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जाम का हाईवे : 50 किमी के लिए महज एक रिकवरी वैन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2019 02:21 AM IST
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highway problem in karnal
highway problem in karnal
नेशनल हाईवे नंबर-44, बसताड़ा टोल प्लाजा से कुरुक्षेत्र सीमा समानाबाहु तक अप एंड डाउन 90 किलोमीटर की ग्राउंड रिपोर्ट, 52 जगह सड़क किनारे वाहन खड़े मिले, इनमें कई वाहन तो हादसा ग्रस्त थे। इसके अलावा सर्विस लेन समेत 28 जगह लावारिस पशु बैठे मिले। यह हालात हैं उस हाईवे के जो उत्तरी सीमांत क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख को दिल्ली से जोड़ती है। 50 किलोमीटर में किसी दुर्घटना के समय तत्काल जाम से निजात दिलाने के लिए केवल एक रिकवरी वैन का सहारा है। किसी छोर पर हादसा होता है तो वहां पहुंचने से पहले रिकवरी वैन स्वयं जाम में फंस जाती है। इस टोल से जनवरी तक 1700 करोड़ से अधिक का राजस्व वसूला जा चुका है। इन कारणों से होने वाले हादसों के कारण विशेषज्ञों का कहना है कि नेशनल हाईवे-44 मौत का हाईवे बनता जा रहा है। लोगों की सुविधा के लिए बनाया हाईवे वर्तमान में टोल और एनएचएआई की अनदेखी के कारण मुसीबतों का कारण बनता जा रहा है।
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नेशनल हाईवे-44 पर सड़क के गड्ढों के अलावा बीच रास्ते खड़े खराब और भारी वाहनों के अलावा लावारिस पशु भी हादसों की बड़ी वजह हैं। अमर उजाला के संवाददाता ने बुधवार को बसताड़ा टोल प्लाजा से कुरुक्षेत्र सीमा समानाबाहु तक अप एंड डाउन 90 किलोमीटर का सफर तय कर हालात जाने तो 52 जगह सड़क किनारे वाहन खड़े मिले। इनमें कई वाहन तो हादसा ग्रस्त थे। इसके अलावा सर्विस लेन समेत 28 जगह लावारिस पशु बैठे मिले।
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हेल्पलाइन नंबर तो है, लेकिन कैसे पता चले
नेशनल हाईवे पर दुर्घटना होने पर मदद के लिए एनएचएआई की ओर से हेल्पलाइन नंबर 18001801101 जारी किया गया है। लेकिन लोगों को यह नंबर कैसे पता चले, इसकी भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। 90 किलोमीटर के सफर में एक-दो जगह को छोड़कर कहीं भी यह नंबर लिखा दिखाई नहीं दिया।
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हेल्पलाइन नंबर डायल किजिए, मदद की उम्मीद नहीं
एनएचएआई के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने के बाद भी मदद मिलने की कोई उम्मीद कम ही है। क्योंकि एक ही रिकवरी वैन का बसताड़ा टोल प्लाजा से समानाबाहु तक के 50 किलोमीटर के हाईवे का एरिया है। तो वहीं घायलों को अस्पताल पहुंचने के लिए भी महज दो एंबुलेंस लगाई गई हैं। मदद मांगने के बाद इतने लंबे एरिया में गाड़ी कब पहुंचेगी इसके लिए कुछ नहीं कह सकते।
चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे हालात
नेशनल हाईवे के यह खराब हालात तब हैं, जब जिला प्रशासन, रोड सेफ्टी कमेटी के चेयरमैन एवं डीसी द्वारा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आरओ समेत अन्य उच्च अधिकारियों को लिखा जा चुका है। बावजूद इसके हालात की बजाय और खराब हो रहे हैं।
क्या सिर्फ टोल वसूलने की ही जिम्मेवारी
नेशनल हाईवे पर आए दिन हादसों में लोगों की जान जा रही है। रोड सेफ्टी विशेषज्ञों का कहना है कि क्या सिर्फ टोल वसूलना ही टोल कंपनी की जिम्मेवारी है। जबकि नियमों के अनुसार उन्हें सुरक्षित सफर देने के अलावा कई तरह की सुविधाएं लोगों को देनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। प्रशासन को केंद्र सरकार को इन पर कार्रवाई के लिए लिखना चाहिए।
30 प्रतिशत हादसों में खड़े वाहन और पशु कारण
रोड सेफ्टी विशेषज्ञ तेजपाल और एडवोकेट संदीप का कहना है कि नेशनल हाईवे पर खड़े वाहनों और लावारिस पशुओं के कारण 30 प्रतिशत हादसे होते हैं। एनएच पर 70 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन दौड़ते हैं। अचानक सामने वाहन व पशु आने से हादसा होता है क्योंकि ब्रेक नहीं लग पाते। रात में इससे 80 प्रतिशत हादसा होने के ज्यादा चांस रहते हैं। अंधेरा इस समय का बड़ा कारण है।

हमारे पास एक ही रिकवरी वैन है। इससे हम हादसे के दौरान रूट क्लीयर करते हैं। कोशिश रहती है कि जल्दी से जल्दी घटनास्थल पर वैन पहुंच जाए। जल्द ही हालात दुरुस्त कर लिए जाएंगे। - सन्नी शर्मा, मैनेजर, एनएचएआई बसताड़ा टोल।
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