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यूपी के किसानों के धान पर टिकी है हरियाणवी राइस मिलर्स की निगाहें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 02:36 AM IST
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Haryanvi rice millers are eyeing the paddy of UP farmers
हरियाणवी राइस मिलर्स हों या फिर आढ़ती, सभी की निगाहें अब सीमांत राज्यों विशेषकर उत्तरप्रदेश के किसानों पर टिकी हैं। हरियाणा सरकार ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल खोलकर करीब यूपी के 17 हजार किसानों की 8042 एकड़ में खड़ी धान की फसल का पंजीकरण भी किया है। जबकि पिछले साल यूपी के 34 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया था लेकिन इसके बावजूद हरियाणा सरकार की प्राथमिकता पहले हरियाणा के किसानों के धान खरीदने पर हैं। जबकि राइस मिलर्स व आढ़ती लगातार सीमांत राज्यों के किसानों को हरियाणा के साथ ही हरियाणा के मंडियों में धान लेकर आने का दबाव बना रहे थे।
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हरियाणा राज्य में राइस मिलों की संख्या 1500 से अधिक हैं लेकिन इनमें 1350 ऐसे राइस मिल हैं, जो पिछले लंबे समय से सीएमआर का कार्य करते हैं। करनाल जिले में भी करीब 300 राइस मिलों में से 260 राइस मिल सीएमआर का कार्य करते हैं। पिछले साल करीब 278 राइस मिल पंजीकृत थे। राष्ट्रीय कृषि बाजार पर ई-नेम पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले साल करीब करनाल जिले में उत्तर प्रदेश के 34000 किसानों ने धान लाने के लिए पंजीकरण कराया था, लेकिन इस बार यह संख्या आधी रह गए हैं। राइस मिलर्स की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने बड़ी बड़ी क्षमता वाले राइस मिल लगा रखे हैं। अधिकांश राइस मिलर्स बासमती व अन्य प्रजाति के चावलों का भी बड़ा कारोबार करते हैं। लेकिन जो सीएमआर का कार्य करते हैं, उन्हें भी सिर्फ करनाल जिले से पर्याप्त धान नहीं मिल पाता है। मिलों को संचालित करते रहने के लिए यूपी का धान चाहिए। दूसरी बात यह कुछ राइस मिलर्स ने पहले से ही बड़ी मात्रा में चावल खरीद रखा है, यूपी के किसानों के नाम पर उसी सस्ते में खरीदे गए चावल को सीएमआर में खपाने की भी योजना है। इस बार जिले में करीब 55 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया है। पोर्टल तो तीन अक्तूबर के बाद भी खोला गया है, बड़ी संख्या में पंजीकरण भी हुआ है लेकिन सरकार ने यूपी व अन्य सीमांत राज्यों के किसानो के लिए पोर्टल को नहीं खोला है।
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पिछले दिनों मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत में भी राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सीमांत किसानों को धान लाने की अनुमति देने की मांग की थी, जिस पर सरकार ने अपना संकल्प दोहराते हुए स्पष्ट कर दिया था कि पहले हरियाणा के किसानों का धान खरीदा जाएगा। उसके बाद यूपी व अन्य सीमांत राज्यों के किसानों को धान लाने के अनुमति दी जाएगी।
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-हरियाणा में जितने राइस मिल हैं, सिर्फ हरियाणा में उत्पादित होने वाले धान से उन्हें पर्याप्त धान नहीं मिल पाएगा। इसलिए सीमांत राज्यों का धान तो चाहिए ही चाहिए। बड़ी संख्या में राइस मिलर्स व आढ़ती ऐसे हैं, जिनका सीमांत राज्यों के किसानों पर बड़ी धनराशि बकाया है। सरकार को अतिशीघ्र यूपी व आसपास के राज्यों के किसानों को धान लाने की अनुमति देनी चाहिए, अन्यथा राइस मिलर्स को करोड़ो रुपये का नुकसान हो जाएगा।

-विनोद कुमार गोयल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन।
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-हरियाणा सरकार को सबसे पहले अपने राज्य के किसानों का धान खरीदना चाहिए। जब हरियाणा के किसानों का धान बिक जाए तो निश्चित तौर पर सीमांत किसानों को धान लाने का मौका दिया जाना चाहिए। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा गया है।
-ईलम सिंह, पूर्व चेयरमैन मार्केट कमेटी कुंजपुरा।
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