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Karnal News: चढ़ा वो पीठ पर मेरी मुझे ऊंचा उठाने को...
Mon, 30 Dec 2024 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 30 Dec 2024 02:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। मन की उड़ान साहित्यिक मंच की ओर से एमडीडी बाल में शाम -ए -गजल का सातवें कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य डॉ. महावीर प्रसाद शास्त्री ने की। उन्होंने कहा कि जमाने के चलन को बया करते हुए कहा कि हवा ऐसी चली उल्टी, हुआ ये क्या ज़माने को, चढ़ा वो पीठ पर मेरी मुझे ऊंचा उठाने को...।
कवयित्री पूनम गोयल ने अपने दिल का दर्द कुछ यूं बयां किया-छोड़ना है तो छोड़ दो मुझे, प्यार का दिखावा मत कर, वफादारी तो तेरे बस की नहीं बेवफाई तो तमीज से कर...। वहीं विशिष्ठ अतिथि गुरमुख सिंह वड़ैच ने अपने दिल का हाल कहा- तेरे बगैर किसी और को देखा नहीं मैंने, सूख गया तेरा वो गुलाब मगर फेंका नहीं मैंने।
वरिष्ठ शायर डॉ एसके शर्मा ने अपने अनुभव को साझा किया- दुख में अपने भी गैर ही निकले, हमने ये आज़मा के देख लिया, हमने भी दिल लगा के देख लिया उसको अपना बना के देख लिया।
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वरिष्ठ कवयित्री डॉ अंजू शर्मा ने आशंका व्यक्त की-जला न दे ये आशियां किसी का, चिंगारी पे बर्फ के गोले रखो। कवि प्रेम पाल सागर कुंजपुरा ने बेटियों के प्रति प्रेम को व्यक्त किया- मासूम बेटियों के प्यार का कायल हो जाता हूं मैं, चोट पहुंचे उन्हें तो घायल हो जाता हूं मैं।
मुख्य अतिथि कवि सरदार तरलोचन सिंह ने कहा- हवेली दे इक पासे दे विच दादे ने बैठक बनवाई, बाप मेरे दे काने दे विच दादी जित्थे लोरी गाई। मंच संस्थापक रचनाकार रामेश्वर देव ने संदेश दिया- ये अपना चमन है करो इसकी हिफाजत, ऐसे कहीं फूलों भरा मंज़र न मिलेगा।
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करनाल। मन की उड़ान साहित्यिक मंच की ओर से एमडीडी बाल में शाम -ए -गजल का सातवें कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य डॉ. महावीर प्रसाद शास्त्री ने की। उन्होंने कहा कि जमाने के चलन को बया करते हुए कहा कि हवा ऐसी चली उल्टी, हुआ ये क्या ज़माने को, चढ़ा वो पीठ पर मेरी मुझे ऊंचा उठाने को...।
कवयित्री पूनम गोयल ने अपने दिल का दर्द कुछ यूं बयां किया-छोड़ना है तो छोड़ दो मुझे, प्यार का दिखावा मत कर, वफादारी तो तेरे बस की नहीं बेवफाई तो तमीज से कर...। वहीं विशिष्ठ अतिथि गुरमुख सिंह वड़ैच ने अपने दिल का हाल कहा- तेरे बगैर किसी और को देखा नहीं मैंने, सूख गया तेरा वो गुलाब मगर फेंका नहीं मैंने।
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वरिष्ठ शायर डॉ एसके शर्मा ने अपने अनुभव को साझा किया- दुख में अपने भी गैर ही निकले, हमने ये आज़मा के देख लिया, हमने भी दिल लगा के देख लिया उसको अपना बना के देख लिया।
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वरिष्ठ कवयित्री डॉ अंजू शर्मा ने आशंका व्यक्त की-जला न दे ये आशियां किसी का, चिंगारी पे बर्फ के गोले रखो। कवि प्रेम पाल सागर कुंजपुरा ने बेटियों के प्रति प्रेम को व्यक्त किया- मासूम बेटियों के प्यार का कायल हो जाता हूं मैं, चोट पहुंचे उन्हें तो घायल हो जाता हूं मैं।
मुख्य अतिथि कवि सरदार तरलोचन सिंह ने कहा- हवेली दे इक पासे दे विच दादे ने बैठक बनवाई, बाप मेरे दे काने दे विच दादी जित्थे लोरी गाई। मंच संस्थापक रचनाकार रामेश्वर देव ने संदेश दिया- ये अपना चमन है करो इसकी हिफाजत, ऐसे कहीं फूलों भरा मंज़र न मिलेगा।