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गर्भपात की सूचना पर छापा, मृत डॉक्टर के नाम चल रहा था अस्पताल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 02:26 AM IST
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health depart raid, hospital is orzaniging on the name of died doctor
312:तरावड़ी के केसरीनंदन अस्तपाल में जहाँ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने की कार्यवाही।
संवाद न्यूज एजेंसी
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तरावड़ी। शहर के केसरीनंदन अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गर्भपात की सूचना पर छापा मारा। जहां टीम को गर्भपात से संबंधित कोई किट नहीं मिली लेकिन अस्पताल के दस्तावेज जांचे तो पता चला कि यह अस्पताल उस डॉक्टर की डिग्री पर चल रहा था, जिसकी कई वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। यानी मृत डॉक्टर की डिग्री पर अस्पताल चल रहा था। टीम ने अस्पताल की संचालक आशा से डिग्री के बारे में पूछा तो उन्होंने बीएएमएस की डिग्री दिखाई। जब उसकी जांच की गई तो वह भी फर्जी मिली। सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक चली कार्रवाई के बाद जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुछ दस्तावेज, औजार व दवाइयां कब्जे में ली वहीं अस्पताल की संचालक व उसके सहयोगी को पुलिस के हवाले कर दिया।
वीरवार सुबह करीब 11 बजे डिप्टी सीएमओ शीनू चौधरी व नीलोखेड़ी सिविल अस्पताल की एसएमओ डा.अन्नू के नेतृत्व में टीम तरावड़ी के सौकड़ा रोड स्थित केसरीनंदन अस्पताल में गर्भपात के मामले में जांच करने पहुंची। जानकारी थी कि कुछ दिन पहले करनाल निवासी एक महिला का दवाइयां देकर गर्भपात किया गया था। गर्भपात करवाने वाली महिला ने यह शिकायत करनाल पुलिस को दी थी। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच के लिए करनाल के सीएमओ को लिखा था। जांच के लिए सीएमओ ने इस टीम का गठन किया गया था।
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अस्पताल संचालन में मिली कई गड़बड़ियां
सबसे चौकाने वाली बात सामने आई कि जिस डाक्टर जसमेर के नाम पर यह अस्पताल चलाया जा रहा था। उसकी मौत करीब छह साल पहले हो चुकी है। जबकि अस्पताल में आज तक उनके नाम की मोहर का इस्तेमाल किया जा रहा है। टीम ने अस्पताल की संचालक आशा से डिग्री के बारे में पूछा तो उन्होंने बीएएमएस की डिग्री दिखाई। जब उसकी जांच की गई तो वह भी फर्जी मिली। इसके बाद टीम ने अस्पताल की सभी दवाइयों व रिकार्ड की जांच शुरू की। अस्पताल के संचालन में पूरी तरह गोलमाल पाया गया। इसके बाद जांच टीम ने अस्पताल में रखी काफी दवाइयों व डाक्टर के काम में उपयोग होने वाले उपकरणों को सील करके पुलिस को सौंप दिया और पुलिस भी अस्पताल संचालक आशा व उसके सहयोगी अमित को साथ ले गई।
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एक महिला के गर्भपात के मामले में सीएमओ ने जांच टीम का गठन किया था जिसका नेतृत्व वह कर रही हैं। टीम ने जांच में पाया कि जिस डा. जसमेर के नाम से अस्पताल चल रहा है उनका छह साल पहले देहांत हो चुका है और अस्पताल चलाने वाली आशा की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। इसके बाद की कार्रवाई पुलिस की है।
-डॉ. शीनू चौधरी, डिप्टी सीएमओ करनाल
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