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पिता का साया छूटा तो परिवार को संकट से उबारा, भाई-बहनों का जीवन संवारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 02:15 AM IST
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If the father's shadow left, the family got out of trouble, saved the lives of brothers and sisters
103-अपनी दोनों छोटी बहनों और भाई सुरेंद्र व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अनीता कुंडू।
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। दृढ़ संकल्प और लगन से मेहनत की जाए तो विषम परिस्थितियों में भी सफलता जरूर मिलती है। यह साबित कर दिखाया पर्वतारोही अनीता कुंडू ने। 13 साल की उम्र में सिर से पिता का साया उठ गया तो परिवार और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेवारी भी कंधों पर आ गई, लेकिन मां का साथ और पिता की प्रेरणा से उन्होंने छोटे भाई-बहनों के जीवन में उजियारा लाने का काम किया। पर्वतारोही अनीता कुंडू इस समय हरियाणा पुलिस में इंस्पेक्टर हैं।
करनाल में तैनात अनीता कुंडू मूल रूप से हिसार की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि 2001 में पिता के निधन के बाद परिवार पर संकट आ गया। आमदनी के साधन खत्म हो गए। उन्होंने मां राजपति देवी के साथ मिलकर दूध बेचना और खेती करनी शुरू कर दी। जैसे-तैसे पैसे जुटने शुरू हो गए। बड़े संघर्ष के बाद उसने चारों बहन-भाइयों को अच्छा तरह पढ़ाया, जो कि आज अपने पैरों पर खड़े हैं। 2008 में वह खुद हरियाणा पुलिस में एसई के पद पर भर्ती हुईं। अपने से आठ साल छोटे भाई सुरेंद्र का मार्गदर्शन किया जो आज पशु चिकित्सक के रूप में अस्पताल चला रहे हैं। एक छोटी बहन सुशील स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेवाएं दे रही है। सबसे छोटी बहन रविंद्र भी पुलिस में एएसआई है। मेहनत के बल पर अनीता कुंडू को राष्ट्रपति की ओर से तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2019 और कल्पना चावला पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। नेपाल और चीन दोनों ही रास्तों से माउंट एवरेस्ट फतह करने का गौरव प्राप्त है। उनका कहना है कि दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। ब्यूरो
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अनीता कुंडू की उपलब्धियां
- 2010 में नंगा पर्वत (नंगा पीक) पर चढ़ाई की।
- जुलाई 2011 में सतोपंथ चोटी पर चढ़ाई की।
- अक्तूबर 2011 में माउंट कोकस्टेट लेह लद्दाख चीन बॉर्डर फतह।
- 18 मई 2013 को नेपाल की ओर से माउंट एवरेस्ट फतह किया।
- 2015 में चीन की ओर से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन भूकंप से यह प्रयास विफल हो गया।
- 21 मई 2017 को एक और प्रयास किया तो माउंट एवरेस्ट की चोटी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सफल रहीं।
- 2021 में सात महाद्वीपों में से प्रत्येक के सबसे ऊंचे शिखर पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया।
पिता के जाते ही छूटे खेल और टूट गए सपने
अनीता ने बताया कि पिता को खोने के बाद रिश्तेदारों ने लगातार शादी करने के लिए मजबूर किया, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को नहीं माना। पिता जी चाहते थे कि वह अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज बने। उनका सपना साकार करने के लिए एक साल पहले बॉक्सिंग क्लास शुरू की थी पर उनके जाने के बाद बहुत कुछ बदल गया। बाद में जब हरियाणा पुलिस में नौकरी मिली तो जिंदगी पटरी पर लौटने लगी। पुलिस में प्रशिक्षण के दौरान ही उन्हें पर्वतारोहण में रुचि हुई। उन्होंने बताया कि जब रॉक क्लाइंबिंग शुरू की तो लोगों ने उसे यह कहकर हतोत्साहित किया कि यह खेल महिलाओं के लिए नहीं है, लेकिन मैंने किसी की परवाह नहीं की। अब पर्वतारोही के नाम से ही पहचान है।
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