत संभावित टीबी के मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है। इससे अलग जिन्हें दो सप्ताह से ज्यादा खांसी है, वह अपने नजदीकी पीएचसी, सीएचसी में जाकर जांच करा सकते हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच निशुल्क है।

टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी
- शाम के समय बुखार आना
- खांसते समय बलगम में खून आना
- छाती में दर्द होना या सांस फूलना
- गर्दन या बगल में गांठें
- भूख न लगना और वजन कम होना
टीबी के लक्षण मिलने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी के मरीज का इलाज निशुल्क है। यदि प्राइवेट अस्पताल संचालक टीबी के मरीज की जानकारी छिपाता है तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है और दो साल की सजा भी हो सकती है।
-डॉ. सिम्मी कपूर, उप सिविल सर्जन, करनाल
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